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VIDEO : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस - मंदसौर की मैना जब लगाती हैं ट्रकों के पंचर तो हैरत से देखते हैं लोग

मंदसौर News18 Madhya Pradesh| March 8, 2019, 9:26 PM IST

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है. वैसे तो महिलाओं के संघर्ष और जज्बे की अलग-अलग बहुस सी कहानियां है, लेकिन एक ऐसी महिला की कहानी भी देखिए, जिसने अपना सब कुछ खो दिया लेकिन हौसला कायम रखा और मिसाल बन गई अपने परिवार और समाज के लिए. यह साहसी महिला आज के दिन ट्रकों ओर ट्रैक्टर के बड़े बड़े टायरों के पंचर लगाती है. मंदसौर के नया खेड़ा गांव की रहने वाली मैना के पिता हाईवे किनारे एक छोटी गुमटी लगाकर पंचर बनाने का काम करते थे. अचानक उनकी मौत हो गई तो मैना के पति ने यही काम करना शुरू कर दिया. पिता और पति के साथ काम करते करते मैंना छोटा-मोटा काम सीख गई थी. फिर अचानक मैना के पति की भी मौत हो गई. क्योंकि उसका कोई भाई नहीं था इसलिए सारे घर का बोझ मैना पर आन पड़ा. मैना के पास अपनी छोटी बहनों को पढ़ा लिखा कर शादी करने की जिम्मेदारी थी. मैना ने ट्रकों के टायर पंचर बनाने का काम सिखा और हाईवे पर अपने पिता की विरासत संभाल कर परिवार को संभालने का काम शुरू कर दिया. मैना ने अपनी बहनों की शादी की और बच्चों को पढ़ा लिखा कर योग्य बनाया. उसकी बहन भी मैना का हाथ बंटाती हैं.

Narendra Dhanotiya
First published: March 8, 2019, 9:26 PM IST

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है. वैसे तो महिलाओं के संघर्ष और जज्बे की अलग-अलग बहुस सी कहानियां है, लेकिन एक ऐसी महिला की कहानी भी देखिए, जिसने अपना सब कुछ खो दिया लेकिन हौसला कायम रखा और मिसाल बन गई अपने परिवार और समाज के लिए. यह साहसी महिला आज के दिन ट्रकों ओर ट्रैक्टर के बड़े बड़े टायरों के पंचर लगाती है. मंदसौर के नया खेड़ा गांव की रहने वाली मैना के पिता हाईवे किनारे एक छोटी गुमटी लगाकर पंचर बनाने का काम करते थे. अचानक उनकी मौत हो गई तो मैना के पति ने यही काम करना शुरू कर दिया. पिता और पति के साथ काम करते करते मैंना छोटा-मोटा काम सीख गई थी. फिर अचानक मैना के पति की भी मौत हो गई. क्योंकि उसका कोई भाई नहीं था इसलिए सारे घर का बोझ मैना पर आन पड़ा. मैना के पास अपनी छोटी बहनों को पढ़ा लिखा कर शादी करने की जिम्मेदारी थी. मैना ने ट्रकों के टायर पंचर बनाने का काम सिखा और हाईवे पर अपने पिता की विरासत संभाल कर परिवार को संभालने का काम शुरू कर दिया. मैना ने अपनी बहनों की शादी की और बच्चों को पढ़ा लिखा कर योग्य बनाया. उसकी बहन भी मैना का हाथ बंटाती हैं.

आज अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस है. वैसे तो महिलाओं के संघर्ष और जज्बे की अलग-अलग बहुस सी कहानियां है, लेकिन एक ऐसी महिला की कहानी भी देखिए, जिसने अपना सब कुछ खो दिया लेकिन हौसला कायम रखा और मिसाल बन गई अपने परिवार और समाज के लिए. यह साहसी महिला आज के दिन ट्रकों ओर ट्रैक्टर के बड़े बड़े टायरों के पंचर लगाती है. मंदसौर के नया खेड़ा गांव की रहने वाली मैना के पिता हाईवे किनारे एक छोटी गुमटी लगाकर पंचर बनाने का काम करते थे. अचानक उनकी मौत हो गई तो मैना के पति ने यही काम करना शुरू कर दिया. पिता और पति के साथ काम करते करते मैंना छोटा-मोटा काम सीख गई थी. फिर अचानक मैना के पति की भी मौत हो गई. क्योंकि उसका कोई भाई नहीं था इसलिए सारे घर का बोझ मैना पर आन पड़ा. मैना के पास अपनी छोटी बहनों को पढ़ा लिखा कर शादी करने की जिम्मेदारी थी. मैना ने ट्रकों के टायर पंचर बनाने का काम सिखा और हाईवे पर अपने पिता की विरासत संभाल कर परिवार को संभालने का काम शुरू कर दिया. मैना ने अपनी बहनों की शादी की और बच्चों को पढ़ा लिखा कर योग्य बनाया. उसकी बहन भी मैना का हाथ बंटाती हैं.

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