स्ट्रॉबेरी मल्चिंग के लिए सही माइक्रोन, मल्च की गुणवत्ता, बढ़ाएगी उत्पादकता, डॉ. प्रमोद ने बताया कैसे करें चुनाव
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Strawberry Mulching Method: स्ट्रॉबेरी की खेती में मल्चिंग तकनीक का बहुत महत्व होता है. सही माइक्रोन का चयन कैसे करते हैं, इसके सेलेक्शन के समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए. जानते हैं एक्सपर्ट डॉक्टर प्रमोद कुमार से.
पलामू. स्ट्रॉबेरी की खेती में मल्चिंग एक बेहद महत्वपूर्ण तकनीक मानी जाती है. मल्च के इस्तेमाल से न केवल फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि खरपतवार नियंत्रण, नमी संरक्षण और तापमान संतुलन में भी मदद मिलती है. खासकर स्ट्रॉबेरी जैसी नाजुक और जमीन से संपर्क में रहने वाली फसल के लिए मल्च का सही चयन और सही माइक्रोन का इस्तेमाल किसानों के लिए काफी फायदेमंद साबित होता है.
कैसे होता है सही मोटाई वाले माइक्रोन का चयन
स्ट्रॉबेरी की खेती में आमतौर पर 25 माइक्रोन मोटाई वाले प्लास्टिक मल्च का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है. यह मल्च मध्यम से लंबी अवधि की फसल के लिए उपयुक्त माना जाता है. यदि किसान तीन महीने की कम अवधि वाली फसल ले रहे हैं, तो 20 माइक्रोन मोटाई का मल्च भी इस्तेमाल किया जा सकता है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि जितनी अधिक अवधि की फसल होगी, उतनी ही अधिक माइक्रोन मोटाई वाले मल्च का चयन करना चाहिए, ताकि पूरे फसल काल में मल्च सुरक्षित और प्रभावी बना रहे.
स्ट्रॉबेरी की खेती में आमतौर पर 25 माइक्रोन मोटाई वाले प्लास्टिक मल्च का सबसे अधिक उपयोग किया जाता है. यह मल्च मध्यम से लंबी अवधि की फसल के लिए उपयुक्त माना जाता है. यदि किसान तीन महीने की कम अवधि वाली फसल ले रहे हैं, तो 20 माइक्रोन मोटाई का मल्च भी इस्तेमाल किया जा सकता है. कृषि विशेषज्ञ डॉ. प्रमोद कुमार ने बताया कि जितनी अधिक अवधि की फसल होगी, उतनी ही अधिक माइक्रोन मोटाई वाले मल्च का चयन करना चाहिए, ताकि पूरे फसल काल में मल्च सुरक्षित और प्रभावी बना रहे.
मल्च के चयन के समय सबसे जरूरी क्या है
मल्च का चयन करते समय सबसे जरूरी बात उसकी गुणवत्ता होती है. अच्छी गुणवत्ता वाला मल्च आसानी से फटता नहीं है और पूरे सीजन तक मिट्टी को ढककर रखता है. 25 माइक्रोन मोटाई वाला लगभग 400 मीटर का मल्च बाजार में करीब 1500 रुपये तक में उपलब्ध होता है. हालांकि, सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं के तहत किसानों को मल्च पर सब्सिडी भी दी जाती है, जिससे इसकी लागत काफी हद तक कम हो जाती है.
मल्च का चयन करते समय सबसे जरूरी बात उसकी गुणवत्ता होती है. अच्छी गुणवत्ता वाला मल्च आसानी से फटता नहीं है और पूरे सीजन तक मिट्टी को ढककर रखता है. 25 माइक्रोन मोटाई वाला लगभग 400 मीटर का मल्च बाजार में करीब 1500 रुपये तक में उपलब्ध होता है. हालांकि, सरकार की विभिन्न कृषि योजनाओं के तहत किसानों को मल्च पर सब्सिडी भी दी जाती है, जिससे इसकी लागत काफी हद तक कम हो जाती है.
एक नहीं कई फायदे
मल्च के इस्तेमाल से खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है. इसके साथ ही मल्च मिट्टी को सीधे धूप से बचाता है, जिससे जड़ों का तापमान संतुलित रहता है. स्ट्रॉबेरी के फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, जिससे सड़न और बीमारी की संभावना भी कम हो जाती है और फल साफ, चमकदार और बाजार के अनुरूप बनते हैं.
मल्च के इस्तेमाल से खेत में नमी लंबे समय तक बनी रहती है, जिससे सिंचाई की जरूरत कम पड़ती है. इसके साथ ही मल्च मिट्टी को सीधे धूप से बचाता है, जिससे जड़ों का तापमान संतुलित रहता है. स्ट्रॉबेरी के फल जमीन के संपर्क में नहीं आते, जिससे सड़न और बीमारी की संभावना भी कम हो जाती है और फल साफ, चमकदार और बाजार के अनुरूप बनते हैं.
सावधानी जरूरी
मल्च बिछाते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. खेत की अच्छी तरह जुताई और समतलीकरण के बाद बेड तैयार किए जाते हैं. इसके बाद मल्च को कसकर बिछाया जाता है, ताकि हवा से वह उड़े नहीं. पौध रोपण के लिए सही दूरी पर छेद किए जाते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर हो सके.
मल्च बिछाते समय सावधानी बरतना बेहद जरूरी है. खेत की अच्छी तरह जुताई और समतलीकरण के बाद बेड तैयार किए जाते हैं. इसके बाद मल्च को कसकर बिछाया जाता है, ताकि हवा से वह उड़े नहीं. पौध रोपण के लिए सही दूरी पर छेद किए जाते हैं, जिससे पौधों की बढ़वार बेहतर हो सके.
कुल मिलाकर, स्ट्रॉबेरी की खेती में सही माइक्रोन के मल्च का चयन उत्पादन और मुनाफा बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. अगर किसान फसल की अवधि, लागत और गुणवत्ता को ध्यान में रखकर मल्च का उपयोग करें, तो उन्हें बेहतर उपज के साथ बाजार में अच्छी कीमत भी मिल सकती है.
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Raina Shukla
बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की ...और पढ़ें
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