#जीवनसंवाद : ऐसा आपके साथ ही नहीं होता!

  • July 2, 2020, 10:45 pm
इस वक्त बहुत से लोग हर दूसरी बात पर ऐसा कहते हुए पाए जा रहे हैं कि मेरे साथ ही ऐसा क्यों होता है! दुनिया भर में घट रही घटना का हम पर कोई असर न पड़े, यह कैसे संभव है. हम समंदर में हैं, समंदर में तूफान है. तो हमारी नौका डांवाडोल होगी ही. उसमें झटके लगेंगे. हिचकोले के साथ ही डर का भी सामना करना पड़ेगा, जिसमें नौका डूबने की आशंका शामिल है. लेकिन जिंदगी आशंका से नहीं आशा से बंधी है. जीवन के रंगमंच पर आशा के अतिरिक्त किसी दूसरे किरदार में यह शक्ति नहीं होती कि वह तूफानों सी उथल-पुथल का सामना कर पाए.

जीवन है तो संघर्ष है, संघर्ष है तो इसका अर्थ है जीवन बचा हुआ है. नदी, समंदर में फंसे जीवित लोग ही बाहर निकलने के लिए संघर्ष करते हैं. मृत शरीर नहीं. उनके नहीं डूबने की खूबी के बाद भी वह केवल बह सकते हैं. वह प्रतिरोध नहीं कर सकते. प्रतिरोध और संघर्ष केवल जीवित व्यक्ति ही कर सकते हैं. इसलिए संघर्ष को जीवन से अलग नहीं समझा जाना चाहिए. वह जीवन का ही हिस्सा है. जिंदगी से अलग नहीं.

गुलाब में केवल फूल और खुशबू ही नहीं कांटे भी होते हैं. हम संघर्ष को जब जीवन से काटकर देखने लगते हैं तो इस तरीके के प्रश्न उपस्थित होते हैं, - मेरे साथ ऐसा क्यों होता है? भाग्य ने कभी मेरा साथ नहीं दिया. मैं तो कभी भी खुश किस्मत नहीं रहा? कठिनाइयां हमेशा मेरे रास्ते में ही आती हैं.


मजेदार बात है कि जब हम कुछ हासिल कर रहे होते हैं तो हम स्वयं के श्रेष्ठ और सबसे बेहतर होने के दावे से भरे होते हैं. हमें कुछ मिल रहा होता है तो हम यही मानते हैं कि हम ही इसके हकदार हैं. जब चीजें उल्टी होने लगती हैं तो हम दूसरों, प्रकृति और ईश्वर तक को कसूरवार मानने लगते हैं. इस बारे में आर्थर ऐश का उदाहरण मुझे बहुत ही प्रिय है. आर्थर सुप्रसिद्ध अमेरिकी खिलाड़ी थे. उनके नाम पर उपलब्धियों की बहुत लंबी श्रृंखला है. एक सर्जरी के दौरान चढ़ाए गए खून से आर्थर को एड्स हो गया था. उनके चाहने वाले दुनिया भर में थे जब सबने उनसे यही प्रश्न पूछा कि आपके साथ ही ऐसा क्यों हुआ तो उसके उत्तर में आर्थर ने केवल इतना ही कहा था कि जब करोड़ों बच्चों के बीच में से मुझे कुछ उन भाग्यशाली लोगों में शामिल होने का मौका मिला जो टेनिस खेल सकते हैं, तब मैंने कोई शिकायत नहीं की थी. उसके बाद मैं दुनियाभर की उन प्रतियोगिताओं का विजेता बना जो बाकी सब के लिए दुर्लभ हैं. मुझे हर वह चीज मिली जो हर किसी के लिए आसान नहीं है. तब मैंने कोई शिकायत नहीं की तो आज मैं शिकायत कैसे कर सकता हूं. ‌

आपके साथ जो कुछ भी हो रहा है, जो कुछ भी हुआ है उसमें आप के निर्णय और आपके होने की सबसे बड़ी भूमिका है. बहुत कुछ हमें ही चुनना होता है. इससे भी महत्वपूर्ण यह है जब हम यह कहते हैं कि ऐसा मेरे ही साथ क्यों होता है तो हम जीवन की आस्था और उसके विश्वास को कहीं ना कहीं तोड़ रहे होते हैं. छोटा कर रहे होते हैं. आप किसी भी ऐसे व्यक्ति को याद कीजिए, जिसे आप अपनी दृष्टि में बड़ा मानते हों! जिसकी कामयाबी और उपलब्धि को आप महत्वपूर्ण मानते हैं. उसके जीवन में कितना संघर्ष है! हम अक्सर व्यक्तियों के संघर्ष को अनदेखा कर देते हैं. जो जहां भी है उसकी उसने कुछ ना कुछ कीमत चुकाई है! वहां तक पहुंचने के लिए उसने उस संघर्ष का साथ दिया है जिसके लिए हम तैयार नहीं थे.

संघर्ष हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है. जिंदगी में थोड़ा झांकने की कोशिश कीजिए. हम दूसरों को अक्सर अपनी कामयाबी के किस्से नहीं बताते. बल्कि संघर्ष की कहानियां बताते हैं! संघर्ष को शर्म का नहीं आनंद का उत्सव बनाइए. टेलीविजन और अखबारों में सबसे अधिक क्या पढ़ा जाता है? सबसे अधिक यहां भी संघर्ष की गाथा ही पढ़ी जाती है.


हम यही तो जानना चाहते हैं कि जो आज हमें शिखर पर दिख रहे हैं वह यहां तक कैसे पहुंचे. हिमालय की चोटी पर खड़े पर्वतारोही की कहानी क्या कहती है. जो शिखर पर दिख रहा है न जाने कितनी ही बार गिरा होगा. कितने ही तूफानों में फंसा होगा. जीवन मरण के प्रश्न हिमालय के तूफानों में हर पल मौजूद रहते हैं. अगर आप उस चोटी पर खड़े पर्वतारोही के संघर्ष को नहीं महसूस कर पा रहे हैं तो इसका अर्थ यह हुआ कि आप उसकी सफलता को ठीक से समझ नहीं पाएंगे. सफलता का स्वाद वह आपसे साझा भी करना चाहेगा तो आपको मजा नहीं आएगा.

जीवन में संघर्ष सबसे महत्वपूर्ण चीज़ है. इसलिए इससे बचने के रास्ते मत खोजिए. हमेशा याद रखिए, सरल निर्णय से कभी बड़ी चीज़ नहीं पाई जा सकती. बड़े को पाने का रास्ता सरल हो ही नहीं सकता. मुश्किल निर्णय के बिना हम बड़ी चीजों तक नहीं पहुंच सकते. इसलिए संघर्ष को अपना साथी ही समझिए. जीवन को हर दिन नई यात्रा. जैसे रेलगाड़ी आपको स्टेशन पर उतार कर आगे बढ़ जाती है. वह आपसे बहुत सारे गिले शिकवे नहीं करती. अगर रेल इन सब में उलझ जाए तो वह एक ही स्टेशन पर खड़ी रह जाएगी! उससे आगे नहीं बढ़ पाएगी. अपनी जिंदगी को जीवन की आस्था और वैज्ञानिक दृष्टिकोण दीजिए. कमजोर सहारों और तर्कों के आधार पर जीवन को कभी बड़ा नहीं किया जा सकता. आम की खेती के लिए आपको कुछ वर्षों का इंतजार करना ही होगा. वरना आप बड़े मजे से गुलाब और गेंदे की खेती कर सकते हैं. वह बहुत आसान है लेकिन उसका आनंद आम के बाग़ की तरह जिंदगी भर नहीं मिलेगा. बड़े संघर्षों का सबसे बड़ा अर्थ यही है.

दयाशंकर मिश्र
संपर्क: ई-मेल: dayashankarmishra2015@gmail.com. आप अपने मन की बात फेसबुक और ट्विटर पर भी साझा कर सकते हैं. ई-मेल पर साझा किए गए प्रश्नों पर संवाद किया जाता है.
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