मानसिक रोगियों को बिजली का झटका
क्यों देते हैं

हैरानी होती है कि बिजली के झटके से
कैसे इलाज होता होगा.

गंभीर डिप्रेसन और स्कीजोफ्रेनिया में बिजली का झटका देते हैं.

वैसे इसके असर को पूरी तरह समझा नहीं जा सका है.

 पहली बार 1938 में इस थेरेपी का इस्तेमाल किया गया.

पागलपन और कई तरह के डिप्रेशन
में इसकी मदद.

इसमें सिर पर दो इलेक्ट्रोड लगाकर
करंट दिया जाता है.

करंट का पॉवर 50-60 हर्ट्ज होता है,
ये 0.1 सेकेंड के लिए देते हैं.

इससे चेतना में ठहराव आता है, जो रिकवरी में मददगार होता है.

हालांकि कई बार ये रोग को और
बिगाड़ भी सकता है.

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