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VIDEO: कवि सम्मेलनों के जरिए पहाड़ी लोकभाषाओं को बचाने की कोशिश

उत्तराखंड News18 Uttarakhand| January 14, 2019, 2:51 PM IST

देवभूमि उत्तराखंड की लोकभाषा गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी को विलुप्त होने से बचाने के लिए लोकभाषा के कवि सम्मेलन अहम भूमिका निभा रहे हैं. जहां पहाड़ी लोकभाषाओं में होने वाले कवि सम्मेलन में कविताओं को अच्छे खासे श्रोता जुट रहे हैं, वहीं लोकभाषाओं में युवा कवियों का उभरना भी पहाड़ी लोकभाषाओं के लिए अच्छा संकेत माना जा सकता है. लोकभाषाओं के कवि सम्मेलनों में सांस्कृतिक विरासत को बचाए व संजोये रखने के सन्देश को हास्य रस के साथ प्रस्तुत करना लोगों को खूब भा रहा है. लेकिन लोकभाषा के कवि सम्मेलनों को पृथक रूप से आयोजित करवाने में सरकार की तरफ से पहल नहीं की जाती है. लोकभाषा कवियों का कहना है कि उन्हें खुद ही भाषाओं के सरंक्षण की पहल करनी होगी.

Shelendra Rawat
First published: January 14, 2019, 2:51 PM IST

देवभूमि उत्तराखंड की लोकभाषा गढ़वाली, कुमाऊंनी और जौनसारी को विलुप्त होने से बचाने के लिए लोकभाषा के कवि सम्मेलन अहम भूमिका निभा रहे हैं. जहां पहाड़ी लोकभाषाओं में होने वाले कवि सम्मेलन में कविताओं को अच्छे खासे श्रोता जुट रहे हैं, वहीं लोकभाषाओं में युवा कवियों का उभरना भी पहाड़ी लोकभाषाओं के लिए अच्छा संकेत माना जा सकता है. लोकभाषाओं के कवि सम्मेलनों में सांस्कृतिक विरासत को बचाए व संजोये रखने के सन्देश को हास्य रस के साथ प्रस्तुत करना लोगों को खूब भा रहा है. लेकिन लोकभाषा के कवि सम्मेलनों को पृथक रूप से आयोजित करवाने में सरकार की तरफ से पहल नहीं की जाती है. लोकभाषा कवियों का कहना है कि उन्हें खुद ही भाषाओं के सरंक्षण की पहल करनी होगी.

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