VIDEO: अचानक घरों पर गिरने लगे बोल्डर और जान बचाकर भागे लोग

उत्तराखंड03:28 PM IST Aug 30, 2018

उत्तरकाशी में वरुणाव्रत पर्वत के फिर से भूस्खलन को लेकर सक्रिय होने के बाद हड़कंप मच गया है. बुधवार को वरुणाव्रत पर्वत के तांबाखानी शूट से इंदिरा कॉलोनी के मकानों में बड़े-बड़े बोल्डर गिरने लगे. सूचना मिलते ही आपदा राहत दल मौके पर पंहुचा और गंगोत्री हाईवे को बाजार चौकी के पास बंद कर दिया. प्रशासन ने कॉलोनी के बीस घरों को खाली करवा दिया है. इसके साथ ही वरुणावत पर्वत के तांबाखाणी की साइड वाले हिस्से के ट्रीटमेंट के लिए शासन से 6.62 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए गए हैं. इस कार्य को प्रशासन ने फेज़-टू नाम दिया गया है. वरुणावत पर्वत सितंबर 2003 में दरकना शुरू हुआ था. लगातार तीन माह यह पर्वत दरकता रहा. इस पर्वत के दरकने से उत्तरकाशी का भूगोल ही बदल गया. इसके ट्रीटमेंट के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 282 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे. वर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2008 तक इस पर्वत का ट्रीटमेंट किया गया था. वरुणावत का ट्रीटमेंट करने वाली कार्यदायी संस्था ने ड्रेनेज की कोई व्यवस्था नहीं की, जिसके कारण वर्ष 2015 में वरुणावत फिर दरकने लगा. निरीक्षण टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अगर तांबाखाणी की साइड से ट्रीटमेंट नहीं किया गया, तो तांबाखाणी सुरंग को भी नुकसान पहुंच सकता है. यह आशंका सही साबित हुई और बुधवार को वरुणाव्रत फिर दरकने लगा. न्यूज़ 18 संवाददाता हरीश थपलियाल ने मौके से स्थिति का जायज़ा लिया.

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उत्तरकाशी में वरुणाव्रत पर्वत के फिर से भूस्खलन को लेकर सक्रिय होने के बाद हड़कंप मच गया है. बुधवार को वरुणाव्रत पर्वत के तांबाखानी शूट से इंदिरा कॉलोनी के मकानों में बड़े-बड़े बोल्डर गिरने लगे. सूचना मिलते ही आपदा राहत दल मौके पर पंहुचा और गंगोत्री हाईवे को बाजार चौकी के पास बंद कर दिया. प्रशासन ने कॉलोनी के बीस घरों को खाली करवा दिया है. इसके साथ ही वरुणावत पर्वत के तांबाखाणी की साइड वाले हिस्से के ट्रीटमेंट के लिए शासन से 6.62 करोड़ रुपये स्वीकृत कर दिए गए हैं. इस कार्य को प्रशासन ने फेज़-टू नाम दिया गया है. वरुणावत पर्वत सितंबर 2003 में दरकना शुरू हुआ था. लगातार तीन माह यह पर्वत दरकता रहा. इस पर्वत के दरकने से उत्तरकाशी का भूगोल ही बदल गया. इसके ट्रीटमेंट के लिए तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने 282 करोड़ रुपये स्वीकृत किए थे. वर्ष 2004 से लेकर वर्ष 2008 तक इस पर्वत का ट्रीटमेंट किया गया था. वरुणावत का ट्रीटमेंट करने वाली कार्यदायी संस्था ने ड्रेनेज की कोई व्यवस्था नहीं की, जिसके कारण वर्ष 2015 में वरुणावत फिर दरकने लगा. निरीक्षण टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि अगर तांबाखाणी की साइड से ट्रीटमेंट नहीं किया गया, तो तांबाखाणी सुरंग को भी नुकसान पहुंच सकता है. यह आशंका सही साबित हुई और बुधवार को वरुणाव्रत फिर दरकने लगा. न्यूज़ 18 संवाददाता हरीश थपलियाल ने मौके से स्थिति का जायज़ा लिया.

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