नहीं रहा 'तेजा', भगवान की पूजा के बाद ही शुरू करता था ड्यूटी

OMG12:18 PM IST Aug 30, 2018

महाराष्ट्र के विश्व विख्यात पंढरपुर के विट्ठल रुकमाई मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिस का श्वान तेजा अब इस दुनिया में नहीं रहा. लेब्राडोर प्रजाति का तेजा पिछले नौ सालों से मंदिर की सुरक्षा में तैनात था. तेजा हर रोज मंदिर की सुरक्षा में सेवा देने के लिए नियत समय पर पहुंचता था. लेकिन उससे पहले वह बगैर चूके विट्ठल रुकमाई की मूर्ति के आगे नतमस्तक होता था. भगवान के दर्शन करने के बाद ही तेजा मंदिर की तलाशी का काम शुरू करता था. पिछले नौ साल से चला आ रहा ये सिलसिला अब थम गया है. तेजा की मौत उम्रदराज होने की वजह से हुई. पुलिस विभाग ने तेजा के देहांत के बाद मंगलवार को पूरे शासकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार कर दिया. इस दुखद मौके पर तेजा के ट्रेनर ने बताया कि लेब्राडोर प्रजाति का श्वान तेजा बेहद तेज-तर्रार और ड्यूटी के प्रति चुस्त रहता था. उन्होंने तेजा को बेहतर ट्रैनिंग दी थी, लेकिन उन्होंने कभी तेजा को भगवान के सामने जाकर वंदना करने की ट्रेनिंग नहीं दी. इसके बावजूद वह हर रोज अपनी ड्यूटी की शुरुआत भगवान के दर पर वंदन करने के बाद ही करता था. तेजा को उत्कृष्ट सेवा के लिए साल 2016 में गोल्ड मेडल, तो साल 2017 में सिल्वर मेडल से नवाजा गया था.

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महाराष्ट्र के विश्व विख्यात पंढरपुर के विट्ठल रुकमाई मंदिर की सुरक्षा में तैनात पुलिस का श्वान तेजा अब इस दुनिया में नहीं रहा. लेब्राडोर प्रजाति का तेजा पिछले नौ सालों से मंदिर की सुरक्षा में तैनात था. तेजा हर रोज मंदिर की सुरक्षा में सेवा देने के लिए नियत समय पर पहुंचता था. लेकिन उससे पहले वह बगैर चूके विट्ठल रुकमाई की मूर्ति के आगे नतमस्तक होता था. भगवान के दर्शन करने के बाद ही तेजा मंदिर की तलाशी का काम शुरू करता था. पिछले नौ साल से चला आ रहा ये सिलसिला अब थम गया है. तेजा की मौत उम्रदराज होने की वजह से हुई. पुलिस विभाग ने तेजा के देहांत के बाद मंगलवार को पूरे शासकीय सम्मान के साथ उसका अंतिम संस्कार कर दिया. इस दुखद मौके पर तेजा के ट्रेनर ने बताया कि लेब्राडोर प्रजाति का श्वान तेजा बेहद तेज-तर्रार और ड्यूटी के प्रति चुस्त रहता था. उन्होंने तेजा को बेहतर ट्रैनिंग दी थी, लेकिन उन्होंने कभी तेजा को भगवान के सामने जाकर वंदना करने की ट्रेनिंग नहीं दी. इसके बावजूद वह हर रोज अपनी ड्यूटी की शुरुआत भगवान के दर पर वंदन करने के बाद ही करता था. तेजा को उत्कृष्ट सेवा के लिए साल 2016 में गोल्ड मेडल, तो साल 2017 में सिल्वर मेडल से नवाजा गया था.

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