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VIDEO : डीपीएस में जर्मन संस्था के सहयोग से बच्चों व युवाओं के सतत विकास के लिए जागरुकता अभियान

झारखंड News18 Jharkhand| March 18, 2019, 10:33 PM IST

राजधानी रांची के दिल्ली पब्लिक स्कूल में सोमवार को जर्मन की जीआईज़ेड नामक संस्था के सहयोग से बच्चों एवं युवाओं के सतत विकास के लिए जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया गया. भारत एवं जर्मन संबंध के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में जर्मन दूतावास और जीआईज़ेड संस्था के प्रतिनिधि शामिल हुए. इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने नृत्य प्रस्तुति द्वारा उर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने का संदेश दिया. जर्मन प्रतिनिधि ने शानदार कार्यक्रम के आयोजन की प्रशंसा की. कार्यक्रम में आईएएस अधिकारी अविनाश कुमार बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए. विदित हो कि भारत की स्वतंत्रता के समय से ही जर्मन को महत्व दिया जाता रहा है. शुरू में जर्मन की भूमिका किसी दर्जा भारत के लिए अगर मित्र देश की नहीं रही तो वह शत्रु भी नहीं रहा है. उसके यहां के द्वार भारतीयों को शिक्षा व टेक्नोलॉजी के लिए हमेशा खुले रहे लेकिन वहां शिक्षा पाना व रोजगार पाना भारतीय के लिए सपना ही ज्यादा रहा है. यूएसएस, कनाडा और गल्फ की तरह वहां ज्यादा भारतीय नहीं हैं. मौजूदा दौर में भारत और जर्मन फिर एक दूसरे के करीब आए हैं. छात्र - छात्राओं में भी विदेशी मेहमानों के सामने प्रस्तुति देते समय जबर्दस्त उत्साह देखा गया.

Naushad Alam
First published: March 18, 2019, 10:33 PM IST

राजधानी रांची के दिल्ली पब्लिक स्कूल में सोमवार को जर्मन की जीआईज़ेड नामक संस्था के सहयोग से बच्चों एवं युवाओं के सतत विकास के लिए जागरूकता अभियान का शुभारंभ किया गया. भारत एवं जर्मन संबंध के 60 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में जर्मन दूतावास और जीआईज़ेड संस्था के प्रतिनिधि शामिल हुए. इस अवसर पर स्कूली बच्चों ने नृत्य प्रस्तुति द्वारा उर्जा संरक्षण एवं पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाने का संदेश दिया. जर्मन प्रतिनिधि ने शानदार कार्यक्रम के आयोजन की प्रशंसा की. कार्यक्रम में आईएएस अधिकारी अविनाश कुमार बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए. विदित हो कि भारत की स्वतंत्रता के समय से ही जर्मन को महत्व दिया जाता रहा है. शुरू में जर्मन की भूमिका किसी दर्जा भारत के लिए अगर मित्र देश की नहीं रही तो वह शत्रु भी नहीं रहा है. उसके यहां के द्वार भारतीयों को शिक्षा व टेक्नोलॉजी के लिए हमेशा खुले रहे लेकिन वहां शिक्षा पाना व रोजगार पाना भारतीय के लिए सपना ही ज्यादा रहा है. यूएसएस, कनाडा और गल्फ की तरह वहां ज्यादा भारतीय नहीं हैं. मौजूदा दौर में भारत और जर्मन फिर एक दूसरे के करीब आए हैं. छात्र - छात्राओं में भी विदेशी मेहमानों के सामने प्रस्तुति देते समय जबर्दस्त उत्साह देखा गया.

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