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HTP : क्या मन्दिर-मन्दिर जाने के चुनावी ‘धर्म’ में नेता राजधर्म को पीछे छोड़ चुके हैं?

देश News18India| December 1, 2017, 11:02 PM IST

कौन किस धर्म को मानता है, हिन्दुस्तान में कम से कम इसे छुपाया नहीं जा सकता. जन्म से लेकर स्कूल, कॉलेज और रोजगार के लिए भरे जाने वाले तमाम दस्तावेज में इसका जिक्र होता है. नेताओं को चुनावी नामांकन में इसे बताना पड़ता है. इसके बावजूद कांग्रेस अमित शाह का और BJP राहुल गाँधी का धर्म पूछ रही है. अमित शाह या राहुल गाँधी के धर्म से देश की बेहतरी के लिए उनके नजरिये में क्या बदलाव आ जाएगा? गुजरात चुनाव के पीक पर जब बात उम्मीदवारों की छवि, आपराधिक रिकॉर्ड, उनकी सेवा भावना और प्रतिबद्धता की होनी चाहिए, बात दो नेताओं के धर्म की हो रही है. क्या गुजरात के विकास के दावे और भावी गुजरात के सपने राजधर्म नहीं?

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First published: December 1, 2017, 11:02 PM IST

कौन किस धर्म को मानता है, हिन्दुस्तान में कम से कम इसे छुपाया नहीं जा सकता. जन्म से लेकर स्कूल, कॉलेज और रोजगार के लिए भरे जाने वाले तमाम दस्तावेज में इसका जिक्र होता है. नेताओं को चुनावी नामांकन में इसे बताना पड़ता है. इसके बावजूद कांग्रेस अमित शाह का और BJP राहुल गाँधी का धर्म पूछ रही है. अमित शाह या राहुल गाँधी के धर्म से देश की बेहतरी के लिए उनके नजरिये में क्या बदलाव आ जाएगा? गुजरात चुनाव के पीक पर जब बात उम्मीदवारों की छवि, आपराधिक रिकॉर्ड, उनकी सेवा भावना और प्रतिबद्धता की होनी चाहिए, बात दो नेताओं के धर्म की हो रही है. क्या गुजरात के विकास के दावे और भावी गुजरात के सपने राजधर्म नहीं?

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