Podcast: क्‍या कोच-कप्‍तान में बदलाव से बदली भारतीय टीम की चाल? दक्षिण अफ्रीका में हार के बाद उठे सवाल

  • January 28, 2022, 7:04 pm

साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में जिस तरह से भारत का सूपडा साफ हुआ है, उसके बाद स्पिनर्स की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. रविचंद्रन अश्विन, युजवेंद्र चहल और जयंत यादव कुल मिलाकर 59 ओवर गेंदबाजी करने के बाद भी सिर्फ तीन विकेट ही हासिल कर पाए थे. कोच राहुल द्रविड़ ने भी माना कि मध्य के ओवरों में टीम पीछे रह गई. लेकिन अब चूंकि वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज घरेलू मैदान पर होगी, वहीं स्पिनर्स साउथ अफ्रीका में हुए नुकसान की भरपाई कर लेंगे.



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भारतीय क्रिकेट मे मची खलबली थमने का नाम नही ले रही. ‘रेनबो नेशन’ में टीम इंडिया ऐतिहासिक जीत का रंग बिखेरेगी, इस उम्मीद के साथ शुरू हुआ साउथ अफ्रीका का दौरा आखिर बदरंग साबित हुआ. पहले टेस्ट सीरीज गंवाई और फिर वनडे सीरीज मे तथाकथित दोयम दर्जे के मेजबान ने, दुनिया की सबसे मजबूत टीम कही जाने वाली भारत को पटखनी दे दी. महज छह महीनों मे कितना कुछ हो गया, कोच और कप्तान क्या बदला, इंडियन टीम की चाल ही बदल गई.

भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह एक सदमे की तरह है और समझ से परे भी कि एक मज़बूत बेंच स्‍ट्रेंथ वाली टीम सिर्फ कोच और कप्तान के बदलने से कैसे एक झटके में खराब हो सकती है. बड़ी बात यह कि भारतीय टीम को बेचारगी की हद तक दक्षिण अफ्रीका की वह टीम ले आई जो, एनरिक नोखिया, कैगिसो रबाडा और कुछ हद तक तबरेज़ शम्शी के बिना खेल रही थी.

अफसोस यह की टेस्ट सीरीज में पराजय से भारत ने सबक नहीं लिया, और दूसरे वन डे में मेजबान ने सिर्फ 3 विकेट पर 288 रन का टारगेट चेस कर लिया. भारतीय गेंदबाज लाचार और बेबस नजर आए. भुवनेश्वर कुमार अपना पैनापन खो चुके हैं, बिना विकेट सिर्फ 8 ओवर में उन्होंने 67 रन दे डाले. रविचंद्रन अश्विन की धाक भी न चली और दक्षिण अफ्रीकी बल्लेबाजों ने उनके खिलाफ भी जम कर हल्ला बोला. अगर गेंदबाज विकेट नहीं निकाल पाएंगे, तो जाहिर है कि विकेट पर टिकने वाला बल्लेबाज आक्रामक होगा ही.

इतना ही नहीं, तीसरे वनडे मे अकेले क्विंटन डी कॉक पूरी टीम पर भारी पड़े. भारत का कोई भी स्लॉट परमानेंट सफल नहीं रहा. कभी ओपनिंग, तो कभी मिडिल आर्डर और आम तौर पर चलने वाले पुछल्ले बल्लेबाजों ने भी निराश ही किया. भारतीय मान्यता प्राप्त बल्लेबाज बीच-बीच में तो बड़ी पारी खेलते रहे, लेकिन निरन्तरता नहीं दिखा सके. सीरीज के टॉप दो बल्लेबाज क्विंटन डी कॉक और वेन डर ड्यूसे रहे. प्रसिद्ध कृष्‍णा एक बार चमके तो बुमराह का प्रदर्शन औसत ही रहा.

अश्विन को सीरीज में एक विकेट मिला तो भुवनेश्वर न सिर्फ खर्चीले साबित हुए, बल्कि विकटों का खाता भी न खोल सके. अंतिम वनडे में दीपक चहर का जज्बा काबिले तारीफ था. दीपक ने न सिर्फ दो विकेट निकाले, बल्कि अर्धशतक भी ठोक कर अपनी उपयोगिता बखूबी साबित कर दी. ऋतुराज गायकवाड़ को किसी मैच में भी मौंका नहीं मिला, तो जयंत यादव को पांच साल बाद मौका मिला, जिसे वह फिर भुनाने से चूक गए.

भारत के लिए हाल फिलहाल एक और समस्या दिखाई दे रही है, वह है विपक्षी सलामी बल्लेबाजों का टिकना, 2020 से यह सिलसिला कई बार हुआ है. शुरुआती विकेट निकालने की नाकामी से बचना होगा और शुरुआत पूरी आक्रामकता के साथ करनी होगी. साउथ अफ्रीका के खिलाफ वनडे सीरीज में जिस तरह से भारत का सूपडा साफ हुआ है, उसके बाद स्पिनर्स की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं.

रविचंद्रन अश्विन, युजवेंद्र चहल और जयंत यादव कुल मिलाकर 59 ओवर गेंदबाजी करने के बाद भी सिर्फ तीन विकेट ही हासिल कर पाए थे. कोच राहुल द्रविड़ ने भी माना कि मध्य के ओवरों में टीम पीछे रह गई. लेकिन अब चूंकि वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज घरेलू मैदान पर होगी, वहीं स्पिनर्स साउथ अफ्रीका में हुए नुकसान की भरपाई कर लेंगे.

वेस्टइंडीज के साथ छह फरवरी से शुरू हो रही सीरीज के लिए दोनों ही टीमें घोषित कर दी गई हैं. यह सीरीज 3 वनडे मैचों और इतने ही टी-20 मुकाबलों के लिए होगी. रोहित शर्मा फिट  हैं और टीम की कप्तानी के लिए तैयार भी.  बाएं हाथ के कलाई के स्पिनर कुलदीप यादव की लंबे समय के बाद टीम में वापसी हुई है. हालांकि यादव ने पिछले छह महीने से किसी कॉम्पिटिटिव क्रिकेट मे शिरकत नहीं की है. फिर भी उम्मीद यह की मध्य के ओवर मे विकेट का टोटा वह दूर कर सकेंगे.

बड़ौदा के आक्रामक बल्लेबाज दीपक हूडा को भी वनडे टीम में जगह मिली है. इसके साथ ही, अंडर-19 क्रिकेट से अपनी पहचान बनाने वाले लेग स्पिनर रवि बिश्नोई को भी टी-20 सीरीज के लिए पहली बार भारतीय टीम में चुना गया है.

बुमराह और शमी को रेस्ट मिला है. अश्विन ट्रीटमेंट के कारण सीरीज से बाहर हैं. वेंकटेश अय्यर को सिर्फ टी-20 में मौका दिया गया है. जयंत यादव को परीक्षा के लिए एक अवसर साउथ अफ्रीका मे मिला, लेकिन तकरीबन 5 साल बाद मिले इस मौके को नहीं भुना पाए और अब फिर टीम से बाहर हो गए. ऋतुराज गायकवाड़ तो बिना मौके ही बाहर हो गए.

इधर, वेस्टइंडीज़ ने भी टीम घोषित कर दी है. केमार रोच, रूमाह बोनर और ब्रेंडन किंग को बुलाया गया है. कीरोन पोलार्ड कप्तान हैं. टीम में निकोलस पूरण, डैरेन ब्रावो औऱ जैसन होल्डर शामिल हैं. रोजर हॉर्पर की जगह डेस्मन हेन्स अब वेस्टइंडीज के चीफ सिलेक्टर हैं. इस समय वेस्टइंडीज अपनी मेजबानी मे इंग्लैंड के खिलाफ हो रही 5 टी-20 मैचों की सीरीज मे 2-1 से लीड कर रही है.

उधर, इंडियन प्रीमियर लीग के मेगा ऑक्शन में अब ज्यादा दिन नहीं बचे हैं. 12 और 13 फरवरी को होने वाले इस ऑक्शन में 1200 से ज्यादा खिलाड़ियों ने रजिस्ट्रेशन कराया है. पिछले साल ऑलराउंडर क्रिस मॉरिस इतिहास रचते हुए राजस्थान रॉयल्स के लिए 16.25 करोड़ में बिके थे, लेकिन इस बार यह आंकड़ा और ऊपर जा सकता है. आईपीएल मे इस बार से दो नई टीमें शामिल हुई हैं, लखनऊ का नाम लखनऊ सुपरजाएंट्स रखा गया है.

इस टीम ने लोकेश राहुल को पहले ही अपना कप्तान चुन लिया है, उन्हें 17 करोड़ की राशि दी गई है. साथ में, 10 करोड़ में मार्कस स्टोइनिस औऱ 4 करोड़ में रवि बिशनोई को सीधे शामिल किया है. इसी तरह, अहमदाबाद ने भी हार्दिक पांड्या को 15 करोड़ में खरीदा है और अपना कप्तान बनाया है. टीम मे राशिद खान 17 करोड़ और शुभमन गिल को 8 करोड़ की राशि दी गई है.

इस बार जिन खिलाड़ियों पर खास तौर पर नजर रहेगी उनमें डेविड वॉर्नर शामिल हैं, जिन्हें हैदराबाद ने पिछले सीजन ही रिलीज कर दिया था.

ऑस्ट्रेलिया के ही मिचेल मार्श सीमित ओवरों के फॉर्मेट में बल्ले और गेंद दोनों से धमाल मचाते है, उन्हें भी बेहतर कीमत मिलने के आसार हैं. पैट कमिंस भी केकेआर से रिलीज हो चुके हैं, उन पर भी फ्रेंचाइस की नजर होगी. इसके अलावा, ट्रेंट बोल्ट और भारत के खिलाफ हालिया सीरीज में शतक लगाने वाले दक्षिण अफ्रीकी खिलाड़ी क्विंटन डी कॉक भी मोटी कीमत पर जा सकते हैं.

इस बीच, बीसीसीआई ने घरेलू क्रिकेट की सबसे अहम प्रतियोगिता रणजी ट्रॉफी को दो चरणों मे आयोजित करने का मन बनाया है. इस ट्रॉफी के मुकाबले पहले 13 जनवरी से शुरू होने थे, लेकिन उस दौरान कोरोना के मामले पीक पर होने की वजह से बोर्ड को इसे स्थगित करने पर मजबूर होना पड़ा था. रणजी ट्रॉफी के अलावा बाकी डॉमेस्टिक क्रिकेट के टूर्नामेंट्स पर भी बैठक मे चर्चा हुई है.

बीसीसीआई की नजर 27 मार्च से आईपीएल शुरू करने की है, ऐसे में एक चरण में रणजी ट्राफी का आयोजन संभव नहीं लगता. संभव है कि पहला चरण अगले महीने पूरा कर लिया जाए, जबकि दूसरा चरण आईपीएल के बाद कराया जाए. जो भी हो, डोमेस्टिक क्रिकेट के रिवाइवल की खबर सुकून से भरी है, इसमे कोई शक नहीं.

चलते-चलते एक और शानदार खबर, भारत की समृति मंधाना को 2021 का आईसीसी वीमेन क्रिकेटर ऑफ द ईयर चुना गया है. उन्होंने दूसरी बार यह अवॉर्ड अपने नाम किया है. इससे पहले वह 2018 में भी सर्वश्रेष्ठ महिला क्रिकेटर और सर्वश्रेष्ठ महिला वनडे क्रिकेटर भी रह चुकी हैं. मंधाना दो बार यह अवॉर्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं. इससे पहले झूलन गोस्वामी ने एक बार यह अवॉर्ड 2007 मे जीता था.

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इसके साथ ही, हफ्ते भर की क्रिकेट गतिविधियों पर आधारित हमारे साप्ताहिक पॉडकास्ट का आज का सफर यही तक. अगले हफ्ते फिर मिलेंगे, संजय बैनर्जी को अनुमति दीजिए, नमस्कार

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