Podcast, सुनो दिल से: टीम इंडिया एक सेशन में हार गई WTC Final, कब ICC ट्रॉफी जीतेंगे विराट?

  • June 25, 2021, 6:28 pm

वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल (WTC Final) में भारतीय टीम को इतनी निराशाजनक हार मिलेगी, ये शायद ही किसी ने सोचा होगा. फाइनल में टीम इंडिया से कहां गलती हुई और न्यूजीलैंड ने अचानक कैसे ड्रॉ लग रहे मैच को जीत लिया, जानिइ इस Podcast में संजय बैनर्जी से



नमस्कार, सप्ताह भर की खेल सरगर्मियों के इस पोडकास्ट के साथ मैं हूं संजय बैनर्जी, स्वागत आप सभी का...बीते सप्ताह इंग्लैंड में दो भारतीय टीमें मैदान पर थी, सूरमाओं से सजी पुरुषों की टीम ने निश्चित सा लगने वाला ड्रॉ मैच गंवा दिया, जबकि महिलाओं ने तकरीबन हारे हुए ब्रिस्टल टेस्ट मैच को ड्रॉ पर ख़त्म किया. जिस टीम की बेंच स्ट्रेंथ की पूरी दुनिया में कसीदे पढ़े जा रहे थे, उसने सिर्फ एक सेशन में ही विश्व विजेता का संयुक्त खिताब गंवा दिया. साउथैम्पटन में न्यूजीलैंड ने भारत को उस समय आठ विकेट से हरा दिया जब पूरी दुनिया ने मान लिया था कि यह मुकाबला ड्रॉ होने के अलावा कुछ नहीं हो सकता. रिजर्व डे के साथ छह दिनों के मैच में दो दिन पूरी तरह बारिश की भेंट चढ़ने के अलावा काफी समय मैदान गीला या रोशनी कम होने के कारण भी बेकार गया. ऐसे में भारत और न्यूजीलैंड के बीच टेस्ट इतिहास की इस पहली चैंपियनशिप में भारत की शिकस्त हैरत में डालती है.

न्यूजीलैंड ने बड़े साधारण परंतु प्रभावशाली अंदाज में क्रिकेट खेलकर पहली बार किसी बड़ी प्रतियोगिता पर अपना नाम लिखवाया है. सरसरी निगाह डालें तो न्यूजीलैंड के खिलाड़ी एक टीम की तरह खेले जबकि भारतीय खिलाड़ी हम्रेशा की तरह स्टार के रूप में उतरे. हालाकि टॉस हारने के बावजूद पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत की शुरुआत खराब नहीं रही, लेकिन तीसरे दिन के खेल में भारत ने सिर्फ 71 रन जोड़कर अपने सात विकेट गंवा दिए, और यहीं से न्यूज़ीलैंड को चढ़ने का मौक़ा मिल गया. फिर न्यूज़ीलैंड ने 32 रन की लीड ले ली, लो स्कोरिंग मैच में इतनी लीड भी मनोबल बढाने के लिए पर्याप्त थी. सिर्फ पहली पारी में ही नहीं दूसरी पारी में भी भारतीय बल्लेबाजों ने घुटने टेक दिए और आखिरी 8 विकेट सिर्फ 100 के आस पास रन जोड़कर आउट हो गए. हैरत यह की अपनी बल्लेबाजी की मजबूती के लिए सारी दुनिया में पहचानी जाने वाली भारतीय टीम साउथएम्प्त्न में ताश के पत्तो की तरह सिमट गई . ज़्यादातर बल्लेबाज़ एकाग्रता की कमी और संयम न रख पाने के कारण चलते बने.

उधर दूसरी तरफ केन विलियमसन की जितनी तारीफ की जाय वह कम होगी. सही अर्थों में विलियम्सन ने एक ज़िम्मेदार कप्तान की पारी खेली. दोनों पारियों में न्यूजीलैंड की बल्लेबाजी को भरोसा दिया, पहली पारी में 1 रन से अर्धशतक चूके लेकिन दूसरी पारी में रॉस टेलर के साथ तीसरे विकेट की 96 रन की साझेदारी में अर्धशतक भी ठोका . टेस्ट क्रिकेट कैसे खेला जाना चाहिए, यह विलियमसन ने बखूबी दिखाया, और न्यूज़ीलैंड की कुल बल्लेबाजी का 65% समय पिच पर बिताया . दोनों पारियों में विलियमसन एक छोर संभाले रहे.

यही नहीं फील्ड प्लेसमेंट ऐसी कि जहां भी गेंद जाए, न्यूज़ीलैंड का फील्डर नज़र आये . कायल जेमिसन, टिम सऊदी, ट्रेंट बोल्ट और वैगनर ने बेहद अनुशासित गेंदबाजी की और 99 प्रतिशत गेंदे ऑफ और मिडल स्टम्प पर रखी . वहीं दूसरी ओर भारत ने भी फाइन लेग में कोई फील्डर नहीं रखा, लेकिन गेंदबाज़ अनुशासित नहीं रह पाए, लेग स्टंप्स से बाहर निकलती गेंदों पर फाइन लेग में चौके भी गए और लेग बाई भी . एक महत्वपूर्ण टेस्ट से पहले बिना मैच प्रक्टिस के उतरना, तीनो तेज़ गेंदबाजों का हाल फिलहाल चोटो से उभरते हुए वापसी करना और टेस्ट मैच को टेस्ट की तरह न खेलना भारतीय टीम को भारी पड गया, अन्यथा भारत आसानी से कम से कम इस खिताब का संयुक्त हकदार हो सकता था .

न्यूजीलैंड के हाथो से 2015और 2019 में विश्व कप का खिताब फिसल गया था. अगर विलियमसन के मुकुट में यह ताज सजा है तो विराट कोहली को इंतजार करना पड़ेगा. इंग्लैंड में कम से कम दो खिताब कोहली की टीम ने नजदीक से चुके हैं. इससे पहले 2017 की चैंपियंस ट्रॉफी और फिर 2019 के वर्ल्ड कप में भी उन्हें निराशा ही हाथ लगी थी. पिछले सात-आठ सालों में आईसीसी टूर्नामेंट में एक दिलचस्प तस्वीर देखने को मिली है. इन टूर्नामेंट्स में हर बार कोई न कोई नया चैंपियन बनकर उभर आता है. 2013 में चैंपियंस ट्रॉफी भारत ने जीती तो, 2014 का टी-20 वर्ल्ड कप श्रीलंका ने जीता. 2015 का वनडे वर्ल्ड कप आस्ट्रेलिया के नाम रहा तो 2016 का टी-20 वर्ल्ड कप वेस्टइंडीज ले उड़ा. 2017 में चैंपियंस ट्रॉफी पाकिस्तान के हिस्से आया तो 2019 का वनडे वर्ल्ड कप इग्लैंड ने जीत लिया. और अब टेस्ट खिताब न्यूजीलैंड के नाम है.

महिलाओं ने दिखाया दम
जिस दौरान फाइनल में भारत की टीम खेल रही थी लगभग उसी समय भारत की महिला टीम भी इंग्लैंड से एकमात्र टेस्ट में मुकाबला कर रही थी. सात साल बाद और लगातार तीन टेस्ट जीतने के बाद ब्रिस्टल में भारतीय महिलाएं एक समय पारी की हार के करीब थीं. चौथे और आखिरी दिन जब तय लग रहा था कि भारतीय महिला टीम पारी से हार जाएगी तब फालोआन के बाद नौवें विकेट की साझेदारी में स्नेह राणा और तानिया भाटिया ने 104 रन की साझेदारी कर इंग्लैंड को जीत से वंचित कर दिया. यह ठीक उसी तरह का प्रदर्शन था जब पिछले साल मेलबर्न में अजिंक्य रहाणे और चेतेश्वर पुजारा ने आस्ट्रेलिया को जीत से वंचित कर दिया था. दो महीने पहले पिता को खोने और पांच साल बाद भारतीय टीम में लौटनी वाली स्नेह राणा ने नाबाद 80 रन की पारी खेली और इससे पहले चार विकेट भी लिये थे.

सात साल बाद खेले गये महिला टेस्ट में जिन पांच भारतीयों ने डेब्यू किया उनमे शेफाली वर्मा भी शामिल थीं. शेफाली ने 96 और 63 रन की पारी खेली, जो बताता है कि 17 साल की इस खिलाड़ी में आगे बढ़ने की जबर्दस्त क्षमता है. अब भारतीय टीम इंग्लैंड के साथ वनडे मैचों की सीरीज खेलेगी.

यूरो का रोमांच चरम पर
क्रिकेट के रोमांच के बीच इस समय यूरो कप फुटबॉल का रोमांच भी चरम पर है. लीग चरण के मैच खेले जा चुके हैं और अब कल से नॉकआउट के दौर शुरू होंगे. छह ग्रुपों में कुल 36 मैचों के दौरान कुल 94 गोल हो चुके हैं. पर गोल करने के मामले में पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो लगातार सुर्खियों में हैं. दो दिन पहले उन्होंने फ्रांस के खिलाफ दो गोल किये थे. अब तक लीग में उन्होंने पांच गोल दागे हैं जिससे वह गोल्डन बूट की होड़ में सबसे आगे हैं. अब तक रोनाल्डो दुनिया में सबसे ज्यादा 109 गोल करने वाले ईरान के अली दानी के रिकॉर्ड की बराबरी पर आ गये हैं. मतलब यह कि अगला मैच जब परसो बेल्जियम से खेलते समय वह गोल कर देते हैं तो आल टाइम रिकॉर्ड उनके नाम हो जाएगा. वैसे उनकी पुर्तगाल टीम बड़ी मुश्किल से अंतिम सोलह में पहुंची है. ग्रुप लीग में पुर्तगाल ने सिर्फ एक मैच जीता और एक ड्रॉ खेला है.

अब तक के प्रदर्शनों के हिसाब से इटली, नीदरलैंड्स और बेल्जियम सभी मुकाबलों में जीत दर्ज करने वाली टीमें हैं. इसके बाद ऑस्ट्रिया, स्वीडन और इंग्लैंड ने दो-दो जीत हासिल की हैं. अब नॉकआउट मैचों में जिन खिलाड़ियों पर नजर होगी उनमें प्रमुख होंगे चेक रिपब्लिक के पैट्रिक शिक, स्वीडन के एमिल फोर्सबर्ग, और बेल्जियम के लुकाकु. तो बस इस सप्ताह लुत्फ़ लीजिये यूरो कप के नॉक आउट मुकाबलों का और चलते रहिये न्यूज़ 18 के साथ . इस पॉडकास्ट में इतना ही, अपना ख्याल रखिये और आज्ञा दीजिये संजय बैनर्जी को, नमस्कार

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