VIDEO: उत्तराखंड आंदोलन में खाई लाठियां, 23 साल से बिस्तर पर गुजार रहे हैं जिंदगी

उत्तराखंड01:17 PM IST Nov 09, 2018

ये हैं अमित ओबराय जो पिछले 23 साल से बेड पर हैं. गर्दन से नीचे का पूरा शरीर काम नहीं करता है. बेड पर पड़े अमित के हाथ-पैर अब टेढ़े होने लगे हैं. अमित ओबराय उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के दौरन 11 वीं के छात्र हुआ करते थे. वह मुजफ्फरनगर कांड की बरसी मनाने के लिए 2 अक्टूबर 1995 को रिस्पना पुल पर आंदोलनकारियों के साथ पहुंचे थे. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें सिर पर चोट लगने के बाद अमित पुल से नीचे गिर गए और उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई. तब से अमित बेड पर ही पड़े रहते हैं. राज्य बनने के बाद अमित को दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई थी. अब उन्हें 10,000 रूपए प्रतिमाह पेंशन भी मिलती है. 70 साल की बूढ़ी मां को अमित की दवा के साथ अपना पूरा खर्च इन्हीं पैसों में चलाना पड़ती है, जो नाकाफी हैं.

Sunil Navprabhat

ये हैं अमित ओबराय जो पिछले 23 साल से बेड पर हैं. गर्दन से नीचे का पूरा शरीर काम नहीं करता है. बेड पर पड़े अमित के हाथ-पैर अब टेढ़े होने लगे हैं. अमित ओबराय उत्तराखंड राज्य निर्माण आंदोलन के दौरन 11 वीं के छात्र हुआ करते थे. वह मुजफ्फरनगर कांड की बरसी मनाने के लिए 2 अक्टूबर 1995 को रिस्पना पुल पर आंदोलनकारियों के साथ पहुंचे थे. इस दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया, जिसमें सिर पर चोट लगने के बाद अमित पुल से नीचे गिर गए और उनकी रीढ़ की हड्डी टूट गई. तब से अमित बेड पर ही पड़े रहते हैं. राज्य बनने के बाद अमित को दो लाख रुपए की आर्थिक सहायता दी गई थी. अब उन्हें 10,000 रूपए प्रतिमाह पेंशन भी मिलती है. 70 साल की बूढ़ी मां को अमित की दवा के साथ अपना पूरा खर्च इन्हीं पैसों में चलाना पड़ती है, जो नाकाफी हैं.

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