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VIDEO: राजनांदगांव में धूमधाम से मनाई गई कृष्ण जन्माष्टमी

राजनांदगांव News18 Chhattisgarh| September 4, 2018, 12:30 PM IST

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में बीते सोमवार को "हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की" और "गोविंदा आला रे मटकी संभाल ब्रिज वाला" गाने की गुंज सभी राधा कृष्ण मंदिर में सुनने को मिली. वहीं गोविंदा भी इस दौरान मटकी फोड़ने पहुंचे. इसी के साथ राजनांदगांव में कृष्ण जन्माष्टमी बहुत ही धूमधाम से मनाई गई. बता दें कि राजनांदगांव वैष्णव राजाओं का गढ़ माना जाता है. इसी क्रम में करीब 200 साल पुरानी महल में स्थित बलदेव-राधा-कृष्ण मंदिर में धूमधाम के साथ जन्माष्टमी मनाई गई. वहीं एक और प्राचीन मंदिर जमातपारा भी करीब 200 साल पुरानी है, जहां अलग-अलग राज्यों से पहुंचे साधु संतों का जमावड़ा लगता है. इसलिए इसे जमात मंदिर कहा जाता है. यहां भी प्राचीन काल से जन्माष्टमी मनाते आ रहे हैं. आज भी यह परंपरा जारी है.

Rakesh Kumar Yadav
First published: September 4, 2018, 12:30 PM IST

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में बीते सोमवार को "हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की" और "गोविंदा आला रे मटकी संभाल ब्रिज वाला" गाने की गुंज सभी राधा कृष्ण मंदिर में सुनने को मिली. वहीं गोविंदा भी इस दौरान मटकी फोड़ने पहुंचे. इसी के साथ राजनांदगांव में कृष्ण जन्माष्टमी बहुत ही धूमधाम से मनाई गई. बता दें कि राजनांदगांव वैष्णव राजाओं का गढ़ माना जाता है. इसी क्रम में करीब 200 साल पुरानी महल में स्थित बलदेव-राधा-कृष्ण मंदिर में धूमधाम के साथ जन्माष्टमी मनाई गई. वहीं एक और प्राचीन मंदिर जमातपारा भी करीब 200 साल पुरानी है, जहां अलग-अलग राज्यों से पहुंचे साधु संतों का जमावड़ा लगता है. इसलिए इसे जमात मंदिर कहा जाता है. यहां भी प्राचीन काल से जन्माष्टमी मनाते आ रहे हैं. आज भी यह परंपरा जारी है.

छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में बीते सोमवार को "हाथी घोड़ा पालकी जय कन्हैया लाल की" और "गोविंदा आला रे मटकी संभाल ब्रिज वाला" गाने की गुंज सभी राधा कृष्ण मंदिर में सुनने को मिली. वहीं गोविंदा भी इस दौरान मटकी फोड़ने पहुंचे. इसी के साथ राजनांदगांव में कृष्ण जन्माष्टमी बहुत ही धूमधाम से मनाई गई. बता दें कि राजनांदगांव वैष्णव राजाओं का गढ़ माना जाता है. इसी क्रम में करीब 200 साल पुरानी महल में स्थित बलदेव-राधा-कृष्ण मंदिर में धूमधाम के साथ जन्माष्टमी मनाई गई. वहीं एक और प्राचीन मंदिर जमातपारा भी करीब 200 साल पुरानी है, जहां अलग-अलग राज्यों से पहुंचे साधु संतों का जमावड़ा लगता है. इसलिए इसे जमात मंदिर कहा जाता है. यहां भी प्राचीन काल से जन्माष्टमी मनाते आ रहे हैं. आज भी यह परंपरा जारी है.

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