VIDEO: डमरू से शिक्षा की अलख जगाते एक मास्टर साहब

OMG04:24 PM IST Oct 12, 2017

मध्य प्रदेश के श्योपुर में एक शिक्षक आदिवासी बच्चों को अनोखे ढंग से शिक्षा दे रहे हैं. हाथ में डमरू थामें मदारी की तरह खेल-खेल में शिक्षा देने वाले इस मास्टर को पढ़ाता देख सभी आश्चर्यचकित रह जाते हैं. राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित मास्टर नंदलाल कोटिया दिव्यांग होते हुए भी इन नौनिहालों के लिए आशा की किरण हैं. मिशन एजुकेशन में जुटे नंदलाल कोटिया एक ऐसे मास्टर हैं, जो आदिवासी बच्चों के जीवन में शिक्षा की अलख जगाने के लिए खुद मदारी गए. गरीबी और पिछड़ेपन के शोर में दबे इन बच्चों का बचपन मुस्कुराता है स्कूल के घंटियों की आवाज सुनकर. श्योरपुर के कराहल अंचल के रहने वाले नंदलाल कोटिया ने रिटायरमेंट के बाद हाथ में थामा डमरू और निकल पड़े नौनिहालों में शिक्षा का अलख जगाने. कोटिया हर रोज मदारी बनकर गांव, टोलों में निकल पड़ते हैं. डमरू बजाकर बच्चों को इकट्ठा करते हैं और उन्हे पढ़ाते हैं. इतना ही नहीं वो अपने पेंशन के आधे पैसे बच्चों के लिए कॉपी और किताबों पर खर्च कर देते हैं. दिव्यांग नंदलाल कोटिया अपने स्तर पर नई पीढ़ी को उनके पैरों पर खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. नंदलाल जी के इस साहस को सभी सलाम करते हैं.

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मध्य प्रदेश के श्योपुर में एक शिक्षक आदिवासी बच्चों को अनोखे ढंग से शिक्षा दे रहे हैं. हाथ में डमरू थामें मदारी की तरह खेल-खेल में शिक्षा देने वाले इस मास्टर को पढ़ाता देख सभी आश्चर्यचकित रह जाते हैं. राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित मास्टर नंदलाल कोटिया दिव्यांग होते हुए भी इन नौनिहालों के लिए आशा की किरण हैं. मिशन एजुकेशन में जुटे नंदलाल कोटिया एक ऐसे मास्टर हैं, जो आदिवासी बच्चों के जीवन में शिक्षा की अलख जगाने के लिए खुद मदारी गए. गरीबी और पिछड़ेपन के शोर में दबे इन बच्चों का बचपन मुस्कुराता है स्कूल के घंटियों की आवाज सुनकर. श्योरपुर के कराहल अंचल के रहने वाले नंदलाल कोटिया ने रिटायरमेंट के बाद हाथ में थामा डमरू और निकल पड़े नौनिहालों में शिक्षा का अलख जगाने. कोटिया हर रोज मदारी बनकर गांव, टोलों में निकल पड़ते हैं. डमरू बजाकर बच्चों को इकट्ठा करते हैं और उन्हे पढ़ाते हैं. इतना ही नहीं वो अपने पेंशन के आधे पैसे बच्चों के लिए कॉपी और किताबों पर खर्च कर देते हैं. दिव्यांग नंदलाल कोटिया अपने स्तर पर नई पीढ़ी को उनके पैरों पर खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं. नंदलाल जी के इस साहस को सभी सलाम करते हैं.

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