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बिहार में फतह करना है पहाड़ की चोटी या करना है ट्रेकिंग, तो आइये इस जगह

बिहार में शिमला-मनाली जैसे नजारे! फतह करना है पहाड़ की चोटी या करना है ट्रेकिंग, तो आइये इस खूबसूरत जगह

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Agency:Local18
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Hiking in Bihar: अगर आप हाइकिंग के शौकीन हैं और आपको पहाड़ों पर चढ़ने का शौक है तो आप जमुई जिले में ही अपनी हाइकिंग का शौक पूरा कर सकते हैं. यहां के पहाड़ पर आप चढ़ाई कर सकते हैं और बिना कहीं दूर गए, बिहार में ही माउंटेनिंग का लुत्फ उठा सकते हैं. 

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जमुई. नेचर के बीच एडवेंचर करने वाले लोग न तो दूरी देखते हैं और ना ही उसमें आने वाली परेशानी, फिर चाहे ऋषिकेश हो, मनाली हो या केदारनाथ, लोग वहां चले जाते हैं. लेकिन अगर आप हाइकिंग के शौकीन हैं और आपको पहाड़ों पर चढ़ने का शौक है तो आप जमुई जिले में ही अपनी हाइकिंग का शौक पूरा कर सकते हैं. यहां के पहाड़ पर आप चढ़ाई कर सकते हैं और बिना कहीं दूर गए, बिहार में ही माउंटेनिंग का लुत्फ उठा सकते हैं. हम बात कर रहे हैं जमुई जिले के गिद्धेश्वर हिल रेंज की, जहां एक पहाड़ी ऐसी भी है जिस पर आप ट्रेकिंग कर सकते हैं. आप यहां हाइकिंग कर सकते हैं और यह पूरी तरह से सुरक्षित भी है.

दरअसल, जमुई जिले के खैरा प्रखंड क्षेत्र के गिद्धेश्वर में स्थित है गिद्धेश्वर वन्य क्षेत्र, जहां स्थित नथुनिया पहाड़ पर लोग ट्रेकिंग करते हैं. हम भी यहां आम लोगों के साथ ट्रेक करने पहुंचे, जहां हमने यह जानने का प्रयास किया कि वाकई यह पहाड़ चढ़ने के लायक है या नहीं. सुबह 11 बजे हमने पहाड़ की तलहटी से अपनी चढ़ाई शुरू की. यह पहाड़ करीब 18 सौ से 2 हजार मीटर ऊंचा है. यहां चढ़ाई के लिए कोई स्पेशल ट्रैक नहीं बना है, लेकिन लोगों के आने जाने से यहां पथरीला रास्ता बना हुआ है. कई जगह पर थोड़ी चढ़ाई है, लेकिन कई जगहों पर बिल्कुल खड़ी और पथरीली चढ़ाई है. करीब डेढ़ घंटे ट्रेक करने के बाद आखिरकार हम अपनी मंजिल पर पहुंचे.
पहाड़ की चोटी पर बना हुआ है मंदिर
नथुनिया पहाड़ की चोटी पर पहुंचकर हमने देखा कि वहां एक मंदिर बना हुआ है. जो स्थानीय लोगों के द्वारा ईंट और अन्य निर्माण सामग्री को पहुंचाकर बनाया गया है. यहां लोगों की काफी भीड़ थी, जो यहां ट्रेकिंग करने आई थी. पहाड़ के एक तरफ सीधी बड़ी खाई और सामने नदी और उसमें बहती जलधारा का सुंदर दृश्य था. तो वहीं दूसरी तरफ पहाड़ और घने जंगल हैं. जनवरी के महीने में यहां बड़ी संख्या में लोग ट्रेक करने आते हैं. हालांकि, साल के बाकी महीने में भी लोग यहां ट्रेकिंग करते हैं. स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां हर साल भव्य पूजन आयोजन भी होता है.
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ढाई घंटे की मशक्कत के बाद पहुंचे थे लोग
यहां कई लोग ऐसे थे जो करीब ढाई घंटे की मशक्कत के बाद यहां पहुंचे थे. स्थानीय युवक मुन्ना कुमार ने बताया कि उन्होंने करीब एक घंटे की चढ़ाई में ही पहाड़ की चोटी फतह कर ली. उन्होंने बताया कि वो हर साल यहां आते हैं और उन्हें ट्रेकिंग काफी पसंद है. मुन्ना ने बताया कि ट्रेकिंग के बाद काफी ऊर्जावान महसूस होता है. हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर इस जगह को थोडा और विकसित किया जाए तो यहां बड़ी संख्या में लोग आएंगे और यह स्थान एक बड़े पर्यटक स्थल के रूप में विकसित हो सकेगा.

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Mohd Majid
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