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आखिर सियासत में क्यों नहीं है मुसलमानों की हिस्सेदारी ?

देश04:28 PM IST Jul 12, 2018

बेशक देश की सियासत में मुसलमानों को लेकर बहुत हो-हल्ला होता है. लेकिन हकीकत यही है कि आज़ादी के बाद से 2014 के लोकसभा चुनावों में सबसे कम 22 मुसलमान उम्मीदवार ही जीतकर संसद में पहुंचे थे. ये अब तक का सबसे छोटा नम्बर था. इससे पहले 1957 में 23 मुसलमान चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे. लोकसभा में मुसलमानों की हालत को शायर मुनव्वर राणा का ये शेयर भी कुछ तंज भरे अंदाज में बंया करता है ̔ मुसाहिब की सफों में भी मेरी गिनती नहीं होती, यह वह मुल्क है जिसकी मैं सरकारें बनाता था. ̓ इस बारे में एएमयू, अलीगढ़ के प्रोफेसर शकील समदानी का कहना है कि ̔ सिर्फ 1980-84 का ही वो दौर था जब मुसलमान 49 और 42 के बड़े नम्बर के साथ लोकसभा पहुंचे थे. लेकिन उसके बाद से ये नम्बर नीचे की ओर गिरता चला गया. 25 और 30 के आंकड़ों में ये नम्बर उलझकर रह गया. सिर्फ 1999 में एक बार जरूर 34 मुस्लिम उम्मीदवार जीते थे. हालांकि अब उपचुनाव के बाद 16वीं लोकसभा में मुसलमानों की संख्या 24 हो गई है. एक मुस्लिम महिला भी चुनाव जीतकर संसद में पहुंच गई हैं. देश की 13.4 फीसदी आबादी वाले समुदाय की संसद में मौजूदगी महज 4.2 फीसदी रह गई. ̓

Ankit Francis

बेशक देश की सियासत में मुसलमानों को लेकर बहुत हो-हल्ला होता है. लेकिन हकीकत यही है कि आज़ादी के बाद से 2014 के लोकसभा चुनावों में सबसे कम 22 मुसलमान उम्मीदवार ही जीतकर संसद में पहुंचे थे. ये अब तक का सबसे छोटा नम्बर था. इससे पहले 1957 में 23 मुसलमान चुनाव जीतकर लोकसभा पहुंचे थे. लोकसभा में मुसलमानों की हालत को शायर मुनव्वर राणा का ये शेयर भी कुछ तंज भरे अंदाज में बंया करता है ̔ मुसाहिब की सफों में भी मेरी गिनती नहीं होती, यह वह मुल्क है जिसकी मैं सरकारें बनाता था. ̓ इस बारे में एएमयू, अलीगढ़ के प्रोफेसर शकील समदानी का कहना है कि ̔ सिर्फ 1980-84 का ही वो दौर था जब मुसलमान 49 और 42 के बड़े नम्बर के साथ लोकसभा पहुंचे थे. लेकिन उसके बाद से ये नम्बर नीचे की ओर गिरता चला गया. 25 और 30 के आंकड़ों में ये नम्बर उलझकर रह गया. सिर्फ 1999 में एक बार जरूर 34 मुस्लिम उम्मीदवार जीते थे. हालांकि अब उपचुनाव के बाद 16वीं लोकसभा में मुसलमानों की संख्या 24 हो गई है. एक मुस्लिम महिला भी चुनाव जीतकर संसद में पहुंच गई हैं. देश की 13.4 फीसदी आबादी वाले समुदाय की संसद में मौजूदगी महज 4.2 फीसदी रह गई. ̓

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