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  • March 25, 2021, 4:27 PM IST
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Varanasi | देखिए चिता की राख से काशी में कैसे खेलते हैं महादेव अपने गणों के साथ होली | Viral Video

वाराणसी. काशी जहां जन्म और मृत्यु दोनो जश्न है। ऐसी अलबेली अविनाशी काशी में खेली जाती है दुनिया की एकलौती चिता की राख और भस्म से होली। नजारा ऐसा दिखता है कि जैसे भूतभावन महादेव खुद होली खेल रहे हों। इस बार भी भूत भावन के भक्तों ने दुनिया की एकलौती चिता भस्म की होली खेली। दुनिया के नक्शे में मोक्ष के घाट के रूप में विख्यात काशी के मणिकर्णिका पर ये होली खेली गई। काशी में देवस्थान और महाश्मसान का महत्व एक जैसा है। पवित्र तीर्थों के बीच में विराजे बाबा श्मशान नाथ के चरणो में चिता की राख समर्पित करने के बाद भक्त यहां उसे उड़ाकर होली खेलते हैं। इस मणिकर्णिका महा श्मशान में चिता भस्म का फाग रचाने और राग विराग दोनों को ही जिंदगी का हिस्सा मानने की ये जीवंत तस्वीरें है। काशी की ये रीति रिवाज उसे अविमुक्त क्षेत्र बनाते हैं। इसलिए आम से लेकर खास तक, संत से लेकर सन्यासी तक चिता भस्म को विभूति मानकर माथे पर लगाकर होली खेलते हैं। राग विराग की नगरी काशी की परंपराएं भी अजब और अनोखी हैं। रंगभरी एकादशी पर अड़भंगी बारात के साथ बाबा मां पार्वती का गौना कराकर ले जाते हैं और दूसरे दिन बाबा के गणों दवारा ये होली खेली जाती है। काशीवासी मानते हैं कि मां गौरा को विदा कराने के बाद बाबा भक्तोंा को होली खेलने और हुडदंग की अनुमति प्रदान करते हैं। महाश्मशाननाथ मंदिर के व्यवस्थापक गुलशन कपूर कहते हैं कि परंपराओं के अनुसार रंगभरी एकादशी के ठीक अगले दिन भगवान शिव के स्वारुप बाबा मशान नाथ की पूजा कर श्महशान घाट पर चिता भस्मल से उनके गण होली खेलते हैं। काशी मोक्ष की नगरी है और मान्यडता है कि यहां भगवान शिव स्व यं तारक मंत्र देते हैं। चिता की भस्मक को उनके गण अबीर और गुलाल की भांति एक दूसरे पर फेंककर सुख-समृद्धि-वैभव संग शिव की कृपा पाने का जतन करते हैं। गुरुवार दोपहर में भी जब चिता भस्मक की होली शुरु हुई तो हर-हर महादेव से घाट और गलियां गूंज उठीं। मणिकर्णिका घाट के अलावा इस बार हरिश्चंसद्र घाट पर भी चिता भस्म की होली पूरे धूमधाम से खेली गई। मणिकर्णिका पर जहां सदियों से चिताएं कभी ठंडी नहीं हुई वहां पर राग विराग और परंपराओं का उत्साव चिता भस्म की होली खेलने न केवल देश से बल्कि विदेशों से भी लोग पहुंचते हैं। साधु संत भी यहां गंगा घाट की फिजाओं में 'खेलें मशाने में होरी दिगंबर खेलें मशाने में होरी' के बोल पर नाचते हैं। बाबा चरण दास कहते हैं कि काशी में यह सदियों की परंपरा अनवरत जारी है। सबसे पहले सुबह भगवान शिव के प्रतीक बाबा मशाननाथ का मणिकर्णिका घाट पर मंदिर में भव्य श्रृंगार कर पूजन की परंपरा रही है। इसके बाद बाबा को भाेग और प्रसाद के बाद श्म शान घाट पर बाबा के आशीष के बाद उनके भक्त चिताओं की भस्मे लेकर एक दूसरे पर फेंक कर फाग और होरी के गीत गाते हैं। अविनाशी मानी जाने वाली काशी में इस होली के रूप में बाबा विश्वनाथ का अड़भंगी रुप नजर आता है। रंग एकादशी पर अकबरी टोपी पहने बाबा का जहां सांसारिकता और राजसी ठाट बाट नजर आता है तो अगले दिन मशान की इस होली में भूत-पिशाच समेत गणों के साथ ढोल, मजीरे और डमरुओं की थाप के बीच चिता भस्म की इस होली में बाबा का भूतभावन रूप नजर आता है।A brand new hub for all viral videos from News18 Hindi. A page to keep you posted about all that bizarre, unusual, unique & quirky things happening around you in the easiest of explainer videos. Watch all videos on your phone at just one click.Follow Us:Website: https://hindi.news18.com/Facebook: https://www.facebook.com/News18India

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