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VIDEO : संथाल समाज ने पूरी आस्था से मनाया बाहा पर्व, विधायक चंपई सोरेन की पूजा-अर्चना

झारखंड News18 Jharkhand| March 13, 2019, 9:44 PM IST

सरायकेला जिला के संथाल समाज द्वारा बाहा पर्व पूरे आस्था के साथ मनाया. अपनी व समाज की खुशहाली तथा प्रकृति की पूजा के रुप में यह पर्व जिले के विभिन्न हिस्सों में धूमधाम से मनाया जा रहा है. सरायकेला विधायक चंपई सोरेन ने भी परंपरा का निर्वहन पूरी आस्था के साथ निभाया. सादा जीवन जीने वाले चंपई सोरेन ने अपने पैतृक गांव जिलिंगगोड़ा में पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की तथा अपने परिवार, समाज व राज्य के खुशहाली की मन्नत मांगी. इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सभी से जल-जंगल और जमीन की संरक्षण करने का आह्वान किया. विदित हो कि इस पूजा के माध्यम से संथाल समाज प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है. आदिवासी समाज के सभी समुदायों का सबसे अधिक जुड़ाव प्रकृति से ही होता है और सभी प्रकृति की ही पूजा करते हैं. वहीं बाहा पर्व भी आदिवासियों का एक ऐसा पर्व है, जिसमें किसान खेत खलिहानों और बागीचों के नए फूलों और फसलों की पूजा-अर्चना करते हैं. आदिवासी समाज का मानना है कि इससे प्रकृति की प्रदान संपदा के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा होती है. प्रदेश के विभिन्न अंचलों में इसी प्रकार जहां-जहां संथाल समाज है, बाहा पर्व को उत्साह पूर्वक मनाया गया.

Vikas Kumar
First published: March 13, 2019, 9:44 PM IST

सरायकेला जिला के संथाल समाज द्वारा बाहा पर्व पूरे आस्था के साथ मनाया. अपनी व समाज की खुशहाली तथा प्रकृति की पूजा के रुप में यह पर्व जिले के विभिन्न हिस्सों में धूमधाम से मनाया जा रहा है. सरायकेला विधायक चंपई सोरेन ने भी परंपरा का निर्वहन पूरी आस्था के साथ निभाया. सादा जीवन जीने वाले चंपई सोरेन ने अपने पैतृक गांव जिलिंगगोड़ा में पारंपरिक तरीके से पूजा-अर्चना की तथा अपने परिवार, समाज व राज्य के खुशहाली की मन्नत मांगी. इस दौरान उन्होंने पर्यावरण संरक्षण का संदेश देते हुए सभी से जल-जंगल और जमीन की संरक्षण करने का आह्वान किया. विदित हो कि इस पूजा के माध्यम से संथाल समाज प्रकृति संरक्षण का संदेश देता है. आदिवासी समाज के सभी समुदायों का सबसे अधिक जुड़ाव प्रकृति से ही होता है और सभी प्रकृति की ही पूजा करते हैं. वहीं बाहा पर्व भी आदिवासियों का एक ऐसा पर्व है, जिसमें किसान खेत खलिहानों और बागीचों के नए फूलों और फसलों की पूजा-अर्चना करते हैं. आदिवासी समाज का मानना है कि इससे प्रकृति की प्रदान संपदा के प्रति लोगों में जागरूकता पैदा होती है. प्रदेश के विभिन्न अंचलों में इसी प्रकार जहां-जहां संथाल समाज है, बाहा पर्व को उत्साह पूर्वक मनाया गया.

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