पल्लवी त्रिवेदी की 4 कविताएं: भाषा, भरोसा, यूं ही, रो लो पुरुषों

  • October 30, 2021, 11:08 am

भोपाल पुलिस विभाग में कार्यरत पल्लवी त्रिवेदी इकॉनमिक ऑफेंस विंग में अडिशनल इंस्पेक्टर जनरल हैं. कटीले चुटीलें व्यंग्य और क्षणिकाओं से लोगों के दिलों में जगह बनाने वालीं पल्लवी कल्पनाओं, संवेदनाओं और वाकयात को जिस तरह कागज़ पर उड़ेलती हैं, वह उनकी बारीक नज़र और भाषा पर पकड़ को रेखांकित करता है. मध्यप्रदेश के शिवपुरी में जन्मीं पल्लवी की कविताएं, कहानियां, व्यंग्य और यात्रा संस्मरण कई अखबारों और मैगजीन्स में प्रकाशित होते रहे हैं. उनका व्यंग्य संग्रह 'अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा' हाथोंहाथ लिया गया और कविता संग्रह 'तुम जहाँ भी हो' बेहद सराहा गया. इस कविता संग्रह के लिए उन्हें वागीश्वरी सम्मान से भी नवाज़ा गया.



Pallavi Trivedi Hindi Poems: पुलिस की सख्त नौकरी और भावनाओं की गहनतम कोमलता.. ये कॉम्बो ऑफर जिन्दगी विरलों को ही देती है. इस वक्त हम बात रहे हैं पल्लवी त्रिवेदी की जो भोपाल पुलिस विभाग में कार्यरत हैं. वह इकॉनमिक ऑफेंस विंग में अडिशनल इंस्पेक्टर जनरल हैं. कटीले चुटीलें व्यंग्य और क्षणिकाओं से लोगों के दिलों में जगह बनाने वालीं पल्लवी कल्पनाओं, संवेदनाओं और वाकयात को जिस तरह कागज़ पर उड़ेलती हैं, वह उनकी बारीक नज़र और भाषा पर पकड़ को रेखांकित करता है. आइए वक्त गंवाए बिना उनकी पहली कविता सुनें जिसका शीर्षक है भाषा…

हंसी की भाषा में सुनाऊँगी अपने सबसे घने अवसाद के किस्से
रूठने की भाषा में वसूलूंगी तुमसे देर से आने का हर्जाना
ग़ुस्से की भाषा में कराउंगी स्मरण तुम्हें तुम्हारे वायदे
तुतलाती बोली में पोंछ दूँगी तुम्हारे माथे से टपकती दिनभर की थकान

उदासी की भाषा में दूँगी तुम्हारी बेरुख़ी का जवाब
आंसुओं की भाषा में बतलाऊंगी कि
‘आह..दुखता है मन तुम्हारे मन पर पड़े नील से’

झूठ की भाषा में सुनाऊँगी अपने ज़ख्मों के हालचाल
सच की भाषा में थामूंगी हर बार तुम्हारा हाथ

प्रार्थना की भाषा में तुम्हारे लिए उगाऊंगी स्वप्न अपनी आंखों में
कामना की भाषा में तुम्हें उबारूँगी ठुकराए जाने की पीड़ा भरी स्मृति से

मौन की भाषा में पुकारूँगी तुम्हारा नाम
चिड़िया की भाषा में भरूँगी तुम्हारी आत्मा में संगीत

और विदा के वक्त
गूँथकर सारी भाषाएं एक चुम्बन में
रख दूँगी तुम्हारे होंठों पर
सफ़र के सामान की तरह।

मध्यप्रदेश के शिवपुरी में जन्मीे़ पल्लवी की कविताएं, कहानियां, व्यंग्य और यात्रा संस्मरण कई अखबारों और मैगजीन्स में प्रकाशित होते रहे हैं. उनका व्यंग्य संग्रह ‘अंजाम-ए-गुलिस्तां क्या होगा’ हाथोंहाथ लिया गया और कविता संग्रह ‘तुम जहाँ भी हो’ बेहद सराहा गया. इस कविता संग्रह के लिए उन्हें वागीश्वरी सम्मान से भी नवाज़ा गया. जल्द ही इस यायावर कवियित्री का एक यात्रा संस्मरण भी प्रकाशित होने जा रहा है. दोस्तो, पल्लवी की कविताएं संवाद हैं, खुद से, तुझसे, मुझसे और भीतर के उन कई भित्तिचित्रों से जो सदैव जीवन भर साथ ही चलते हैं हमारे, किसी साए की तरह… उनकी अगली कविता है- तुम जहां भी हो.

ये दुनिया इतनी भी बड़ी नहीं कि तुम्हारे होने को महसूस न कर पाऊँ
इस दुनिया में अभी इतना भी शोर नहीं कि तुम्हारी साँसों का उठना गिरना न सुन पाऊँ
दुनिया के तमाम मृगों में इतनी कस्तूरी नहीं कि तुम्हारी देह की खुशबू मुझसे छुपी रह सके

हाँ यकीनन तुम मेरी बाहों की हद में नहीं हो
नज़र की हद में भी नहीं और
तुम्हारे शहर का नाम ,गली,मकान नंबर मेरी किसी डायरी में नहीं

तुम एक खोया हुआ पता हो
कविता की डायरी का गुम हुआ पन्ना हो
मगर पते नक्शों से नहीं ढूंढें जाते
क़दमों के निशानों से ढूंढ लिए जाते हैं
डायरी के गुम पन्ने अक्सर माज़ी की किसी गली में किसी शाख पर फड़फड़ाते मिल जाया करते हैं

ग़र मियाँ ग़ालिब कहते थे कि
मुहब्बत में नहीं है फर्क जीने और मरने का
तो मैं कहती हूँ
मुहब्बत में नहीं है फर्क मिलने और बिछड़ने का
उसी के दिल में रहते हैं जिस दर से कभी निकले

मेरा मुट्ठी भर दिल जिसका पता हो
वो क्या ही लापता होगा
बहुत छोटी है जानां ये दुनिया तुम्हारे खोने के लिए

हमेशा मेरी रूह की हद में हो
तुम जहां भी हो…

दुनिया विश्वासघातों और डगमगाते भरोसों की कथाओं से भरी पड़ी है. मगर जब पल्लवी बात करती हैं अपनी कविता में भरोसे की तो वह इसे अपने शब्दों के जरिए ऐसा मजबूत जड़, तना और शाखाएं दे देती हैं कि वह लहलहाने लगता है, और ऐसा लगता है मानों हर भरोसे का फल मीठा ही होता है.. मीठा ही होगा. कितनी खूबसूरती से रची है उन्होंने यह कविता जिसका शीर्षक है भरोसा .. आइए आप भी सुनें
नदी में डूबते चाँद और सूर्य को भरोसा होता है कि
नदी उन्हें नहलाकर दोबारा नभ में रख देगी
इसी भरोसे पर तो चले आते हैं रोज़ डुबकी लगाने।

बच्चे गेंद उछालते वक्त कभी शंका नहीं करते कि
आसमान उनकी गेंद लौटाएगा या नहीं ।

वृक्षों की गोद में महफूज़ रहती है परिंदों की उड़ान
सारे घोंसले शाखों पर परिंदों का अटूट भरोसा हैं ।

हवाएं कभी चुम्बनों को हड़प नहीं करतीं
वे सही वक्त पर उन्हें लौटा देती हैं सही होंठों को
हवाओं में तैरते चुम्बन प्रेमियों की अमानत हैं ।

मृत्यु लौटाती है जीवन को और भी बेहतर बनाकर
ब्रह्मांड लौटा देता है प्रार्थनाएं ‘आमीन’ की मोहर लगाकर

प्रिय ,तुम मुझे निःशंक होकर सौंप सकते हो अपना हृदय
मैं लौटा दूंगी उसे प्रेम से भरकर,
जब तुम पा जाओ उसके लिए कोई बेहतर जगह।

दोस्तो, रोवन का कोई जेंडर नहीं होता. लेकिन समाज ने आसुंओं को महिला की आंखों का काजल माना और पुरुषों के लिए लज्जा का सामान… इस दो फाड़ ने इंसान का कितना बुरा किया, कितना रेता उसे. पल्लवी अपनी कविता रो लो पुरुषों में जो कहती हैं, वह काबिलेगौर है… आइए सुनें..

रो लो पुरुषो

बड़ा कमज़ोर होता है
बुक्का फाड़कर रोता हुआ आदमी
मज़बूत आदमी बड़ी ईर्ष्या रखते हैं
इस कमज़ोर आदमी से ।

सुनो लड़की !
किसी पुरुष को बेहद चाहती हो ?
तो एक काम ज़रूर करना
उसे अपने सामने फूट-फूट कर रो सकने की सहजता देना

दुनिया वालो
दो लोगों को कभी मत टोकना ।
एक दुनिया के सामने दोहरी होकर हंसती हुई स्त्री को
दूसरा बिलख-बिलख कर रोते हुए आदमी को

ये उस सहजता के दुर्लभ दृश्य हैं
जिसका दम घोंट दिया गया है

ओ मेरे पुरुष मित्र !
याद है जब जन्म के बाद नहीं रोये थे
तब नर्स ने जबरन रुलाया था
यह कहते हुए कि-
“रोना बहुत ज़रूरी है इसके जीने के लिए ।”

“बड़े होकर ये बात भूल कैसे गए दोस्त ?

रो लो पुरुषो , जी भर के रो लो
ताकि तुम जान सको कि

छाती पर से पत्थर का हटना क्या होता है

ओ मेरे प्रेम
आखिर में अगर कुछ याद रह जाएगा तो
वह तुम्हारी बाहों में मचलती पेशियों की मछलियाँ नहीं होंगी

वो तुम्हारी आँख में छलछलाया एक कतरा समन्दर होगा

ओ पुरुष!
स्त्री जब बिखरे तो उसे फूलों-सा सहेज लेना

ओ स्त्री!
पुरूष को टूटकर बिखरने के लिए थोड़ी-सी ज़मीन देना।
पल्लवी त्रिवेदी की कविताओं के भावुकता से परिपूर्ण ज्वार भाटे के बीच आपको छोड़कर मैं विदा लेती हूं. इस प्रार्थना के साथ कि हम सब की आंखों में खुशी के आंसूं हो और संतोष की चमक हो. जल्द ही मिलूंगी आपसे एक और रचनाकार के साथ, अगले पॉडकास्ट में. तब तक के लिए नमस्कार.

LIVE Now

    फोटो

    राशिभविष्य

    मेष

    वृषभ

    मिथुन

    कर्क

    सिंह

    कन्या

    तुला

    वृश्चिक

    धनु

    मकर

    कुंभ

    मीन

    चिंता के विचार आपकी ख़ुशी को बर्बाद कर सकते हैं। ऐसा न होने दें, क्योंकि इनमें अच्छी चीज़ों को ख़त्म करने की और समझदारी में निराशा का ज़हरीला बीज बोने की क्षमता होती है। ख़ुद को हमेशा अच्छा परिणाम पाने के लिए प्रोत्साहित करें और ख़राब हालात में भी कुछ-न-कुछ अच्छा देखने का गुण विकसित करें। ख़ास लोग ऐसी किसी भी योजना में रुपये लगाने के लिए तैयार होंगे, जिसमें संभावना नज़र आए और विशेष हो। भूमि से जुड़ा विवाद लड़ाई में बदल सकता है। मामले को सुलझाने के लिए अपने माता-पिता की मदद लें। उनकी सलाह से काम करें, तो आप निश्चित तौर पर मुश्किल का हल ढूंढने में क़ामयाब रहेंगे। किसी से अचानक हुई रुमानी मुलाक़ात आपका दिन बना देगी। काम के लिए समर्पित पेशेवर लोग रुपये-पैसे और करिअर के मोर्चे पर फ़ायदे में रहेंगे। सफ़र के लिए दिन ज़्यादा अच्छा नहीं है। जीवनसाथी के ख़राब व्यवहार का नकारात्मक असर आपके ऊपर पड़ सकता है। स्वयंसेवी कार्य या किसी की मदद करना आपकी मानसिक शांति के लिए अच्छे टॉनिक का काम कर सकता है। परेशान? आप पंडित जी से प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
    और भी पढ़ें

    टॉप स्टोरीज