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VIDEO:नीम वाले बाबा की दरगाह, जहां होती है गुरू पूर्णिमा पर पूजा-आरती

दमोह News18 Madhya Pradesh| July 27, 2018, 8:21 PM IST

यूं तो कौमी एकता की मिसाल देश के अनेक राज्यों में देखने को मिलती हैं जहां पर दरगाह या मंदिरों में विशेषकर हिंदू मुस्लिम एक साथ जाकर अपनी मन्नते मांगते हैं.लेकिन एक स्थान पर बनी सूफी,संत की ऐसी भी दरगाह है जहां पर हिंदू रीति रिवाज से पूजा होती है.आरती उतारी जाती है. इतना ही नहीं, शंख एवं घंटा भी बजाया जाता है. दमोह जिले के हटा स्थित नीम वाले बाबा की दरगाह में हर गुरूपूर्णिमा के अवसरों के साथ अन्य त्यौहारों व अवसरों पर इसी प्रकार का नजारा देखने मिलता है.जो लोग नीम वाले बाबा को अपना गुरू मानते हैं वे लोग यहां पर आकर आरती उतारते है.शंख एवं घंटा की ध्वनि करने के साथ ही प्रसाद भी अर्पण करते हैं.सालों से चली आ रही इस परंपरा को दोनों समुदाय के लोग अभी भी निभाते आ रहे हैं.पुरूष ही नहीं, महिलाए एवं बच्चे भी नीम वाले बाबा की दरगाह पर आकर सजदा करते हैं,नमस्कार करते हैं.गुरू पूर्णिमा के दौरान यहां पर आने वाले लोगों ने बताया कि वे सालों से एवं अपनी पीढ़ियों से यहां पर आकर अपने गुरू नीम वाले बाबा की दरगाह में पूजा अनुष्ठान करते हैं.वहीं इस मजार के कर्ताधर्ताओं में अधिकतर मुस्लिम ही हैं.मजार से जुड़े एक मुस्लिम शख्सियत का कहना था कि देश में तमाम सूफी-संतों ने हमेशा सभी धर्मों के लोगों को एक दूसरे के नजदीक लाने का काम किया है.

Ashish Jain
First published: July 27, 2018, 8:21 PM IST

यूं तो कौमी एकता की मिसाल देश के अनेक राज्यों में देखने को मिलती हैं जहां पर दरगाह या मंदिरों में विशेषकर हिंदू मुस्लिम एक साथ जाकर अपनी मन्नते मांगते हैं.लेकिन एक स्थान पर बनी सूफी,संत की ऐसी भी दरगाह है जहां पर हिंदू रीति रिवाज से पूजा होती है.आरती उतारी जाती है. इतना ही नहीं, शंख एवं घंटा भी बजाया जाता है. दमोह जिले के हटा स्थित नीम वाले बाबा की दरगाह में हर गुरूपूर्णिमा के अवसरों के साथ अन्य त्यौहारों व अवसरों पर इसी प्रकार का नजारा देखने मिलता है.जो लोग नीम वाले बाबा को अपना गुरू मानते हैं वे लोग यहां पर आकर आरती उतारते है.शंख एवं घंटा की ध्वनि करने के साथ ही प्रसाद भी अर्पण करते हैं.सालों से चली आ रही इस परंपरा को दोनों समुदाय के लोग अभी भी निभाते आ रहे हैं.पुरूष ही नहीं, महिलाए एवं बच्चे भी नीम वाले बाबा की दरगाह पर आकर सजदा करते हैं,नमस्कार करते हैं.गुरू पूर्णिमा के दौरान यहां पर आने वाले लोगों ने बताया कि वे सालों से एवं अपनी पीढ़ियों से यहां पर आकर अपने गुरू नीम वाले बाबा की दरगाह में पूजा अनुष्ठान करते हैं.वहीं इस मजार के कर्ताधर्ताओं में अधिकतर मुस्लिम ही हैं.मजार से जुड़े एक मुस्लिम शख्सियत का कहना था कि देश में तमाम सूफी-संतों ने हमेशा सभी धर्मों के लोगों को एक दूसरे के नजदीक लाने का काम किया है.

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