OMG! पैसा भी दो, जेल भी जाओ

OMG10:38 AM IST Aug 12, 2017

जेल, एक ऐसा शब्द है, जिसके कानों में पड़ते ही अच्छे-अच्छे कान पकड़ लेते हैं. जब कानून की नजर में व्यक्ति समाज के लिए खतरा बना जाता है, तो उसे जेल में डाल दिया जाता है. अगर आप जेल में रहने का अनुभव लेना चाहते हैं, तो उसके लिए तेलंगाना सरकार ने एक नई पहल की है. तेलंगाना पुलिस ने आम लोगों के लिए मेडक जिले की 220 साल पुरानी संगरेड्डी जेल को म्यूजियम में तब्दील किया है. इस जेल का निर्माण साल 1796 में हैदराबाद के निजाम के द्वारा कराया गया था. यह जेल किसी जमाने में निजाम की घुड़साल हुआ करती थी, यहां के 10 बैरकों में निजाम के घोड़े आराम फरमाते थे. उसके बाद निजाम के आदेश पर वहां कैदियों को रखा जाने लगा. जेल में रहने के लिए व्यक्ति को 500 रुपये रोज के हिसाब से किराया देना होता है. जबकि इस जेल म्यूज़ियम को देखने के लिए 10 रुपये का टिकट खरीदना होता है. तेलंगाना पुलिस ने इसे ‘फील द जेल’ का नाम दिया है. जेल प्रशासन की ओर से कैदियों की वर्दी, स्‍टील प्‍लेट, ग्‍लास, स्‍टील मग, टॉयलेट सोप और कपड़े धोने के लिए साबुन आदि दिया जाता है. इस जेल में आने वाले पर्यटकों को शाम 5:00 बजे बंद कर दिया जाता है और वो भी अगली सुबह 5:00 बजे ही बाहर निकलते हैं. कैद में बंद लोगों को वही खाना मिलेगा, जो सामान्य जेलों में कैदियों को दिया जाता है. यह जेल लगभग 3 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. इस जेल की साफ-सफाई यहां रहने वाले कैदियों को ही करनी होती है. जेल प्रबंधन के अनुसार ऐसा जेल बनाने के पीछे उनकी यह सोच थी कि इससे आम लोग जान पाएंगे कि कैदियों की दिनचर्या क्या होती है. अगर आप भी जेल का अनुभव लेना चाहते हैं तो तेलंगाना जेल विभाग के ई-मेल dgprisonscontrolroom@gmail.com के जरिये अपनी बुकिंग करा सकते हैं.

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जेल, एक ऐसा शब्द है, जिसके कानों में पड़ते ही अच्छे-अच्छे कान पकड़ लेते हैं. जब कानून की नजर में व्यक्ति समाज के लिए खतरा बना जाता है, तो उसे जेल में डाल दिया जाता है. अगर आप जेल में रहने का अनुभव लेना चाहते हैं, तो उसके लिए तेलंगाना सरकार ने एक नई पहल की है. तेलंगाना पुलिस ने आम लोगों के लिए मेडक जिले की 220 साल पुरानी संगरेड्डी जेल को म्यूजियम में तब्दील किया है. इस जेल का निर्माण साल 1796 में हैदराबाद के निजाम के द्वारा कराया गया था. यह जेल किसी जमाने में निजाम की घुड़साल हुआ करती थी, यहां के 10 बैरकों में निजाम के घोड़े आराम फरमाते थे. उसके बाद निजाम के आदेश पर वहां कैदियों को रखा जाने लगा. जेल में रहने के लिए व्यक्ति को 500 रुपये रोज के हिसाब से किराया देना होता है. जबकि इस जेल म्यूज़ियम को देखने के लिए 10 रुपये का टिकट खरीदना होता है. तेलंगाना पुलिस ने इसे ‘फील द जेल’ का नाम दिया है. जेल प्रशासन की ओर से कैदियों की वर्दी, स्‍टील प्‍लेट, ग्‍लास, स्‍टील मग, टॉयलेट सोप और कपड़े धोने के लिए साबुन आदि दिया जाता है. इस जेल में आने वाले पर्यटकों को शाम 5:00 बजे बंद कर दिया जाता है और वो भी अगली सुबह 5:00 बजे ही बाहर निकलते हैं. कैद में बंद लोगों को वही खाना मिलेगा, जो सामान्य जेलों में कैदियों को दिया जाता है. यह जेल लगभग 3 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है. इस जेल की साफ-सफाई यहां रहने वाले कैदियों को ही करनी होती है. जेल प्रबंधन के अनुसार ऐसा जेल बनाने के पीछे उनकी यह सोच थी कि इससे आम लोग जान पाएंगे कि कैदियों की दिनचर्या क्या होती है. अगर आप भी जेल का अनुभव लेना चाहते हैं तो तेलंगाना जेल विभाग के ई-मेल dgprisonscontrolroom@gmail.com के जरिये अपनी बुकिंग करा सकते हैं.

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