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हादसा: ATS के जाल में अंडरवर्ल्ड का गुर्गा

क्राइम News18India| June 2, 2018, 7:21 PM IST

हादसा कहीं भी कभी भी और किसी के भी साथ हो सकता है. आज हम आपको हिन्दुस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगी बेहद बड़ी कामयाबी के बारे में कुछ बताएं. उससे पहले आप उस ऑपरेशन की वो झलक देखिये और समझने की कोशिश कीजिए. आखिर रात के अंधेरे में बीच समंदर की उफनती लहरों पर इस ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया गया. चलिए पहले उस पर नज़र डालते हैं. पुलिस की पकड़ में जिस लम्बे कद के शख्स के चेहरा ढका हुआ है. उसका असली चेहरा कुछ कुछ ऐसा है. तस्वीर हालांकि पुरानी है, लेकिन है असली. यही है शेख अहमद कमाल उर्फ लम्बू. जिसे आधी रात के वक्त अरब सागर में चलाए गए ऑपरेशन के बाद पकड़ा गया. गुजरात एटीएस के मुताबिक लम्बू 1993 धमाके का प्रमुख आरोपी और अंडर वर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहीम का करीबी है. और दाउद के कहने पर ही वो पाकिस्तान गया था. फिर ट्रेनिंग लेने के बाद उसने मुम्बई सिलसिलेवार धमाकों को अंजाम दिया था. धमाको के बाद ही वो फर्जी पासपोर्ट पर टाइगर मेमन के साथ दुबई भाग गया था और तब से वहीं था. मुम्बई धमाको की जांच कर रही सीबीआई ने लुक आउट नोटिस ,इंटरपोल नोटिस के अलावा लम्बू के सर पांच लाख रुपये का इनाम रखा था. लम्बू का पकड़ा जाना हिन्दुस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के चौकन्नेपन का सबूत है. खुलासा है कि दुबई और पाकिस्तान से आने वाली तमाम कॉल को ट्रेस करते वक्त अचानक एक कॉल पर नजर टिक गई, क्योंकि उसमें स्मगलिंग की बात थी. पुलिस के साथ साथ सुरक्षा एजेंसियों को ये बात खटकी कि इन दिनों अंडरवर्ल्ड सोने की स्मगलिंग में ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखता. इसका मतलब कुछ गड़बड़ है. ये पता चल चुका था कि वो वलसाड के समंदर के पास किसी से मिलने वाला है. लिहाजा उसे दबोच लिया गया. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की घेराबंदी से भारत का मोस्टवांटेड दाऊद इब्राहिम और उसके डी कंपनी का साम्राज्य दोनों की ही कमर करीब करीब टूट चुकी है. ऐसे में लम्बू का पकड़ा जाना और उसके स्मगलिंग के रैकेट की कहानी एटीएस और सीबीआई किसी के गले नहीं उतर रही. अंदाजा है कि लम्बू किसी गहरी साज़िश का सिरा न हो. देखिए ये वीडियो.

जनक दवे
First published: June 2, 2018, 7:17 PM IST

हादसा कहीं भी कभी भी और किसी के भी साथ हो सकता है. आज हम आपको हिन्दुस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के हाथ लगी बेहद बड़ी कामयाबी के बारे में कुछ बताएं. उससे पहले आप उस ऑपरेशन की वो झलक देखिये और समझने की कोशिश कीजिए. आखिर रात के अंधेरे में बीच समंदर की उफनती लहरों पर इस ऑपरेशन को कैसे अंजाम दिया गया. चलिए पहले उस पर नज़र डालते हैं. पुलिस की पकड़ में जिस लम्बे कद के शख्स के चेहरा ढका हुआ है. उसका असली चेहरा कुछ कुछ ऐसा है. तस्वीर हालांकि पुरानी है, लेकिन है असली. यही है शेख अहमद कमाल उर्फ लम्बू. जिसे आधी रात के वक्त अरब सागर में चलाए गए ऑपरेशन के बाद पकड़ा गया. गुजरात एटीएस के मुताबिक लम्बू 1993 धमाके का प्रमुख आरोपी और अंडर वर्ल्ड डॉन दाउद इब्राहीम का करीबी है. और दाउद के कहने पर ही वो पाकिस्तान गया था. फिर ट्रेनिंग लेने के बाद उसने मुम्बई सिलसिलेवार धमाकों को अंजाम दिया था. धमाको के बाद ही वो फर्जी पासपोर्ट पर टाइगर मेमन के साथ दुबई भाग गया था और तब से वहीं था. मुम्बई धमाको की जांच कर रही सीबीआई ने लुक आउट नोटिस ,इंटरपोल नोटिस के अलावा लम्बू के सर पांच लाख रुपये का इनाम रखा था. लम्बू का पकड़ा जाना हिन्दुस्तानी सुरक्षा एजेंसियों के चौकन्नेपन का सबूत है. खुलासा है कि दुबई और पाकिस्तान से आने वाली तमाम कॉल को ट्रेस करते वक्त अचानक एक कॉल पर नजर टिक गई, क्योंकि उसमें स्मगलिंग की बात थी. पुलिस के साथ साथ सुरक्षा एजेंसियों को ये बात खटकी कि इन दिनों अंडरवर्ल्ड सोने की स्मगलिंग में ज्यादा दिलचस्पी नहीं रखता. इसका मतलब कुछ गड़बड़ है. ये पता चल चुका था कि वो वलसाड के समंदर के पास किसी से मिलने वाला है. लिहाजा उसे दबोच लिया गया. भारतीय सुरक्षा एजेंसियों की घेराबंदी से भारत का मोस्टवांटेड दाऊद इब्राहिम और उसके डी कंपनी का साम्राज्य दोनों की ही कमर करीब करीब टूट चुकी है. ऐसे में लम्बू का पकड़ा जाना और उसके स्मगलिंग के रैकेट की कहानी एटीएस और सीबीआई किसी के गले नहीं उतर रही. अंदाजा है कि लम्बू किसी गहरी साज़िश का सिरा न हो. देखिए ये वीडियो.

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