HTP: खेद नहीं काफी, राहुल गांधी को मांगनी पड़ी माफी

शो11:06 PM IST Apr 30, 2019

NEWS18 इंडिया पर अपना फेवरिट डिबेट शो हम तो पूछेंगे. राफ़ैल पर BJP खासकर PM मोदी को घेरने के चक्कर में राहुल गाँधी ख़ुद बुरी तरह फँस गए हैं. आज सुप्रीम कोर्ट से तगड़ी फटकार के बाद उन्हें माफ़ी माँगने को मजबूर होना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष की तरफ से कोर्ट में वकील अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए. सिंघवी ने साफ़-साफ़ कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हवाले से राहुल का ये कहना कि चौकीदार चोर है, ग़लती थी. सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले को लेकर राहुल गांधी की तरफ से दिए गए हलफ़नामे पर भी असंतुष्टि जताई. राहुल गांधी की तरफ़ से दिए गए हलफ़नामे में खेद (Regret) शब्द का इस्तेमाल किया गया है जबकि राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ याचिका दायर करने वाली मीनाक्षी लेखी के वकील मुकुल रोहतगी ने बिना शर्त माफ़ी (Unconditional Apology) की माँग रखी है. सिंघवी ने कहा कि वो शपथ पत्र में माफ़ी शब्द भी डालेंगे. मामले की अगली सुनवाई 6 मई तक के लिए स्थगित कर दी गई है. लेकिन राहुल के माफ़ीनामे के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं जो आज हम पूछेंगे. हम तो पूछेंगे कि सवाल है क्या चुनावी फ़ायदे के लिए कोर्ट के हवाले से ग़लत बयानबाज़ी उचित है?

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NEWS18 इंडिया पर अपना फेवरिट डिबेट शो हम तो पूछेंगे. राफ़ैल पर BJP खासकर PM मोदी को घेरने के चक्कर में राहुल गाँधी ख़ुद बुरी तरह फँस गए हैं. आज सुप्रीम कोर्ट से तगड़ी फटकार के बाद उन्हें माफ़ी माँगने को मजबूर होना पड़ा. सुप्रीम कोर्ट की अवमानना के मामले में कांग्रेस अध्यक्ष की तरफ से कोर्ट में वकील अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए. सिंघवी ने साफ़-साफ़ कहा कि सुप्रीम कोर्ट के हवाले से राहुल का ये कहना कि चौकीदार चोर है, ग़लती थी. सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना मामले को लेकर राहुल गांधी की तरफ से दिए गए हलफ़नामे पर भी असंतुष्टि जताई. राहुल गांधी की तरफ़ से दिए गए हलफ़नामे में खेद (Regret) शब्द का इस्तेमाल किया गया है जबकि राहुल गाँधी के ख़िलाफ़ याचिका दायर करने वाली मीनाक्षी लेखी के वकील मुकुल रोहतगी ने बिना शर्त माफ़ी (Unconditional Apology) की माँग रखी है. सिंघवी ने कहा कि वो शपथ पत्र में माफ़ी शब्द भी डालेंगे. मामले की अगली सुनवाई 6 मई तक के लिए स्थगित कर दी गई है. लेकिन राहुल के माफ़ीनामे के बाद कई सवाल खड़े हो रहे हैं जो आज हम पूछेंगे. हम तो पूछेंगे कि सवाल है क्या चुनावी फ़ायदे के लिए कोर्ट के हवाले से ग़लत बयानबाज़ी उचित है?

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