VIDEO : झील नगरी नैनीताल में भू कटाव से डरे लोग

उत्तराखंड06:08 PM IST Sep 10, 2018

नैनीताल देश ही नहीं विदेशी लोगों के लिये हिल स्टेशन के रुप में पहली पसंद जरुर है मगर पिछले कुछ सालों से इस सरोवर नगरी में भय व्याप्त है.यह खतरा और किसी से नहीं बल्कि बलिया नाले में लगातार हो रहे भू कटाव से बना है जिससे नैनी झील के संरक्षण पर भी संकट छाने लगा है.मालरोड़ टूटने का काम अभी पूरी तरह से शुरु ही नहीं हो सका है कि यह नई मुसीबत खड़ी हो गई क्योंकि नैनीताल का भविष्य बलियानाले पर टिका है. यहां बड़े- बड़े स्रोतों से पानी का रिसाव हो रहा है तो भूस्खलन से इस हरिनगर व रईस होटल क्षेत्र में कई परिवारों पर संकट आ गया है.जिला प्रशासन की टीम सिर्फ परिवारों के विस्थापन के लिए चिन्हीकरण तक ही कर पा रही है तो भूकटाव की जद में आये 25 परिवारों को घर खाली करने के लिए चिन्हित किय गया है.हालांकि 2006 के बाद करोड़ों रुपये से यहां काम जरुर हुआ मगर वो भी पानी में ही बह गया.करीब 30-40 सालों से हो रहे इस कटाव का रुड़की की टीम ने भी गहन निरीक्षण किया मगर आज भी हालात जस के तस हैं. खतरे की जद में आये लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं और सरकार के से गुहार लगा रहे हैं.

Virendra Bisht

नैनीताल देश ही नहीं विदेशी लोगों के लिये हिल स्टेशन के रुप में पहली पसंद जरुर है मगर पिछले कुछ सालों से इस सरोवर नगरी में भय व्याप्त है.यह खतरा और किसी से नहीं बल्कि बलिया नाले में लगातार हो रहे भू कटाव से बना है जिससे नैनी झील के संरक्षण पर भी संकट छाने लगा है.मालरोड़ टूटने का काम अभी पूरी तरह से शुरु ही नहीं हो सका है कि यह नई मुसीबत खड़ी हो गई क्योंकि नैनीताल का भविष्य बलियानाले पर टिका है. यहां बड़े- बड़े स्रोतों से पानी का रिसाव हो रहा है तो भूस्खलन से इस हरिनगर व रईस होटल क्षेत्र में कई परिवारों पर संकट आ गया है.जिला प्रशासन की टीम सिर्फ परिवारों के विस्थापन के लिए चिन्हीकरण तक ही कर पा रही है तो भूकटाव की जद में आये 25 परिवारों को घर खाली करने के लिए चिन्हित किय गया है.हालांकि 2006 के बाद करोड़ों रुपये से यहां काम जरुर हुआ मगर वो भी पानी में ही बह गया.करीब 30-40 सालों से हो रहे इस कटाव का रुड़की की टीम ने भी गहन निरीक्षण किया मगर आज भी हालात जस के तस हैं. खतरे की जद में आये लोग डर के साये में जीने को मजबूर हैं और सरकार के से गुहार लगा रहे हैं.

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