गर्मी से तबाह हो जाएगा आर्कटिक, बर्फ होंगे गायब - जंगल भी खतरे में, वैज्ञानिकों ने दी चेतावनी!
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नई स्टडी में वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि हमारा गर्म होता ग्रह खतरनाक हद पार कर सकता है. इसकी वजह से आर्कटिक पूरी तरह बदल सकता है. तबाही का आलम ऐसा होगा कि 4.9 डिग्री फारेनहाइट की बढ़ोतरी से बर्फ गायब होगी और जंगल खतरे में पड़ेंगे, जिसने वैज्ञानिकों को हैरान कर दिया.

हमारी धरती पर गर्मी का कहर बढ़ता जा रहा है. इस बीच एक नई स्टडी ने ऐसा खुलासा किया है कि दुनिया के सामने डरावना सच सामने आ गया है. वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अगर इसी तरह गर्मी बढ़ती रही, तो सदी के अंत तक पृथ्वी का तापमान 4.9 डिग्री फारेनहाइट (प्री-इंडस्ट्रियल स्तर से) बढ़ सकता है. ये खतरनाक हद तब भी पार होगी, जब देश प्रदूषण रोकने के अपने वादों को पूरा करें. सबसे ज़्यादा मार आर्कटिक पर पड़ रही है, जो पहले जैसा नहीं रहेगा. इस स्टडी ने सबके होश उड़ा दिए हैं. हैम्बर्ग यूनिवर्सिटी के पोलर रिसर्च प्रोफेसर और स्टडी के सह-लेखक डिर्क नॉट्ज़ ने कहा, “हमारे पास आज वो ताकत है कि हम धरती से पूरे परिदृश्य को मिटा सकते हैं.” SciTechDaily के हवाले से उन्होंने बताया, “अगर हम अपनी इस ताकत और ज़िम्मेदारी को समझ लें, तो आर्कटिक का भविष्य हमारे हाथों में है.”
आर्कटिक में तापमान बाकी दुनिया से चार गुना तेज़ी से बढ़ रहा है और इसका असर भयानक होगा. स्टडी में कहा गया है कि वहां हर दिन का तापमान प्री-इंडस्ट्रियल चरम से ज़्यादा होगा, आर्कटिक महासागर गर्मियों में कई महीनों तक बर्फ से खाली हो जाएगा, ग्रीनलैंड का पिघलने वाला इलाका चार गुना बढ़ जाएगा और परमाफ्रॉस्ट का क्षेत्र आधा रह जाएगा. ये बदलाव सिर्फ बर्फ और पानी तक सीमित नहीं हैं. जंगल, वन्यजीव और पूरी इकोसिस्टम तबाह हो सकती है. इंसानी बस्तियों और बुनियादी ढांचे को भी भारी नुकसान होगा. Science जर्नल में छपी इस स्टडी के मुताबिक, अगर ग्लोबल वॉर्मिंग को रोकने की कोशिशें तेज की जाएं, तो इस नुकसान को कम किया जा सकता है. हाल ही में यूएस नेशनल ओशनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (NOAA) की 2024 आर्कटिक रिपोर्ट कार्ड ने एक और डरावना सच बताया कि आर्कटिक अब कार्बन डाइऑक्साइड को सोखने की बजाय उसे छोड़ रहा है. ये खबर वैज्ञानिकों के लिए खतरे की घंटी है.
सवाल ये है कि आर्कटिक की इस तेज गर्मी से निपटने के लिए क्या हो रहा है? ऐसे में बता दें कि वैज्ञानिक एक नया AI टूल इस्तेमाल कर रहे हैं, जो आर्कटिक की समुद्री बर्फ के बदलाव को एक साल पहले तक भविष्यवाणी कर सकता है. इस मॉडल से नीति-निर्माताओं को फैसले लेने में मदद मिलेगी कि इस नाज़ुक इलाके को कैसे बचाया जाए. लेकिन सदी के अंत तक इस गर्मी को रोकने के लिए बड़े कदम उठाने होंगे. गंदे ऊर्जा स्रोतों को छोड़कर साफ और सस्ते विकल्प अपनाने होंगे. वैज्ञानिकों का कहना है कि इसके लिए आम लोगों की सहभागी भी बहुत जरुरी है. उन्हें सोलर पैनल लगाना होगा, इंडक्शन स्टोव चुनना होगा और आगे से इलेक्ट्रिक वाहन (EV) लेना जैसे कदम धरती को ठंडा रख सकते हैं. सोलर पैनल जैसे बदलाव बिजली बिल भी कम करते हैं. स्टडी की ये चेतावनी साफ है—अगर हमने अभी नहीं संभाला, तो आर्कटिक हमारी आंखों के सामने गायब हो जाएगा.
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Niranjan Dubey
न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में सीनियर एसोसिएट एडिटर के तौर कार्यरत. इंटरनेशनल, वेब स्टोरी, ऑफबीट, रिजनल सिनेमा के इंचार्ज. डेढ़ दशक से ज्यादा समय से मीडिया में सक्रिय. नेटवर्क 18 के अलावा टाइम्स ग्रुप, ...और पढ़ें
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