VIDEO: दूषित पानी का दंश झेल रहा अल्मोड़ा

अल्मोड़ा01:42 PM IST Aug 03, 2018

उत्तराखंड में अल्मोड़ा जिले की कभी पहचान रह चुकी पारम्परिक पानी के स्त्रोत नौला शहरीकरण की भेंट चढ़ चुका है. आलम यह है कि 360 नौलों में से आज एक भी नौला शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं करा पा रहा है. ज्यादा वक्त नहीं गुजरा है जब अल्मोड़ा शहर 360 नौलों से लोगों की प्यास बुझाई जाती थी. गुणवत्ता और शुद्धता से इन नौलों के पानी को नम्बर वन मुकाम हासिल था, लेकिन पिछले ढाई दशकों में शहर कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो गया है. आज आलम यह है कि 99 फीसदी नौलों का पानी जहर से कम नहीं है. नगर पालिका की सूची में भी सिर्फ 5 दर्जन नौले ही अब पंजीकृत हैं, बाकी 300 से अधिक नौले अतिक्रमण की चपेट में हैं. नौलों पर अतिक्रमण होता रहा लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें बंद कर बैठे रहे. चेतावनी बोर्ड के बाद स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई कि कोसी नदी में सिल्ट आने के बाद पानी कहां से मिलेगा. नेचुरल मिलर्स से भरपूर नौलों का पानी बंद बोतल पानी को भी मात दे सकता है.

Kishan Joshi

उत्तराखंड में अल्मोड़ा जिले की कभी पहचान रह चुकी पारम्परिक पानी के स्त्रोत नौला शहरीकरण की भेंट चढ़ चुका है. आलम यह है कि 360 नौलों में से आज एक भी नौला शुद्ध पेयजल मुहैया नहीं करा पा रहा है. ज्यादा वक्त नहीं गुजरा है जब अल्मोड़ा शहर 360 नौलों से लोगों की प्यास बुझाई जाती थी. गुणवत्ता और शुद्धता से इन नौलों के पानी को नम्बर वन मुकाम हासिल था, लेकिन पिछले ढाई दशकों में शहर कंक्रीट के जंगल में तब्दील हो गया है. आज आलम यह है कि 99 फीसदी नौलों का पानी जहर से कम नहीं है. नगर पालिका की सूची में भी सिर्फ 5 दर्जन नौले ही अब पंजीकृत हैं, बाकी 300 से अधिक नौले अतिक्रमण की चपेट में हैं. नौलों पर अतिक्रमण होता रहा लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें बंद कर बैठे रहे. चेतावनी बोर्ड के बाद स्थानीय लोगों की चिंता और बढ़ गई कि कोसी नदी में सिल्ट आने के बाद पानी कहां से मिलेगा. नेचुरल मिलर्स से भरपूर नौलों का पानी बंद बोतल पानी को भी मात दे सकता है.

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