#जीवनसंवाद: तनाव और जिंदगी के बरगद!

  • July 8, 2020, 1:30 pm
नौकरी छूटने और जाने की आशंका के बादल मंडराने लगे हैं. पूरी दुनिया भरे समंदर में एक ऐसी नाव पर सवार है, जिसमें थोड़े-थोड़े छेद हो गए हैं. उनको ठीक किया जा रहा है, लेकिन कब तक ठीक हो पाएंगे. अभी कुछ बताना संभव नहीं. नाव अपनी पुरानी गति से चल पाएगी इस बारे में भी बहुत ही स्पष्टता से कुछ नहीं कहा जा सकता. इतना तय है कि नाव डूबेगी नहीं. क्योंकि समंदर हमारी परीक्षा भले ले रहा हो लेकिन मनुष्यता का इतिहास अटूट संघर्ष से भरा हुआ है.

इस समय हारने की कहानियां वातावरण में इतनी अधिक तैर रही हैं कि समझदार और ताकतवर दिखने वाले लोग भी भीतर ही भीतर घबराने लगें. यह बिल्कुल सच है कि सब कुछ हमारे नियंत्रण में नहीं है. मंदी, बदहाल अर्थव्यवस्था, कर्ज में डूबे लोग निराशा की ओर बढ़ सकते हैं. बढ़ ही रहे हैं.

मुश्किल कम होती नहीं दिख रही है, इतनी जल्दी. सब कुछ बिखरा-बिखरा है. लेकिन ठीक इसी जगह आकर तो मन के साहस को इकट्ठा करना है. भीतर आवाज़ देनी है. दुनिया भर को ऑक्सीजन देने वाले जंगलों में हर साल आग लगती है. जंगल अपने आप लगने वाली आग से इतने अधिक नष्ट नहीं होते जितने मनुष्य के दखल से दुखी होते हैं.

प्रकृति अपने आप में परिपूर्ण है. हम उस में कुछ जोड़ते तो नहीं है लेकिन उसकी गति में रुकावट जरूर पैदा करते हैं. मनुष्य प्रकृति को अपना हिस्सा नहीं मानता. उस पर विजय पाने की अपने आदिम सपने को अब तक नहीं छोड़ पाया है.

#जीवनसंवाद : अकेलापन और ख़ुद का ख्याल!
अपने अस्तित्व को हमने कामयाबी से इतना जोड़ लिया कि ज़रा सी असफलता डराने लगी. हमें असफल होना भी सीखना होगा, बच्चों को असफलता के बारे में समझाना जरूरी है. इससे ही संभव है कि हम उदासी, तनाव, निराशा को सहना सीख सकें.

इन दिनों हर तरफ से संघर्षों में हार कर जीवन को समाप्त करने की कहानियां सामने आ रही हैं. हां मुश्किल तो है लेकिन इतना मुश्किल नहीं है कि जीने के सारे रास्ते बंद कर दिए जाएं. कैसे कोई छोटे-छोटे मासूम बच्चों का पिता इतना स्वार्थी हो सकता है कि वह अपने जीवन को समाप्त कर ले. बिना इस बात की चिंता किए कि उसके बच्चों का उसके बाद क्या होगा.

कोई भी व्यक्ति असफलता से टूट सकता है. झुक सकता है. लेकिन अगर उसकी आत्मा में थोड़ा भी प्रेम है, उजाला है तो उसे उनके प्रति प्रेम से भरा रहना ही होगा जो उसके नहीं रहने पर जीते जी मर जाते हैं. बड़ी संख्या में ऐसे लोगों के संपर्क में आने के बाद मैं यह बात बहुत विश्वास से कह सकता हूं कि जब कोई मनुष्य गहरे दुख से इतना दबा रह जाता है कि उसे आशा की कोई किरण नहीं दिखती तो उसे उनकी और देखना चाहिए जो उसक स्थिति से ऑक्सीजन लेते हैं.

आप सब को जानकर हैरानी होगी कि सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या के बाद बिहार और उत्तराखंड से आत्महत्या की अनेक घटनाएं सामने आईं. इसकी वजह यह है कि युवाओं में सुशांत की लोकप्रियता बहुत थी. उनको लगा कि जब जीवन में इतना अधिक अर्जित कर लेने वाला व्यक्ति जिंदगी को नहीं संभाल पाया तो वह कैसे संभाल पाएंगे. ‌‌

मैं इसे जीवन के प्रति सही शिक्षा की कमी के रूप में देखता हूं. जीवन बहुत बड़ा, विशाल और असंभव संभावनाओं से भरा हुआ है. किसी एक व्यक्ति के कारण इसे संकुचित मत करिए. किसी एक ने धोखा दिया. किसी ने दिल तोड़ा. नौकरी से निकाला. प्यार और व्यापार में धोखा दिया. उससे पूरी दुनिया अविश्वास के योग्य नहीं हो जाती.

जीवन में हमेशा अपने लिए जीने का दृष्टिकोण नहीं रखना चाहिए. माता-पिता, भाई- बहन, दोस्त, अपने गांव-शहर, अपनी मिट्टी ना जाने किस किस का कर्ज है, आप पर. इस पूरे कर्ज का कुछ तो हिसाब कीजिए. जब कभी जीवन को समाप्त करने का ख्याल आए, ध्यान कीजिए कितने ही लोगों का कर्ज चुकाना बाक़ी है. ‌

#जीवन संवाद : अपना रंग सहेजना!
कभी महाभारत में पांडवों के दुख का ख्याल भी कीजिए. कितना अपमान, यातना और निरादर सहना पड़ा उनको अपनों के ही कारण. वह भी श्रीकृष्ण जैसे शक्तिशाली और सर्वगुण संपन्न मार्गदर्शक के होते हुए भी. इसका अर्थ केवल इतना है कि अपने-अपने हिस्से का किरदार सबको निभाना है. जीवन के प्रति आस्था रखनी है. जब कभी मन उदास हो इन पंक्तियों पर ध्यान ले जाइएगा. यह सोचते हुए कि आप क्या कर रहे हैं-

'लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं
मैंने उस हाल में जीने की क़सम खाई है'
-अमीर क़ज़लबाश .
आज हमें इस क़सम बहुत जरूरत है!

संपर्क: ई-मेल: dayashankarmishra2015@gmail.com. आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.​

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    चिंता के विचार आपकी ख़ुशी को बर्बाद कर सकते हैं। ऐसा न होने दें, क्योंकि इनमें अच्छी चीज़ों को ख़त्म करने की और समझदारी में निराशा का ज़हरीला बीज बोने की क्षमता होती है। ख़ुद को हमेशा अच्छा परिणाम पाने के लिए प्रोत्साहित करें और ख़राब हालात में भी कुछ-न-कुछ अच्छा देखने का गुण विकसित करें। ख़ास लोग ऐसी किसी भी योजना में रुपये लगाने के लिए तैयार होंगे, जिसमें संभावना नज़र आए और विशेष हो। भूमि से जुड़ा विवाद लड़ाई में बदल सकता है। मामले को सुलझाने के लिए अपने माता-पिता की मदद लें। उनकी सलाह से काम करें, तो आप निश्चित तौर पर मुश्किल का हल ढूंढने में क़ामयाब रहेंगे। किसी से अचानक हुई रुमानी मुलाक़ात आपका दिन बना देगी। काम के लिए समर्पित पेशेवर लोग रुपये-पैसे और करिअर के मोर्चे पर फ़ायदे में रहेंगे। सफ़र के लिए दिन ज़्यादा अच्छा नहीं है। जीवनसाथी के ख़राब व्यवहार का नकारात्मक असर आपके ऊपर पड़ सकता है। स्वयंसेवी कार्य या किसी की मदद करना आपकी मानसिक शांति के लिए अच्छे टॉनिक का काम कर सकता है। परेशान? आप पंडित जी से प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
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