क्या समलैंगिकता को अपराध घोषित करने वाली धारा 377 को हटा देना चाहिए ?

July 12, 2018, 3:37 pm

समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी में लाने वाली संविधान की धारा- 377 की वैधता पर आज तीसरे दिन सुप्रीम कोर्ट में बहस जारी है. बुधवार को केंद्र सरकार ने धारा-377 को लेकर सुप्रीम कोर्ट पर फैसला छोड़ दिया है. केंद्र ने शीर्ष अदालत से कहा कि समलैंगिंक सेक्स अपराध है या नहीं, इसका फैसला वह अपने विवेक से करे. क्या है धारा 377 ? भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में समलैंगिकता को अपराध बताया गया है. आईपीसी की धारा 377 के मुताबिक जो कोई भी किसी पुरुष, महिला या पशु के साथ प्रकृति की व्यवस्था के खिलाफ सेक्स करता है तो इस अपराध के लिए उसे 10 वर्ष की सजा या आजीवन कारावास से दंडित किया जाएगा. उस पर जुर्माना भी लगाया जाएगा. यह अपराध संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आता है और यह गैर जमानती है. क्या है LGBTQ समुदाय? LGBTQ समुदाय के तहत लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंटर और क्वीयर आते हैं. एक अर्से से इस समुदाय की मांग है कि उन्हें उनका हक दिया जाए और धारा 377 को अवैध ठहराया जाए. निजता का अधिकार पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद इस समुदाय ने अपनी मांगों को फिर से तेज कर दिया था.

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