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सुनो दिल से: टीम इंडिया ने हार से सबक लेना बंद कर दिया है!

  • November 30, 2020, 8:22 pm
हार-जीत खेल का हिस्सा है. लेकिन जब आप हार से कुछ ना सीखें तो यह चिंता की वजह हो जाती है. ऑस्ट्रेलिया से लगातार दो एक ही अंदाज में हारकर भारतीय टीम चिंता बढ़ा रही है. लगता है कि टीम इंडिया (Team India) ने हार से सबक लेना बंद कर दिया है. भारत vs ऑस्ट्रेलिया (India vs Australia) सीरीज पर न्यूज18 हिंदी, स्पेशल पॉडकास्ट ‘स्पोर्ट्स बुलेटिन: सुनो दिल से’ लेकर आया है. इसमें कॉमेंटेटर संजय बैनर्जी मैचों के विश्लेषण के साथ-साथ दिलचस्प आंकड़े भी लेकर आ रहे हैं.

भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया से (IND vs AUS) पहला मैच 66 रन और दूसरा मैच 51 रन से हार गई. दूसरे मैच में सबकुछ पहले मैच जैसा ही हुआ. ऑस्ट्रेलिया ने टॉस जीतकर पहले बैटिंग की. उसके बल्लेबाजों ने भारतीय गेंदबाजी को तार-तार कर दिया. पहाड़ सा स्कोर खड़ाकर भारत को चुनौती दी कि इसे पार करके दिखाओ. भारतीय बल्लेबाजों ने उस पर चढ़ने की कोशिश की, लेकिन दोनों बार उनका ऑक्सीजन खत्म हो गया, दम फूल गया और वे हार गए.

ऐसा लगता है कि हार अब आदत सी बन गई है और ‘घर के शेर, बाहर ढेर’ की तुकबंदी फिर सच होने लगी है. 2020 में भारत डाउन अंडर में जो भी खेला, सब हारा. वह साल की शुरुआत में न्यूजीलैंड से 3 वनडे मैच और 2 टेस्ट हारा और अब ऑस्ट्रेलिया से दोनों वनडे मैच गंवा बैठा है. यानी, भारत इस साल डाउन अंडर में लगातार 7 मैच हार चुका है.


कोहली की टीम की बॉडी लैंग्वेज बदली हुई लग रही है. अब जीत की जिद से ज्यादा खेलने की अनिवार्यता महसूस हो रही है. लगता है एमएस धोनी के संन्यास का सबसे बड़ा झटका कोहली को ही लगा है. आखिर उन्हें धोनी के रहते मैदान पर बड़ी मदद जो मिलती थी.

सवाल यह भी है कि क्या रोहित विवाद के बाद टीम इंडिया में सबकुछ ठीक-ठाक है. कहीं रोहित विवाद अनुमान से ज्यादा गहरा तो नहीं है. चयनकर्ताओं की खामोशी, गांगुली का बोलना, रोहित की खामोशी, विराट का प्रेस कॉन्फ्रेंस में रोहित के खिलाफ बोलना और अगले दिन बीसीसीआई का रोहित के साथ खड़े होना... यह सब भारतीय क्रिकेट के लिए आम नहीं है. जब भी ऐसा होता है तो खेल बिखरता है. लेकिन हर कोई चाहेगा कि यह कयासभर ही हो. इस पॉडकास्ट में और भी बहुत कुछ है. तो सुनते रहिए स्पोर्ट्स बुलेटिन: सुनो दिल से…

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    चिंता के विचार आपकी ख़ुशी को बर्बाद कर सकते हैं। ऐसा न होने दें, क्योंकि इनमें अच्छी चीज़ों को ख़त्म करने की और समझदारी में निराशा का ज़हरीला बीज बोने की क्षमता होती है। ख़ुद को हमेशा अच्छा परिणाम पाने के लिए प्रोत्साहित करें और ख़राब हालात में भी कुछ-न-कुछ अच्छा देखने का गुण विकसित करें। ख़ास लोग ऐसी किसी भी योजना में रुपये लगाने के लिए तैयार होंगे, जिसमें संभावना नज़र आए और विशेष हो। भूमि से जुड़ा विवाद लड़ाई में बदल सकता है। मामले को सुलझाने के लिए अपने माता-पिता की मदद लें। उनकी सलाह से काम करें, तो आप निश्चित तौर पर मुश्किल का हल ढूंढने में क़ामयाब रहेंगे। किसी से अचानक हुई रुमानी मुलाक़ात आपका दिन बना देगी। काम के लिए समर्पित पेशेवर लोग रुपये-पैसे और करिअर के मोर्चे पर फ़ायदे में रहेंगे। सफ़र के लिए दिन ज़्यादा अच्छा नहीं है। जीवनसाथी के ख़राब व्यवहार का नकारात्मक असर आपके ऊपर पड़ सकता है। स्वयंसेवी कार्य या किसी की मदद करना आपकी मानसिक शांति के लिए अच्छे टॉनिक का काम कर सकता है। परेशान? आप पंडित जी से प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
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