VIDEO: गंगा-यमुना की गोद में 4 हजार गांव प्यासे, पेयजल देने में भी सरकार नाकाम

उत्तराखंडOctober 31, 2017, 3:24 PM IST

भारत का वाटर टैंक कहे जाने वाले उत्तराखंड में आबादी का एक बड़ा हिस्सा अरसे से पेयजल से जूझ रहा है. मानकों के अनुसार शहरी नागरिक को हर दिन 165 जबकि ग्रामीण को 60 लीटर पानी मिलना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इन मानकों से कोसों दूर है. आलम यह है कि राज्य के 70 फीसदी शहरों को जरूरत का आधा पानी भी नही मिल पा रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी भी 91 नगरीय क्षेत्रों में से मात्र 21 को ही मानकों के मुताबिक पेयजल मिल पाता है, जबकि साढ़े चार सौ नगरीय और चार हजार गांव पेयजल से लगातार जूझ रहे हैं. पहले से ही पलायन की मार झेल रहे इस पर्वतीय प्रदेश में दो बूंद पानी के लिए भी लोग मीलों का सफर तय कर रहे हैं. ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि उत्तराखंड सरकार अपने नागरिकों को पेयजल देने में ही नाकाम साबित हो रही है.

Vijay Vardhan

भारत का वाटर टैंक कहे जाने वाले उत्तराखंड में आबादी का एक बड़ा हिस्सा अरसे से पेयजल से जूझ रहा है. मानकों के अनुसार शहरी नागरिक को हर दिन 165 जबकि ग्रामीण को 60 लीटर पानी मिलना चाहिए, लेकिन जमीनी हकीकत इन मानकों से कोसों दूर है. आलम यह है कि राज्य के 70 फीसदी शहरों को जरूरत का आधा पानी भी नही मिल पा रहा है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अभी भी 91 नगरीय क्षेत्रों में से मात्र 21 को ही मानकों के मुताबिक पेयजल मिल पाता है, जबकि साढ़े चार सौ नगरीय और चार हजार गांव पेयजल से लगातार जूझ रहे हैं. पहले से ही पलायन की मार झेल रहे इस पर्वतीय प्रदेश में दो बूंद पानी के लिए भी लोग मीलों का सफर तय कर रहे हैं. ऐसे में कहना गलत नहीं होगा कि उत्तराखंड सरकार अपने नागरिकों को पेयजल देने में ही नाकाम साबित हो रही है.

Latest Live TV