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Video: इस मंदिर में विराजमान है हनुमान जी का मानवरूप, नहीं चढ़ता सिंदूर का चोला

Aarti ETV Rajasthan| May 9, 2017, 7:40 PM IST

हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी को वानर का रूप माना गया है. इसलिए आमतौर पर हर मंदिर में वानरमुखी हनुमान जी के विग्रह विराजित हैं. आज ‘आरती’ की यात्रा एक ऐसे मंदिर से जहां हनुमान जी का मानव विग्रह विराजित है. मानवमुखी हनुमान जी का ये मंदिर एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां हनुमान जी को सिंदूर का चोला नहीं चढ़ता. श्वेत पत्थर से निर्मित हनुमान जी का ये विग्रह पहाड़ी पर जिस तरह प्रतिष्ठित कराया गया है वो अपने आप में एक चमत्कार है. जयपुर अलवर राजमार्ग पर जयपुर से 80 किमी दूर स्थित विराटनगर में पंचखंड पर्वत या भीमगिरी के शिखर पर स्थित हनुमान जी की मानवमुखी प्रतिमा का स्थापना आज से करीब 80 साल पहले महात्मा रामचंद्र वीर महाराज द्वारा की गई थी.

news18 hindi
First published: May 9, 2017, 7:39 PM IST

हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हनुमान जी को वानर का रूप माना गया है. इसलिए आमतौर पर हर मंदिर में वानरमुखी हनुमान जी के विग्रह विराजित हैं. आज ‘आरती’ की यात्रा एक ऐसे मंदिर से जहां हनुमान जी का मानव विग्रह विराजित है. मानवमुखी हनुमान जी का ये मंदिर एक मात्र ऐसा मंदिर है जहां हनुमान जी को सिंदूर का चोला नहीं चढ़ता. श्वेत पत्थर से निर्मित हनुमान जी का ये विग्रह पहाड़ी पर जिस तरह प्रतिष्ठित कराया गया है वो अपने आप में एक चमत्कार है. जयपुर अलवर राजमार्ग पर जयपुर से 80 किमी दूर स्थित विराटनगर में पंचखंड पर्वत या भीमगिरी के शिखर पर स्थित हनुमान जी की मानवमुखी प्रतिमा का स्थापना आज से करीब 80 साल पहले महात्मा रामचंद्र वीर महाराज द्वारा की गई थी.

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