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बायोपिक के नाम पर ‘अजहर’ में परोसे गए 30 बड़े झूठ, हीरो बनने के चक्कर में हिट विकेट हुआ ये पूर्व कप्तान!

भारतीय टीम के पूर्व कप्‍तान मोहम्‍मद अजहरुद्दीन के क्रिकेट लाइफ में मैच फिक्‍सिंग के आरोपों पर बनी फिल्‍म अजहर, दुनिया की ऐसी पहली बायोपिक है, जिसमें इतना झूठ दिखाया गया है, उतना आज तक किसी फिल्‍म में नहीं दिखाया गया..!

बायोपिक के नाम पर ‘अजहर’ में परोसे गए 30 बड़े झूठ, हीरो बनने के चक्कर में हिट विकेट हुआ ये पूर्व कप्तान!

पूरी दुनिया की फिल्म इंडस्ट्री में शायद ही कभी अजहर से पहले कोई ऐसी बायोपिक बनी होगी, जिसमें इतने झूठ दिखाए गए हों। 2 घंटे 5 मिनट लंबी अजहर फिल्म रिलीज होने के कई दिनों बाद देखी। बाकी लोगों की तरह मुझे भी ये जानने की उत्सुकता थी कि इस फिल्म में कितनी सच्चाई दिखाई गई है। लेकिन फिल्म देखकर हैरत हुई। इस फिल्म में जितना सच दिखाया गया है, उससे कई गुना ज्यादा सच छुपाया गया है। कई तथ्यों को तो पूरी तरह से गलत दिखाया है।

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दरअसल, फिल्म में झूठ को सच और गुनहगार को हीरो दिखाने की भरपूर कोशिश की गई है। कुछ चीजें तो इस फिल्म में ऐसी दिखाई गई है, जिन पर अगर भगवान भी आकर कहें तो मैं भरोसा ना करूं। क्योंकि आईसीएल के कुछ मैचों में मुंबई में मैंने जो कुछ अपनी आंखों से देखा और कानों से सुना है, वो पूरी सच्चाई या तो डायरेक्टर को पता ही नहीं थी या फिर जानबूझकर दिखाया ही नहीं गया।

इस फिल्म में दिखाए गए तथ्यों पर भरोसा कर पाना कम से कम मेरे जैसे उन सभी पत्रकारों के लिए तो असंभव ही है, जिन्होंने बहुत कुछ अपनी आंखों से देखा। ये वैसे ही है जैसे कि पार्टी के शौकिन क्रिस गेल को दिखाया जाए कि उसे पार्टियों और लड़कियों से नफरत है। इस पूरी फिल्म में ये तो अजहर ने मान ही लिया कि उन्होंने मैच फिक्सिंग की थी और पैसे भी लिए थे। लेकिन वो कई बड़े राज छुपा गए।

1-अजहर पर तीन मैचों में मैच फिक्सिंग का आरोप लगा था। पहला मैच टाइटन कप में (राजकोट-1996) भारत बनाम दक्षिण अफ्रीका था, जिसमें अजहर ने 9 रन बनाए और टीम इंडिया ये मैच 5 विकेट से हार गई। दूसरा मैच एशिया कप में (कोलंबो-1997) भारत बनाम श्रीलंका था, जिसमें अजहर ने 81 रन बनाए और भारत 8 विकेट से मैच हारा। तीसरा मैच पेप्सी कप में (जयपुर-1999) भारत बनाम पाकिस्तान था, जिसमें अजहर ने एक रन बनाया और भारत 143 रन से ये मैच हार गया। फिल्म में इन तीनों में से कोई भी मैच नहीं दिखाया गया और ना ही अजहर का प्रदर्शन।

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2-फिल्म में लंदन में 1998 में भारत बनाम श्रीलंका मैच दिखाया गया है। ये इस फिल्म में दिखाया गया सबसे बड़ा झूठ है। वन डे क्रिकेट के इतिहास में भारत ने श्रीलंका के खिलाफ इंग्लैंड में आजतक सिर्फ 1 ही मैच खेला है, जिसमें अजहरूद्दीन शामिल रहे थे। अजहर ने उसमें नाबाद 12 रन बनाए थे। जबकि फिल्म में इस मैच में अजहर का 94 रनों का स्कोर दिखाया गया।

3-इसी मैच में यानी 1998 में ही नवजोत सिंह सिद्धू को कमेंट्री करते दिखाया गया है। जबकि सच्चाई ये है कि सिद्धू 1999 तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलते रहे और 2001 में श्रीलंका दौरे से सिद्धू ने कमेंट्रेटर के तौर पर अपनी पारी की शुरुआत की।

4-फिल्म में भारत बनाम वेस्ट इंडीज के बीच भी 1996 में कानपुर में एक मैच दिखाया गया है। जबकि ये मैच 1994 में हुआ था और खुद अजहर ने इसमें घटिया शॉट खेलकर 34 गेंदों में 26 रन बनाए थे। जबकि प्रभाकर ने नाबाद शतक लगाया था।

5-झूठ के पुलिंदे से भरी इस फिल्म में फिर से एक और झूठ दिखाया गया। बताया गया कि 1996 में कोलकाता में भारत बनाम वेस्ट इंडीज मैच हुआ, जिसमें अजहर शानदार प्रदर्शन करते हुए मैन ऑफ द मैच भी बने। लेकिन असलियत में ऐसा कोई मैच उस साल हुआ ही नहीं। उस साल तो विश्व कप 1996 का भारत बनाम वेस्ट इंडीज मैच ग्वालियर में हुआ था, जिसमें सबसे ज्यादा रन सचिन तेंदुलकर ने (70 रन) बनाए थे जबकि अजहर ने सिर्फ 32 रन बनाए थे।

6-अगर आप इंटरनेट पर थोड़ी भी रिसर्च करेंगे, तो आपको पूर्व क्रिकेटर और टीम इंडिया के कोच अंशुमन गायकवाड़ का एक इंटरव्यू मिल जाएगा। जिसमें बताया गया है कि उस समय टीम इंडिया के मैनेजर वेंकट सुंदरम को एक अंजान शख्स ने फोन करके पहले ही बता दिया था कि भारतीय क्रिकेट टीम श्रीलंका के खिलाफ मैच जानबूझकर हार जाएगी। जब कोच अंशुमन गायकवाड़ को इस फोन कॉल के बारे में पता चला और उन्होंने इस बारे में अजहर से बात की, तो अजहर ने कहा कि क्या हम मैच हार गए हैं? यानी मैच फिक्स होने की बात पहले ही लीक हो चुकी थी, इसलिए संभवतः अजहर ने उस मैच में खराब खेलने के बजाय और अच्छा खेला और फिर फिल्म में अजहर को बुकी को मैच फिक्सिंग के पैसे वापस करते हुए दिखाकर महान दिखाने की नाकाम कोशिश की गई।

7-इस फिल्म के जरिए अपनी खराब इमेज को चमकाने के लिए अजहर ने अपने दिवंगत नाना को भी नहीं बख्शा। फिल्म में दिखाया गया कि South Zone और West Zone के बीच मैच के दौरान उनके नाना जी गुजर गए और वो वापस नहीं गए और मैच खेला क्योंकि सेलेक्टर वहां सेलेक्शन के लिए आए हुए थे। जबकि सच्चाई ये है कि ये मैच India under 25 और England Xi के बीच 1984 में खेला गया था और इसमें खुद कप्तान रवि शास्त्री ने अजहर को घर जाने के बजाय मैच खेलने के लिए कहा था।

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8-संगीता को शूटिंग से मीडिया से बचाकर भगाने वाले सीन का सचः  फिल्म में दिखाया गया कि एड की शूटिंग के दौरान दोनों के बीच रिश्ते दोस्त कहलाने लायक भी नहीं थे। दोनों एक दूसरे को नापसंद करते थे और शूटिंग के दौरान ही मीडिया के कुछ तीखे सवालों से संगीता बिजलानी असहज महसूस करने लगती हैं और इसी बीच अजहर हीरो की तरह आते हैं और उनको मीडिया से बचाकर ले जाते हैं। लेकिन सच्चाई कुछ और ही है।

दरअसल, मैच फिक्सिंग केस के खुलासे से कुछ साल पहले 1997 में वरिष्ठ खेल पत्रकार प्रदीप मैग्जीन को पायोनियर अखबार के लिए अजहर ने एक इंटरव्यू दिया है, जिसमें इस घटना के बारे में फिल्म में दिखाए गए सीन का बिल्कुल उल्टा ही बताया गया है। दरअसल, ये वो दौर था जब अजहर-बिजलानी की नजदीकियां दुनिया से नजर बचाते हुए बढ़ रही थीं। ऐसे में 1996 में बैंगलोर में एक फोटोग्राफर ने दोनों को एक साथ देखकर कुछ फोटो क्लिक कीं, लेकिन ये देखकर अजहर ने फोटोग्राफर के साथ मारपीट कर डाली।

9-फिल्म में बुकी एम के शर्मा को मार्शल नाम के शख्स से बात करते और फिर उसके लिए अजहर के जरिए मैच फिक्स करने की डील करते हुए दिखाया गया है। लेकिन ये मार्शल असलियत में कौन था, इसे छुपा लिया गया। क्या ये अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम था या फिर कोई और डॉन था? क्या किसी नए पचड़े में पड़ने से बचने के लिए यहां इस तथ्य को भी छुपाया या बदलकर दिखाया गया है।

10-मार्शल से मिलने के बाद बुकी एम के शर्मा जिस शख्स से रेसकोर्स पर मिला, वो कौन था। उसका क्या नाम था... उसकी टी शर्ट पर J शब्द लिखा था। जब क्रिकेटर रवि शास्त्री पर खुलेआम उंगलियां उठा दी गईं, तो फिर J सरनेम वाले इस शख्स का नाम बताने से डर क्यों गए फिल्म मेकर।

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11-फिल्म में दिखाया गया कि सीबीआई थर्ड डिग्री इस्तेमाल करने के बावजूद बुकी एम के शर्मा से मैच फिक्सिंग का पूरा सच नहीं उगलवा पाई, लेकिन वकील मीरा ने सिर्फ एक ही डायलॉग बोलकर बुकी को पूरा राज बताने को राजी कर लिया। ये कोई काल्पनिक कहानी पर आधारित फिल्म नहीं थी। बल्कि बायोपिक थी। इसलिए ये सब हजम होने वाली बातें नहीं हैं। वो पूरा सच दिखाना चाहिए था। फिर बेशक फिल्म 2 घंटे की बजाय 3 या साढ़े 3 घंटे की बनती।

12-इस फिल्म में माधवन रिपोर्ट का हिस्सा तो बताया ही नहीं गया जो कि मैच फिक्सिंग केस का सबसे अहम हिस्सा है। रिपोर्ट में सवाल उठाया गया था कि 1991-92 की सालाना कमाई सिर्फ 4 लाख 90 हजार रुपये थे जबकि अगले ही एक साल में ये कमाई 6 गुना बढ़कर 23 लाख 48 हजार रुपये हो गई। फिर अगले एक साल में यही कमाई बढ़कर 36 लाख के पार पहुंच गई और 1994-95 में 1 करोड़ रुपये सालाना। तब तो आज की तरह विश्व रिकॉर्ड बनाने वाली स्पॉन्सरशिप डील्स भी नहीं होती थीं।

13-फिल्म में ये तो दिखाया गया कि कपिल देव ने अजहर से मिलने से मना कर दिया और फिर एक दशक बाद कपिल को अपनी गलती मानते दिखाया गया, लेकिन ये नहीं दिखाया गया कि बीबीसी को दिए एक इंटरव्यू में कपिल देव क्यों रोए थे। क्या वो अजहर की वजह से रोए थे?

14-फिल्म में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अजहर को गलत ढंग से LBW आउट होते दिखाया गया है जबकि अजहर कभी भी दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ किसी मैच में गलत ढंग से LBW आउट हुए ही नहीं।

15-फिल्म में बताया गया कि केस का खुलासा बुकी द्वारा अजहर का नाम लिए जाने से हुआ था, जबकि असलियत में खुलासा हैंसी क्रोनिए ने अपने कबूलनामे में किया था।

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16-रिबन कटिंग का सीन तो दिखाया गया, लेकिन वो दौर तो अजहर का दिखाया ही नहीं गया जब वो क्रिकेट मैच फिक्सिंग केस में फंसने के करीब 6-7 साल बाद भी मीडिया के कैमरों से छुपते भागते थे और पर्दे के पीछे रहते हुए क्रिकेट की मुख्य धारा से वापस जुड़ने के लिए मुंबई के सीसीआई क्लब में दिवंगत क्रिकेट प्रशासक राज सिंह डूंगरपुर की मदद लेने में लगे हुए थे।

यही नहीं बल्‍कि वो दौर भी दिखाया ही नहीं गया, जब अजहरूद्दीन पैसे की तंगी दूर करने के लिए सीसीआई क्लब (मुंबई का ब्रेबॉर्न स्टेडियम) पर कुछ विदेशी क्रिकेटरों को बल्लेबाजी के टिप्स दिया करते थे। इस बात का गवाह मैं खुद रहा हूं। उस समय मैं जी न्यूज में था और मेरे कैमरामैन को खुद को शूट करते देख, अजहरूद्दीन ने हमारा कैमरा बंद करवा कर वहां से हमको हटवा दिया था। वो फुटेज आज भी जी न्यूज की लाइब्रेरी में मिल जाएगी।

Mohammed Azharuddin At The Closing Ceremony Of Sports Medcon In New Delhi

17-1999 का मैच जिसमें पाकिस्तान के खिलाफ मैच फिक्सिंग का आरोप था, उस पर भी कुछ नहीं दिखाया गया। क्योंकि उसमें अज्जू मियां ने सिर्फ एक रन ही बनाया था।

18-फिल्म में अगर मैच फिक्सिंग के समय मीडिया में कवरेज की असली क्लिपिंग या न्यूजपेपर्स की असली खबरों को दिखाया गया होता तो फिल्म ज्यादा रिअलिस्टिक लगती।

19-फिल्म की शुरुआत से ही ये दिखाया गया कि अजहर मैच फिक्सिंग में गलत तरीके से फंसे। लेकिन ये नहीं दिखाया गया कि कप्तान बनने के बाद अजहर की शानौशौकत वाली जिंदगी कैसी थी, कैसे वो शारजाह में होने वाले टूर्नामेंटों के दौरान किसी राजा जैसी जिंदगी जीते थे। सिर्फ महंगी घड़ी वाला एक सीन दिखाया गया। शायद डर रहा होगा कि कहीं पूरी सच्चाई सामने ना आ जाए।

20-ये भी नहीं दिखाया गया कि अजहरूद्दीन ने बीसीसीआई से लाइफ टाइम बैन होने के बाद जीवन जीने के लिए जरूरी कमाई के लिए क्या किया।

21-ये भी नहीं दिखाया गया कि संगीता बिजलानी के लिए अजहर ने अपनी पहली पत्नी नौरीन के साथ तलाक के लिए एक करोड़ पर सेटलमेंट किया। ये उस दौर में देश का सबसे महंगा तलाक था।

22-मैच फिक्सिंग में फंसने के बाद अजहर का गाड़ी और बंगला कैसे बिक गया, वो भी सच छुपाया गया। Sleek silver convertible Mercedes, 320D सिर्फ 42 हजार डॉलर में बेचना पड़ गई थी। देश की एक बहुत नामचीन वीकली मैगजीन ने तो मैच फिक्सिंग केस के कुछ महीनों बाद कवर स्टोरी छापी थी, जिसमें अजहर की महंगी कारों और बंगले के बिकने का पूरा ब्यौरा दिया था।

23-मैच फिक्सिंग से जुड़े अंडरवर्ल्ड के खेल को तो फिल्म से ऐसे गायब किया गया जैसे गधे के सिर से सींग।

24-फिल्म की स्क्रिप्टिंग में देश की जनसंख्या को लेकर एक बड़ी गलती की गई है। फिल्म में बताया गया कि जब अजहरूद्धीन कप्तान बने तब भी देश की जनसंख्या 100 करोड़ थी (जबकि असलियत में लगभग 82 करोड़ थी) और जब करीब 25 साल बाद कोर्ट केस खत्म होने वाला था तब भी देश की जनसंख्या 100 करोड़ बताई गई (जबकि असलियत में ये 120 करोड़ के लगभग थी।) बायोपिक में ऐसी गलतियां स्वीकार नहीं की जातीं।

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25-एक सीन में दिखाया गया कि अजहर को एक बल्लेबाज ने ड्रेसिंग रूम में जवाब दिया कि मुझे धीरे खेलने के लिए अंदर से निर्देश मिले थे, लेकिन ये नहीं बताया कि निर्देश देने वाला कौन था। कुछ सीन्स के बाद इसी डायलॉग को उल्टा बोलते हुए इमरान हाशमी यानी अजहर को दिखाया जाता है कि धीरे खेलने के लिए कोच और कप्तान ने बोला था। ये विरोधाभासी बयान क्यों? दिखाने से ज्यादा सच को छुपा दिया गया।

26-ये कैसे पता चला कि संगीता बिजलानी का होटल में रूम नंबर क्या है। खिलाड़ियों के साथ बातचीत के दौरान कमरे का नंबर तो बिल्कुल भी नहीं बताया गया था। खैर जो भी हो, लेकिन इस फिल्म ने ये साबित तो कर ही दिया कि खिलाड़ियों की रात रंगीन कैसे होती है।

27-ये सच भी छुपा गए कि क्या हैंसी क्रोनिए से बुकी शर्मा की मुलाकात अजहर ने करवाई थी या नहीं।

28-कोर्ट में जिरह के दौरान दलीलें बहुत कमजोरी के साथ पेश की गईं।.... सबूतों को तो दिखाया ही नहीं गया... हैंसी क्रोनिए से जुड़ी कोई बात नहीं बताई गई..... ऐसा लग रहा था जैसे फिल्म में कोर्ट का हिस्सा सच्चाई दिखाने से ज्यादा सच्चाई छुपाने में लगा हुआ था।

29-फिल्म में बुकी का नाम एम के शर्मा दिखाया गया है जबकि असलियत में उसका नाम एम के गुप्ता है। जब बायोपिक बनाई जा रही है तो फिर केस से जुड़े लोगों के नाम बदलकर क्या साबित करने की कोशिश हुई है।

30-श्रीलंका वाले मैच में जिसमें अजहर ने मैच फिक्स करने के लिए एक करोड़ रुपये लिए थे, लेकिन फिर बड़ा स्कोर करने के बाद वापस कर दिए, उसमें फिल्म में दिखाया गया कि अजहर ने जानबूझकर गलत बॉलर को बॉलिंग दी, जानबूझकर खराब फील्डिंग की, बेशक फिर बल्लेबाजी करते समय उसका मन बदल गया और रन बना डाले। लेकिन क्या ये गुनाह नहीं है। अगर है, तो फिर कैसे विलेन को हीरो बनाया जा सकता है। डायरेक्टर को कुछ तो सोचना चाहिए था फिल्म बनाने से पहले।

Mohammed Azharuddin of India batting

कुछ सीन जिनपर भरोसा करना मुश्किल है।

1-जिस तरह से जिम के उदघाटन पर अजहर को शर्मिंदा ­होते हुए दिखाया गया है वो तो बिल्कुल ही असंभव है। ऐसा कोई क्लाइंट कर जाए और अजहर या फिर कोई क्रिकेटर सुन ले, ये संभव नहीं। अगर ऐसा हो जाए और उस पर मीडिया में हंगामेदार कवरेज ना मिले, ये संभव नहीं। लेकिन ये जरूर संभव है कि जो खिलाड़ी पैसे के लिए देश के खिलाफ मैच फिक्स कर सकता है वो पैसों के लिए किसी की गालियां भी खा सकता है।

हालांकि सच्चाई ये है कि अजहर के पास पैसे की इतनी तंगी थी कि उनको जिम को लांच करके पैसे की कमी को पूरा करना था, ना कि वो अपनी इमेज चमकाना चाहते थे। अगर छवि चमकानी होती, तो उस समय कुछ टीवी चैनलों ने 2007 विश्व कप के लिए अजहर को लेना चाहा, लेकिन वो छुपते रहे।

2-क्या वाकई में नौरीन कोर्ट में आई थीं और वो भी संगीता बिजलानी के साथ, क्योंकि नौरीन तो कनाडा में रहने वाले एक भारतीय व्यापारी से बहुत पहले ही शादी करके सैटल हो चुकी थीं।

3-क्या वाकई में टीम के बाकी खिलाड़ियों ने मनोज प्रभाकर पर नहाते समय सिद्धू ने रॉकेट छोड़ा था। जब मौका मिलेगा तो मनोज प्रभाकर और सिद्धू से जरूर पूछूंगा ये सवाल। फिलहाल तो इस पर भरोसा कर पाना मुश्किल ही है।

4-क्या वाकई में संगीता बिजलानी और अजहरूद्धीन ने कभी एक साथ कोई एड किया था? इंटरनेट पर तो काफी खोजबीन के बाद भी कोई जानकारी नहीं मिली।

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इस फिल्म ने अजहर की इमेज को क्लीन करने के बजाय और ज्यादा खराब कर दिया है। 21वीं सदी की जिस पीढ़ी को ये पता नहीं था कि अजहर ने वाकई में कभी मैच फिक्सिंग के लिए पैसे लिए थे, अब उनको भी पता चल गया है कि अजहर ने कम से कम पैसे तो ले ही लिए थे फिर बेशक उसने वापस करके हीरो बनने का ड्रामा किया हो।

फिल्म के अंत में ये तो बिल्कुल भी नहीं दिखाया गया कि आज के दौर में कौन कहां है, जैसे पहली बीवी, दूसरी बीवी और बुकी शर्मा इत्यादि। कैसे वो कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़े और जीते। ऐसा लगता है कि मानो अजहरूद्दीन इस फिल्म के जरिए सिर्फ सफाई देना चाह रहे हों कि उन्होंने मैच फिक्स करने के लिए पैसे तो लिए, लेकिन फिर मैच फिक्स ना करके अच्छा प्रदर्शन किया और पैसे वापस कर दिए।

दुनिया में कुछ गुनाह ऐसे हैं जिनको साबित करने के लिए किसी सबूत की जरूरत नहीं होती और कुछ गुनाह ऐसे होते हैं जिनको कोर्ट में कानून की पेचीदगियों की वजह से कभी साबित नहीं किया जा सकता। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि गुनाह करने वाले के दामन से गुनाह के दाग साफ हो जाएंगे।

(इस लेख के विचार पूर्णत: निजी हैं , एवं आईबीएन खबर डॉट कॉम इसमें उल्‍लेखित बातों का न तो समर्थन करता है और न ही इसके पक्ष या विपक्ष में अपनी सहमति जाहिर करता है। इस लेख को लेकर अथवा इससे असहमति के विचारों का भी आईबीएन खबर डॉट कॉम स्‍वागत करता है । इस लेख से जुड़े सभी दावे या आपत्ति के लिए सिर्फ लेखक ही जिम्मेदार है। आप लेख पर अपनी प्रतिक्रिया  blogibnkhabar@gmail.com पर भेज सकते हैं। ब्‍लॉग पोस्‍ट के साथ अपना संक्षिप्‍त परिचय और फोटो भी भेजें।)

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)