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VIDEO : साल में एक दिन के लिए खुलते हैं लिंगेश्वरी देवी मंदिर के पट

छत्तीसगढ़06:23 PM IST Sep 19, 2018

अपने विशिष्ट रीति रिवाज और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध बस्तर की वादियों में एक ऐसा गुफा है जिसका पट साल में सिर्फ एक बार,एक दिन के लिए खुलता है.इसके पट खुलते ही बस्तर ही नहीं देश का भविष्य तय होता है तो वहीं संतान का आशीर्वाद दम्पतियों को मिलता है.रहस्य ,रोमांच और आस्था से भरा यह अद्भुत प्राकृतिक गुफा अपने आप में निराला हैफरस ब्लॉक के गांव आलोर में पहाड़ी की गुफा में लिंगेश्वरी देवी मंदिर का पट खुला पट खुलते ही बिल्ली और इंसान के पग चिंग मिले हैं.इन चिन्हों से बस्तर के साल भर का भविष्य तय हो गया. क्षेत्र के बुजुर्ग जानकार रामचंद्र कोर्राम ने बताया की जो चिन्ह मिले हैं उससे यही अनुमान है की इस साल बस्तर के पश्चिम क्षेत्र में मारपीट और अशांति बनी रहेगी.पहाड़ी के छोटी सी गुफा में बसे लिंगेश्वरी देवी के दर्शन और संतान पाने मन्नत माँगने के लिए श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.गुफा में एक ही प्रवेश द्वार है जहां बैठकर या लेटकर ही प्रवेश किया जा सकता है. यहाँ मनौती मांगने का तरीका भी अपने आप में निराला है.संतान की कामना लेकर आये दंपयियों को यहां खीरा चढ़ाना अनिवार्य है.इसी खीरे को पुजारी द्वारा पूजा के पश्चात दंपति को वापस किया जाता है जिसे दंपति द्वारा स्वयं के नाखून से फाड़कर खाना होता है. लोगो की आस्था है की इस मंदिर में मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.

Vivek Shrivastava

अपने विशिष्ट रीति रिवाज और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध बस्तर की वादियों में एक ऐसा गुफा है जिसका पट साल में सिर्फ एक बार,एक दिन के लिए खुलता है.इसके पट खुलते ही बस्तर ही नहीं देश का भविष्य तय होता है तो वहीं संतान का आशीर्वाद दम्पतियों को मिलता है.रहस्य ,रोमांच और आस्था से भरा यह अद्भुत प्राकृतिक गुफा अपने आप में निराला हैफरस ब्लॉक के गांव आलोर में पहाड़ी की गुफा में लिंगेश्वरी देवी मंदिर का पट खुला पट खुलते ही बिल्ली और इंसान के पग चिंग मिले हैं.इन चिन्हों से बस्तर के साल भर का भविष्य तय हो गया. क्षेत्र के बुजुर्ग जानकार रामचंद्र कोर्राम ने बताया की जो चिन्ह मिले हैं उससे यही अनुमान है की इस साल बस्तर के पश्चिम क्षेत्र में मारपीट और अशांति बनी रहेगी.पहाड़ी के छोटी सी गुफा में बसे लिंगेश्वरी देवी के दर्शन और संतान पाने मन्नत माँगने के लिए श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है.गुफा में एक ही प्रवेश द्वार है जहां बैठकर या लेटकर ही प्रवेश किया जा सकता है. यहाँ मनौती मांगने का तरीका भी अपने आप में निराला है.संतान की कामना लेकर आये दंपयियों को यहां खीरा चढ़ाना अनिवार्य है.इसी खीरे को पुजारी द्वारा पूजा के पश्चात दंपति को वापस किया जाता है जिसे दंपति द्वारा स्वयं के नाखून से फाड़कर खाना होता है. लोगो की आस्था है की इस मंदिर में मांगी गई हर मुराद पूरी होती है.

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