पिता की करोड़ों की संपत्ति का किया त्याग, 8 साल की उम्र में देवांशी बनी जैन नन, इस तरह करना होगा जीवन यापन

सूरत. महज 8 साल की उम्र में जैन नन बनने का फैसला कर देवांशी ने हर किसी को चौंका दिया. हैरानी की बीत इसलिए थी कि जिस उम्र में बच्चे खेलते-कूदते हैं उस उम्र के पड़ाव पर देवांशी ने जैन दीक्षा लेने का फैसला किया. भारत के प्रमुख हीरा कारोबारियों में से एक धनेश संघवी की बेटी करोड़ों की संपत्ति को त्याग कर जैन नन बन गई हैं. देवांशी के पिता धनेश संघवी हैं, जो संघवी एंड संस के मालिक हैं. देवांशी की मां का नाम अमी संघवी है. देवांशी ने हाल ही में जैन नन बनने का फैसला किया और दुनिया की भोग-विलासता वाली जीवन का त्याग कर दिया.

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