'आर पार' : अटल का अन्त नहीं अनन्त में अटल

आर पार10:54 PM IST Aug 17, 2018

'उजियारे में, अंधकार में, कल कहार में, बीच धार में, घोर घृणा में, पूत प्यार में, क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में, जीवन के शत-शत आकर्षक, अरमानों को ढलना होगा. कदम मिलाकर चलना होगा.' ये विदाई अन्तिम थी.. लेकिन इसकी छाप सदियों तक कायम रहेगी. ज़रा सोचिए वो नेता कैसा होगा, वो व्यक्तित्व कितना ऊंचा होगा, जिसकी अन्तिम यात्रा में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, गवर्नर, मंत्री, सांसद, विधायक, नेता, जनता, एक भाव से हर कोई साथ था. आज शब्द नहीं, सिर्फ़ तस्वीरें हैं जिन्हे देखा जा सकता है और महसूस किया जा सकता है.

अमिश देवगन

'उजियारे में, अंधकार में, कल कहार में, बीच धार में, घोर घृणा में, पूत प्यार में, क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में, जीवन के शत-शत आकर्षक, अरमानों को ढलना होगा. कदम मिलाकर चलना होगा.' ये विदाई अन्तिम थी.. लेकिन इसकी छाप सदियों तक कायम रहेगी. ज़रा सोचिए वो नेता कैसा होगा, वो व्यक्तित्व कितना ऊंचा होगा, जिसकी अन्तिम यात्रा में प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, गवर्नर, मंत्री, सांसद, विधायक, नेता, जनता, एक भाव से हर कोई साथ था. आज शब्द नहीं, सिर्फ़ तस्वीरें हैं जिन्हे देखा जा सकता है और महसूस किया जा सकता है.

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