VIDEO: विदेशी नहीं मुधोल कुत्ते तलाशेंगे गोला-बारूद

OMG07:17 AM IST Nov 06, 2017

इंडियन आर्मी अब तक चेकिंग से लेकर सर्च ऑपरेशंस के लिए विदेशी नस्ल के कुत्तों का प्रयोग किया करती थी, लेकिन आने वाले एक-दो महीनों में सेना इस काम के लिए देसी नस्ल के कुत्तों की सेवाएं ले सकती है. बताया जा रहा है कि भारतीय प्रजाति के मुधोल कुत्तों की चुस्ती-फुर्ती और वफादारी से प्रभावित होकर सेना अपने चेकिंग और सर्च अभियान में शामिल विदेशी नस्ल के जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर और ग्रेट स्विस माउंटेन जैसे कुत्तों की बजाए इन्हें रख सकती है. यूपी के मेरठ में सेना की रीमाउंट ऐंड वेटरनेरी कोर सेंटर में कुल 6 मुधोल कुत्तों को इसके लिए स्पेशल ट्रेनिंग दी जा रही है. बताया जा रहा है कि इन कुत्तों ट्रेनिंग कुछ ही दिनों में पूरी भी हो जाएगी. ट्रेनिंग पूरी के बाद इस सभी 6 मुधोल कुत्तों को जम्मू-कश्मीर भेजने की तैयारी है. जहां ये सेना के लिए गोला-बारूद की तलाशी का काम करेंगे, जो अब तक विदेशी कुत्ते करते आ रहे हैं. इसके अलावा ये सेना को सर्च ऑपरेशन में भी मदद करेंगे. इस मामले में सेना के अधिकारियों ने बताया कि इन मुधोल कुत्तों को शेरू बनाने में लंबा वक्त लगा. जानकारी के मुताबिक साल 2016 में कर्नाटक से 6 मुधोल कुत्तों को मेरठ के आरवीसी सेंटर में भेजे गए. आरवीसी सेंटर भेजने से पहले सेना के द्वारा मुधोल पर काफी रिसर्च की गई थी. शुरुआत में मुधोल डॉग्स को अस्पताल में एकांत में रखा गया. बीमारियों की जांच के बाद मुधोल को आदेश पालन की ट्रेनिंग दी गई. उसके बाद ट्रेनर और मुधोल डॉग्स के बीच आपसी समझ विकसित की गई. ट्रेनर के साथ बेहतर तालमेल होने के बाद शुरू हुई मुधोल कुत्तों की स्पेशल ट्रेनिंग. मुधोल कुत्ते इसलिए खास हैं क्योंकि रफ्तार के मामले में इनका कोई जवाब नही है. इनके सूंघने की क्षमता इन्हें खास बनाती है. इसके अलावा इनमें पहरा देने की अद्भुत क्षमता होती है.

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इंडियन आर्मी अब तक चेकिंग से लेकर सर्च ऑपरेशंस के लिए विदेशी नस्ल के कुत्तों का प्रयोग किया करती थी, लेकिन आने वाले एक-दो महीनों में सेना इस काम के लिए देसी नस्ल के कुत्तों की सेवाएं ले सकती है. बताया जा रहा है कि भारतीय प्रजाति के मुधोल कुत्तों की चुस्ती-फुर्ती और वफादारी से प्रभावित होकर सेना अपने चेकिंग और सर्च अभियान में शामिल विदेशी नस्ल के जर्मन शेफर्ड, लैब्राडोर और ग्रेट स्विस माउंटेन जैसे कुत्तों की बजाए इन्हें रख सकती है. यूपी के मेरठ में सेना की रीमाउंट ऐंड वेटरनेरी कोर सेंटर में कुल 6 मुधोल कुत्तों को इसके लिए स्पेशल ट्रेनिंग दी जा रही है. बताया जा रहा है कि इन कुत्तों ट्रेनिंग कुछ ही दिनों में पूरी भी हो जाएगी. ट्रेनिंग पूरी के बाद इस सभी 6 मुधोल कुत्तों को जम्मू-कश्मीर भेजने की तैयारी है. जहां ये सेना के लिए गोला-बारूद की तलाशी का काम करेंगे, जो अब तक विदेशी कुत्ते करते आ रहे हैं. इसके अलावा ये सेना को सर्च ऑपरेशन में भी मदद करेंगे. इस मामले में सेना के अधिकारियों ने बताया कि इन मुधोल कुत्तों को शेरू बनाने में लंबा वक्त लगा. जानकारी के मुताबिक साल 2016 में कर्नाटक से 6 मुधोल कुत्तों को मेरठ के आरवीसी सेंटर में भेजे गए. आरवीसी सेंटर भेजने से पहले सेना के द्वारा मुधोल पर काफी रिसर्च की गई थी. शुरुआत में मुधोल डॉग्स को अस्पताल में एकांत में रखा गया. बीमारियों की जांच के बाद मुधोल को आदेश पालन की ट्रेनिंग दी गई. उसके बाद ट्रेनर और मुधोल डॉग्स के बीच आपसी समझ विकसित की गई. ट्रेनर के साथ बेहतर तालमेल होने के बाद शुरू हुई मुधोल कुत्तों की स्पेशल ट्रेनिंग. मुधोल कुत्ते इसलिए खास हैं क्योंकि रफ्तार के मामले में इनका कोई जवाब नही है. इनके सूंघने की क्षमता इन्हें खास बनाती है. इसके अलावा इनमें पहरा देने की अद्भुत क्षमता होती है.

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