मध्य प्रदेश सरकार केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्रालय के सहयोग से 404 किमी लंबा चंबल एक्सप्रेस-वे बना रही है. यह एक्सप्रेस-वे मध्य प्रदेश के अलावा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान को भी जोड़ेगा. इस लागत 8250 करोड़ रुपये बताई जा रही है. जानकारी के मुताबिक, चंबल एक्सप्रेस-वे की यूपी में लंबाई 18 किमी, राजस्थान में 77 किमी जबकि एमपी में इसकी लंबाई 303 किमी के करीब होगी. यह एक्सप्रेस-वे इसलिए खास है क्योंकि यह 6 लेन एक्सेस कंट्रोल हाईवे है. यह एक्सप्रेस-वे सभी बड़े हाईवे से जुड़ेगा. चंबल एक्सप्रेस-वे मध्य प्रदेश-राजस्थान के बॉर्डर श्योरपुर से शुरू होगा. बीरपुर, सबलगढ़, झंडुपरो, गोहद, मुरैना, अम्बा, बहरी (भिंड) से गुजरेगा. उत्तर प्रदेश में इटावा से होकर गुजरेगा. इस एक्सप्रेस-वे के बन जाने से इटावा से कोटा का सफर सिर्फ छह घंटे में पूरा होगा. यह एक्सप्रेस-वे कानपुर को दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से सीधे जोड़ेगा.
चंबल एक्सप्रेस-वे 404 किलोमीटर लंबा होगा. यह मध्य प्रदेश, राजस्थान और उत्तर प्रदेश से गुजरेगा. एक्सप्रेस-वे उत्तर प्रदेश के कानपुर से निकलेगा. इसके बाद ये दिल्ली-मुंबई कॉरिडोर से जुड़ जाएगा. चंबल एक्सप्रेस-वे की यूपी में लंबाई 18 किमी, राजस्थान में 77 किमी जबकि एमपी में इसकी लंबाई 303 किमी के करीब होगी. यह एक्सप्रेस-वे इसलिए खास है क्योंकि यह 6 लेन एक्सेस कंट्रोल हाईवे है. यह एक्सप्रेस-वे सभी बड़े हाईवे से जुड़ेगा. इससे यहां से गुजरने वाले आसानी ने और बिना किसी असुरक्षा या परेशानी से अपने-अपने स्थानों पर पहुंच जाएंगे. इससे पैसे और समय दोनों की बचत होगी.
इस एक्सप्रेस-वे से एक और अविश्वसनीय बदलाव देखने की संभावना है. वो ये कि, किसान अपनी फसलें राज्य स्तर पर बेच सकेंगे. वे मुंबई और दिल्ली के बाजारों में अपनी फसल बेच सकेंगे. बता दें, अभी तक चंबल को डाकुओं और अपराध के लिए जाना जाता था. अपहरण और हत्या इस जगह की पहचान थी. इस एक्सप्रेस-वे के बनने से ये पहचान बदल जाएगी. लोगों को रोजगार मिलेगा और आजीविका के साधन मिलेंगे. इस बात को केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी भी कह चुके हैं.
केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने इस चंबल एक्सप्रेस-वे की कहानी सोशल मीडिया पर भी शेयर की थी. उन्होंने लिखा था कि शिवराज सिंह चौहान ने मध्य प्रदेश के दोबारा मुख्यमंत्री बनने पर उनसे चंबल एक्सप्रेस वे बनाने की बात कही थी. उस वक्त केंद्रीय मंत्री गडकरी ने उनसे वादा किया था अगर वे तीन महीने के अंदर अधिग्रहण कर जमीन देते हैं तो वे प्रधानमंत्री को बुलाकर एक्सप्रेस-वे का निर्माण शुरू कर देंगे.
केंद्रीय मंत्री ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा था कि चंबल का देश का सबसे पिछड़ा इलाका बताया जा ता है. यहां श्योपुर, मुरैना और आस पास के इलाकों में सहरिया जैसी कई जनजातियां निवास करती हैं. ये सड़क उनकी जिंदगी को बेहतर बनाएगी. ये सड़क इन इलाकों में आर्थिक समृद्धि लगाएगी और यहां उद्योग-रोजगार के नए अवसर मिलेंगे.
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