केसरिया बालम ककड़ी ने देशभर में मचाई धूम

यूँ तो आपने कई ककड़ियाँ खाई होंगी लेकिन मध्यप्रदेश के ज़िले रतलाम की ककड़ी का जादू ही अलग है. 

रातलम की केसरिया बालम ककड़ी के स्वाद का जादू पूरे देश में छाया हुआ है.  लोग इस ककड़ी को लेने काफ़ी दूर से आया करते हैं. 

यह ककड़ी सऊदी अरब और कुवैत जैसे देशों में भी भेजी जाती है. 

आपको बता दें, ये ककड़ी साल में सिर्फ दो माह के लिए ही उगाई जाती है. उन दो माह में लोग ज़्यादातर भोजन को छोड़कर इसे ही खाना पसंद करते हैं.

इस ककड़ी की खेती मध्य प्रदेश के रातलम, झाबुआ और धार में बड़ी मात्रा में की जाती है. वहीं रातलम के गाँव ‘वाली’ को इसका गढ़ कहा जाता है. 

मध्य प्रदेश के बाद अब राजस्थान के गोंगुदा, कुंभलगढ़, भीम और देवगढ़ में भी इसकी खेती प्रमुखता से की जा रही है.

आपको बता दें, इस ककड़ी के बीज को बारिश शुरू होने से पहले बोया जाता है. और मानसून के ख़त्म होते ही इसकी खेप बाजारों में बिकने लगती है.

बालम ककड़ी बाहरी रूप से हरी और अंदर से केसरिया रंग की होती है. यही वजह है कि इसका नाम केसरिया बालम ककड़ी रखा गया. 

बालम ककड़ी का उत्पाद राजस्थान में 500 टन व मध्य प्रदेश में 700 टन में किया जाता है

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