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VIDEO: मजदूरी का पूरा पैसा नहीं मिला तो परिवार-सामान सहित कलेक्ट्रेट पर डाला डेरा

चित्तौड़गढ़ News18 Uttarakhand| January 12, 2019, 2:01 PM IST

चित्तौड़गढ़ में मध्यप्रदेश के आदिवासियों द्वारा 21 दिन तक निम्बाहेड़ा के मेड़ीखेड़ा स्थित वन विभागीय परिसर में मजदूरी करने के बाद उन्हें उनकी मेहनत की राशि का पूरा भुगतान नहीं किया गया. इससे निराश होकर मजदूरों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर परिवार सहित डेरा डाल दिया है. इस संबंध में श्रमिकों के प्रतिनिधि के रूप में रणविजय, विजय, भैयालाल सहित कई श्रमिकों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर उन्हें इस मामले से अवगत कराया. मजदूरों के अनुसार 20 दिसंबर से 9 जनवरी तक 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी करने पर उन्हें 3 लाख 41 हजार 250 रुपयों का भुगतान किया जाना था. लेकिन विभाग के डिप्टी रेंजर द्वारा उन्हें मात्र 46 हजार रुपयों का ही भुगतान किया गया. मजदूरों ने बताया कि जब उन्होंने मेहनत की पूरी राशि भुगतान किए जाने की मांग की तब उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें बकाया भुगतान करने से मना कर दिया गया. बता दें कि लगभग 65 परिवारों के बड़े बुजुर्ग, महिला, पुरुष बच्चों के साथ घर का सामान लिए इन आदिवासियों ने ठिठुरन भरी सर्दी के बीच कलेक्ट्रेट पर पड़ाव डालकर न्याय की गुहार लगाई है.

Piyush Mundara
First published: January 12, 2019, 2:01 PM IST

चित्तौड़गढ़ में मध्यप्रदेश के आदिवासियों द्वारा 21 दिन तक निम्बाहेड़ा के मेड़ीखेड़ा स्थित वन विभागीय परिसर में मजदूरी करने के बाद उन्हें उनकी मेहनत की राशि का पूरा भुगतान नहीं किया गया. इससे निराश होकर मजदूरों ने कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर परिवार सहित डेरा डाल दिया है. इस संबंध में श्रमिकों के प्रतिनिधि के रूप में रणविजय, विजय, भैयालाल सहित कई श्रमिकों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंप कर उन्हें इस मामले से अवगत कराया. मजदूरों के अनुसार 20 दिसंबर से 9 जनवरी तक 250 रुपए प्रतिदिन के हिसाब से मजदूरी करने पर उन्हें 3 लाख 41 हजार 250 रुपयों का भुगतान किया जाना था. लेकिन विभाग के डिप्टी रेंजर द्वारा उन्हें मात्र 46 हजार रुपयों का ही भुगतान किया गया. मजदूरों ने बताया कि जब उन्होंने मेहनत की पूरी राशि भुगतान किए जाने की मांग की तब उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और उन्हें बकाया भुगतान करने से मना कर दिया गया. बता दें कि लगभग 65 परिवारों के बड़े बुजुर्ग, महिला, पुरुष बच्चों के साथ घर का सामान लिए इन आदिवासियों ने ठिठुरन भरी सर्दी के बीच कलेक्ट्रेट पर पड़ाव डालकर न्याय की गुहार लगाई है.

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