VIDEO: कोटद्वार में नदी-गदेरों के पानी में बहे खेत, भूमि कटान से खतरे में 5 गांव

उत्तराखंड02:34 PM IST Aug 31, 2018

उत्तराखंड में भारी बारिश की वजह से लगातार नुकसान की ख़बर आ रही हैं. 25 अगस्त को कोटद्वार में भारी बारिश और नदियों, गदेरों के उफ़ान में आने से शहर में तो पानी घरों, दुकानों में घुसा ही था ग्रामीण इलाकों में भी भारी नुकसान हुआ है. भाभर क्षेत्र में नदियों, गदेरों के उफान में आने से खेती को भारी नुकसान हुआ है. सुखरौ नदी, तेलीश्रोत गदेरा, पनियाली गदेरे के उफान में आने से भाभर और सनेह के इलाकों में कई बीघा खेत पानी में समा गए और कई हेक्टयर खेती चौपट हो गई. भूमि कटाव के बाद नदी का रुख गांवों की ओर हो चुका है जिससे सिंबलचौड़, शक्तिचौड़, शीतलपुर, झंडिचौड़ और पदमपुर मोटाढाक इलाकों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. प्रशासन की अनदेखी से आक्रोशित लोगों का कहना है कि नदी में उनके खेत के खेत बह गए लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक सुरक्षा के कोई इंतजाम नही किए जा रहे हैं और न ही कोई अधिकारी स्थिति देखने आया है. कोटद्वार के तहसीलदार सुनील राज का कहना है कि नदियों में चेनेलाइज़िंग के जरिए नदी का रुख गांव से हटा दिया गया है और लोगों की खेती को हुए नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है. (अनुपम भारद्वाज की रिपोर्ट)

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उत्तराखंड में भारी बारिश की वजह से लगातार नुकसान की ख़बर आ रही हैं. 25 अगस्त को कोटद्वार में भारी बारिश और नदियों, गदेरों के उफ़ान में आने से शहर में तो पानी घरों, दुकानों में घुसा ही था ग्रामीण इलाकों में भी भारी नुकसान हुआ है. भाभर क्षेत्र में नदियों, गदेरों के उफान में आने से खेती को भारी नुकसान हुआ है. सुखरौ नदी, तेलीश्रोत गदेरा, पनियाली गदेरे के उफान में आने से भाभर और सनेह के इलाकों में कई बीघा खेत पानी में समा गए और कई हेक्टयर खेती चौपट हो गई. भूमि कटाव के बाद नदी का रुख गांवों की ओर हो चुका है जिससे सिंबलचौड़, शक्तिचौड़, शीतलपुर, झंडिचौड़ और पदमपुर मोटाढाक इलाकों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. प्रशासन की अनदेखी से आक्रोशित लोगों का कहना है कि नदी में उनके खेत के खेत बह गए लेकिन प्रशासन की ओर से अभी तक सुरक्षा के कोई इंतजाम नही किए जा रहे हैं और न ही कोई अधिकारी स्थिति देखने आया है. कोटद्वार के तहसीलदार सुनील राज का कहना है कि नदियों में चेनेलाइज़िंग के जरिए नदी का रुख गांव से हटा दिया गया है और लोगों की खेती को हुए नुकसान का आकलन कर रिपोर्ट तैयार की जा रही है. (अनुपम भारद्वाज की रिपोर्ट)

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