कौन सी कार खरीदते थे भारतीय महाराजा

1908 से 1939 के बीच भारत में 900 से ज्यादा रोल्स रॉयस
कारें थीं.

ये सभी कारें 230 भारतीय महाराजाओं द्वारा खरीदी गईं थीं.

पहले विश्व युद्ध से पहले 20 फीसदी ये कारें भारत में बिककर आईं.

लंदन में रोल्स रॉयस ने भारतीय राजाओं के लिए अलग शोरूम ही खोल दिया था.

महाराजा मैसूर ने एक बार 28 कारें एक साथ खरीदीं.

महाराजा नाभा ने अपनी कार को बत्तख की शक्ल दे दी.

1920 में एक रोल्स रॉयस कार की कीमत 18000 रुपए थी.

हैदराबाद के निजाम के पास 50 से ज्यादा रोल्स रॉयस कारें थीं.

महाराजा पटियाला ने रोल्स रॉयस कार को हीरे-जवाहरात
से जड़वाया था.

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