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सैकड़ों पुरोहितों ने 108 स्नान कर पापों का किया प्रायश्चित

पुष्कर News18 Rajasthan| August 26, 2018, 9:16 PM IST

किसी व्यक्ति को अपने पापों का प्रायश्चित करने का मौका मिले तो वह उसे नहीं गंवाना चाहता. शास्त्रों के अनुसार ये मौका श्रावण मास की पूर्णिमा को मिलता है . इस अवसर पर इस दिन सैकड़ों पुरोहितों ने हेमाद्री स्नान कर पापों का प्रायश्चित किया. इसे श्रावणी उपाकर्म भी कहा जाता है. शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता रही है कि श्रावण मास की पूर्णिमा पर स्नान करने से जाने- अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है . तीर्थ नगरी पुष्कर में इसी मान्यता के अनुरूप सरोवर के मुख्य घाटों पर सैकड़ो पुरोहितों ने 108 स्नान कर पापों का प्रायश्चित किया. राम घाट, ब्रह्म घाट और वराह घाट पर रविवार को सुबह से ही श्रावणी कर्म करने वाले ब्राह्मणों का तांता लग गया. मुख्य आचार्य के सानिध्य में किए गए इस अनुष्ठान में पहले स्नान किया गया इसके अंतर्गत गो मूत्र ,घी , पूसा , स्वर्ण , गोबर , दूध , मृतिका, फल, वनस्पति और दरमा का स्पर्श कर शरीर को पवित्र किया गया इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अलग - अलग वस्तुओ सें स्नान हुए.

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First published: August 26, 2018, 9:16 PM IST

किसी व्यक्ति को अपने पापों का प्रायश्चित करने का मौका मिले तो वह उसे नहीं गंवाना चाहता. शास्त्रों के अनुसार ये मौका श्रावण मास की पूर्णिमा को मिलता है . इस अवसर पर इस दिन सैकड़ों पुरोहितों ने हेमाद्री स्नान कर पापों का प्रायश्चित किया. इसे श्रावणी उपाकर्म भी कहा जाता है. शास्त्रों के अनुसार ऐसी मान्यता रही है कि श्रावण मास की पूर्णिमा पर स्नान करने से जाने- अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है . तीर्थ नगरी पुष्कर में इसी मान्यता के अनुरूप सरोवर के मुख्य घाटों पर सैकड़ो पुरोहितों ने 108 स्नान कर पापों का प्रायश्चित किया. राम घाट, ब्रह्म घाट और वराह घाट पर रविवार को सुबह से ही श्रावणी कर्म करने वाले ब्राह्मणों का तांता लग गया. मुख्य आचार्य के सानिध्य में किए गए इस अनुष्ठान में पहले स्नान किया गया इसके अंतर्गत गो मूत्र ,घी , पूसा , स्वर्ण , गोबर , दूध , मृतिका, फल, वनस्पति और दरमा का स्पर्श कर शरीर को पवित्र किया गया इसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के साथ अलग - अलग वस्तुओ सें स्नान हुए.

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