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VIDEO: बिहार में बाढ़ और तबाही का मंजर

किशनगंज News18Hindi| August 21, 2017, 4:41 PM IST

बिहार इस समय बाढ़ की भयंकर मार झेल रहा है. वैसे तो बिहार में बाढ़ हर साल आती है. यही वजह है कि बिहार से बहने वाली कोसी नदी को बिहार का शोक भी कहा जाता है. कोसी की बाढ़ में हर साल कई लोग मौत की आगोश में सो जाते हैं. यह बड़ा ही भयानक होता है कि जब प्रकृति आपसे नाराज हो और उससे बचने का आपके पास कोई उपाय न हो. बिहार में इस साल अब तक लगभग 253 लोगों की मौत हो चुकी है. आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ प्रभावित 18 जिलों में लगभग 1 करोड़ 26 लाख लोग इस भंयकर प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हैं. बाढ़ की चोट जिन जिलों में सबसे ज्यादा हुई है, उनमें किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरनगर, सीतामढ़ी, शिवहर, समस्तीपुर, गोपालगंज, सारण, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया शामिल हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक लगभग 7 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बचाया गया है. बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए एनडीआरएफ की 28 टीम के 1152 जवान अपनी 118 नावों के दिन-रात प्रयास कर रहे हैं. वहीं इसके साथ ही सेना के 630 जवान भी वायुसेना के हेलीकॉप्टर से राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं. इस पूरी त्रासदी में सबसे दुखद बात है कि बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में बेजुबान जानवार भी मारे गए हैं. वहीं भारत की सीमा से सटे नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से तीन गैंडे बाढ़ के पानी में बहकर भारत पहुंच गए. जिसके बाद नेपाल के वन अधिकारी गैंडों को खोजने के लिए बगहा के बाल्मिकी टाइगर रिजर्व के आसपास के इलाके में अभियान चलाकर उन गैंडों को सही सलामत बचा लिया.

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First published: August 21, 2017, 4:41 PM IST

बिहार इस समय बाढ़ की भयंकर मार झेल रहा है. वैसे तो बिहार में बाढ़ हर साल आती है. यही वजह है कि बिहार से बहने वाली कोसी नदी को बिहार का शोक भी कहा जाता है. कोसी की बाढ़ में हर साल कई लोग मौत की आगोश में सो जाते हैं. यह बड़ा ही भयानक होता है कि जब प्रकृति आपसे नाराज हो और उससे बचने का आपके पास कोई उपाय न हो. बिहार में इस साल अब तक लगभग 253 लोगों की मौत हो चुकी है. आंकड़ों के मुताबिक बाढ़ प्रभावित 18 जिलों में लगभग 1 करोड़ 26 लाख लोग इस भंयकर प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हैं. बाढ़ की चोट जिन जिलों में सबसे ज्यादा हुई है, उनमें किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, दरभंगा, मधुबनी, मुजफ्फरनगर, सीतामढ़ी, शिवहर, समस्तीपुर, गोपालगंज, सारण, सुपौल, मधेपुरा, सहरसा और खगड़िया शामिल हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से अब तक लगभग 7 लाख से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बचाया गया है. बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने के लिए एनडीआरएफ की 28 टीम के 1152 जवान अपनी 118 नावों के दिन-रात प्रयास कर रहे हैं. वहीं इसके साथ ही सेना के 630 जवान भी वायुसेना के हेलीकॉप्टर से राहत एवं बचाव कार्य में लगे हुए हैं. इस पूरी त्रासदी में सबसे दुखद बात है कि बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में बेजुबान जानवार भी मारे गए हैं. वहीं भारत की सीमा से सटे नेपाल के चितवन नेशनल पार्क से तीन गैंडे बाढ़ के पानी में बहकर भारत पहुंच गए. जिसके बाद नेपाल के वन अधिकारी गैंडों को खोजने के लिए बगहा के बाल्मिकी टाइगर रिजर्व के आसपास के इलाके में अभियान चलाकर उन गैंडों को सही सलामत बचा लिया.

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