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VIDEO: मन्नत पूरी होने पर बाबा की दरगाह में माथा टेकते हैं शेर

छत्तीसगढ़10:35 PM IST Sep 18, 2018

राजनांदगांव में मोहर्रम के महीने में मन्नतों वाले शेरों का निकलना शुरू हो गया है.राजनांदगांव में शेर की पोशाक पहनकर जब नर्तक निकलते हैं तो उन्हें देखने लोगों की खासी भीड़ जमा हो जाती है.यह परंपरा यहां पिछले काफी सालों से चली आ रही है. मोहर्रम से इस्लाम धर्म के नए साल की शुरुआत होती है.हिजरी सन् की शुरुआत इसी महीने से होती है. यही नहीं इस्लाम के चार सबसे पवित्र महीनों में इस महीने को भी शामिल किया जाता है. इस्लामी मान्यताओं के अनुसार इराक में यजीद नाम का जालिम बादशाह जो इंसानियत का दुश्मन था उसने इस माह में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन को कर्बला में परिवार और दोस्तों के साथ शहीद कर दिया था क्योंकि वह उसके अधीन नहीं आए.मोहर्रम के पूरे महीने मन्नती शेरों का तांता लगा रहता है. लोग शेरों की पोशाक पहनकर नृत्य करते हुए बाबा हजरत इंसा अली अटल शाह की दरगाह पर माथा टेकते हैं और अपनी मन्नत पूरी होने पर चादर चढ़ाते हैं यह मन्नती शेर पूरे गाजे-बाजे के साथ नृत्य करते हुए बाबा की दरगाह पहुंचते हैं.यहां हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिलती है. अधिकतर हिंदू वर्ग के लोग इस पर्व पर शेर बनकर अपनी फरियादों तथा मन्नतों को पूरा करने दरगाह में माथा टेकते हैं.

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राजनांदगांव में मोहर्रम के महीने में मन्नतों वाले शेरों का निकलना शुरू हो गया है.राजनांदगांव में शेर की पोशाक पहनकर जब नर्तक निकलते हैं तो उन्हें देखने लोगों की खासी भीड़ जमा हो जाती है.यह परंपरा यहां पिछले काफी सालों से चली आ रही है. मोहर्रम से इस्लाम धर्म के नए साल की शुरुआत होती है.हिजरी सन् की शुरुआत इसी महीने से होती है. यही नहीं इस्लाम के चार सबसे पवित्र महीनों में इस महीने को भी शामिल किया जाता है. इस्लामी मान्यताओं के अनुसार इराक में यजीद नाम का जालिम बादशाह जो इंसानियत का दुश्मन था उसने इस माह में पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन को कर्बला में परिवार और दोस्तों के साथ शहीद कर दिया था क्योंकि वह उसके अधीन नहीं आए.मोहर्रम के पूरे महीने मन्नती शेरों का तांता लगा रहता है. लोग शेरों की पोशाक पहनकर नृत्य करते हुए बाबा हजरत इंसा अली अटल शाह की दरगाह पर माथा टेकते हैं और अपनी मन्नत पूरी होने पर चादर चढ़ाते हैं यह मन्नती शेर पूरे गाजे-बाजे के साथ नृत्य करते हुए बाबा की दरगाह पहुंचते हैं.यहां हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिलती है. अधिकतर हिंदू वर्ग के लोग इस पर्व पर शेर बनकर अपनी फरियादों तथा मन्नतों को पूरा करने दरगाह में माथा टेकते हैं.

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