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VIDEO: मंडला के भगवान शिव कमाते हैं लाखों फिर भी बदहाल

मंडलाDecember 22, 2018, 1:03 PM IST

मध्य प्रदेश के मंडला जिले के करिया गांव में अमीर भगवान इन दिनों बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं. गांव में प्राचीन शिव मंदिर है, जिसकी देखरेख के लिए मंदिर की करीब 160 एकड़ जमीन को हर साल कृषि कार्यों के लिए ठेके पर दी जाती है, लेकिन इस जमीन से हुई आय का एक हिस्सा भी मंदिर की देखरेख पर नहीं लगाया जा रहा है. प्रशासन द्वारा मंदिर की अनदेखी से इसकी हालत जर्जर हो चुकी है. ग्रामीणों का कहना है कि कई सालों से मंदिर में पुताई भी नहीं करवाई गई है. मंदिर की जमीन से आने वाले रुपयों को भी इस पर खर्च नहीं किया जाता. ग्रामीणों ने मंदिर की मरम्मत और पूजापाठ के लिए पुजारी की व्यवस्था करने के लिए कई प्रशासन को अवगत करवाया, लेकिन हर साल लाखों की कमाई करने वाले भगवान शिव की तरफ प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है. मंदिर के राधा-कृष्ण ट्रस्ट में एक भी ग्रामीण नहीं है और ट्रस्ट की जमीन में अतिक्रमणकारियों ने जमीन पर कब्जा कर लिया है. जानकारी के अनुसार सैंकड़ों साल पहले गांव के मालगुजार बोधन पटेल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था, लेकिन पुत्र नहीं होने से वह अपनी संपत्ती मंदिर के नाम कर गए ताकि भगवान शिव की देखरेख में कोई दिक्कत नहीं आए.

Krishna Sahu

मध्य प्रदेश के मंडला जिले के करिया गांव में अमीर भगवान इन दिनों बदहाली के दौर से गुजर रहे हैं. गांव में प्राचीन शिव मंदिर है, जिसकी देखरेख के लिए मंदिर की करीब 160 एकड़ जमीन को हर साल कृषि कार्यों के लिए ठेके पर दी जाती है, लेकिन इस जमीन से हुई आय का एक हिस्सा भी मंदिर की देखरेख पर नहीं लगाया जा रहा है. प्रशासन द्वारा मंदिर की अनदेखी से इसकी हालत जर्जर हो चुकी है. ग्रामीणों का कहना है कि कई सालों से मंदिर में पुताई भी नहीं करवाई गई है. मंदिर की जमीन से आने वाले रुपयों को भी इस पर खर्च नहीं किया जाता. ग्रामीणों ने मंदिर की मरम्मत और पूजापाठ के लिए पुजारी की व्यवस्था करने के लिए कई प्रशासन को अवगत करवाया, लेकिन हर साल लाखों की कमाई करने वाले भगवान शिव की तरफ प्रशासन का ध्यान नहीं जा रहा है. मंदिर के राधा-कृष्ण ट्रस्ट में एक भी ग्रामीण नहीं है और ट्रस्ट की जमीन में अतिक्रमणकारियों ने जमीन पर कब्जा कर लिया है. जानकारी के अनुसार सैंकड़ों साल पहले गांव के मालगुजार बोधन पटेल ने इस मंदिर का निर्माण करवाया था, लेकिन पुत्र नहीं होने से वह अपनी संपत्ती मंदिर के नाम कर गए ताकि भगवान शिव की देखरेख में कोई दिक्कत नहीं आए.

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