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VIDEO: इस गांव में 80 किलो की फुटबॉल से खेलते हैं युवा, जानिए क्यों

टोंक News18 Rajasthan| January 15, 2019, 2:27 PM IST

राजस्थान के टोंक जिले के आवां कस्बे में हर साल मकर संक्रांति के दिन एक परंपरागत खेल खेला जाता है. इस खेल के परिणाम से आने वाले साल में अकाल रहेगा या सुकाल का अंदाजा लगाया जाता है. आवां में करीब 80 किलो की फुटबॉल तैयार की जाती है और इसे दूनी दरवाजे व अखनिया दरवाजे की तरफ धकेलने की कोशिश की जाती है. फुटबॉल पत्थर, टाट व रस्सी से तैयार की जाती है. कहा जाता है कि उनियारा ठिकाने के राव राज सरदार सिंह प्रथम के समय फौज में भर्ती के लिए युवाओं का दमखम परखने के लिए इस परंपरा की शुरूआत की गई थी. इस खेल में 6 गावों के युवा भाग लेते हैं. जानकारों के अनुसार गोपाल चौक में खेले जाने वाले इस खेल में फुटबॉल अखनिया दरवाजे की तरफ जाए तो अकाल व दूनी दरवाजे की तरफ जाए तो सुकाल के संकेत मिलते हैं.

Manoj Tiwari
First published: January 15, 2019, 2:27 PM IST

राजस्थान के टोंक जिले के आवां कस्बे में हर साल मकर संक्रांति के दिन एक परंपरागत खेल खेला जाता है. इस खेल के परिणाम से आने वाले साल में अकाल रहेगा या सुकाल का अंदाजा लगाया जाता है. आवां में करीब 80 किलो की फुटबॉल तैयार की जाती है और इसे दूनी दरवाजे व अखनिया दरवाजे की तरफ धकेलने की कोशिश की जाती है. फुटबॉल पत्थर, टाट व रस्सी से तैयार की जाती है. कहा जाता है कि उनियारा ठिकाने के राव राज सरदार सिंह प्रथम के समय फौज में भर्ती के लिए युवाओं का दमखम परखने के लिए इस परंपरा की शुरूआत की गई थी. इस खेल में 6 गावों के युवा भाग लेते हैं. जानकारों के अनुसार गोपाल चौक में खेले जाने वाले इस खेल में फुटबॉल अखनिया दरवाजे की तरफ जाए तो अकाल व दूनी दरवाजे की तरफ जाए तो सुकाल के संकेत मिलते हैं.

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