कसोल में मनाया गया काहिका महायज्ञ उत्सव

कुल्‍लू04:54 PM IST Aug 02, 2018

मणिकर्ण घाटी में एक बार फिर देव आस्था की जीत हुई और दैवीय शक्ति से कथित रूप से मारा गया नड़ एक बार फिर जिंदा हो गया. ऐसी ही सदियों पुरानी परंपरा पर्यटन नगरी मणिकर्ण के कसोल गांव में निभाई गई. इस दौरान देवताओं ने अपनी शक्ति से बुरी आत्माओं का भी खात्मा किया और देव उत्सव में उपस्थित हजारों लोगों को अपना आशीर्वाद भी दिया. गौरतलब है कि मणिकर्ण घाटी के कसोल में 222 वर्षों के बाद यह काहिका उत्सव मनाया गया. इस काहिका उत्सव का आयोजन क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि के लिए किया गया है. काहिका उत्सव में ग्राहण के रावल ऋषि, दुर्वासा ऋषि, देवता चव्यन, माता काली कसोल, देवता अग्नपाल पाथला, नैना माता मणिकर्ण, देवता काली नाग मतेउडा, माता पंचासन मतेउड़ा, देवता जोड़ा नारायण कशाधा, देवता कपिल मुनि बरशैणी, जमलू देवता छलाल ने अपने सैकड़ों हारियानों संग भाग लिया. नड़ की भूमिका मणिकर्ण घाटी के फतेह चंद ने निभाई.

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मणिकर्ण घाटी में एक बार फिर देव आस्था की जीत हुई और दैवीय शक्ति से कथित रूप से मारा गया नड़ एक बार फिर जिंदा हो गया. ऐसी ही सदियों पुरानी परंपरा पर्यटन नगरी मणिकर्ण के कसोल गांव में निभाई गई. इस दौरान देवताओं ने अपनी शक्ति से बुरी आत्माओं का भी खात्मा किया और देव उत्सव में उपस्थित हजारों लोगों को अपना आशीर्वाद भी दिया. गौरतलब है कि मणिकर्ण घाटी के कसोल में 222 वर्षों के बाद यह काहिका उत्सव मनाया गया. इस काहिका उत्सव का आयोजन क्षेत्र की खुशहाली और समृद्धि के लिए किया गया है. काहिका उत्सव में ग्राहण के रावल ऋषि, दुर्वासा ऋषि, देवता चव्यन, माता काली कसोल, देवता अग्नपाल पाथला, नैना माता मणिकर्ण, देवता काली नाग मतेउडा, माता पंचासन मतेउड़ा, देवता जोड़ा नारायण कशाधा, देवता कपिल मुनि बरशैणी, जमलू देवता छलाल ने अपने सैकड़ों हारियानों संग भाग लिया. नड़ की भूमिका मणिकर्ण घाटी के फतेह चंद ने निभाई.

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