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गांधी मैदान में अब नहीं होगी छात्रों की फिजिकल ट्रेनिंग, गुस्से में अभ्यर्थी

गांधी मैदान में अब नहीं होगी छात्रों की फिजिकल ट्रेनिंग, अभ्यर्थी बोले- 'मेला और रैली से नहीं हमारी प्रैक्टिस से परेशानी'

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Gandhi Maidan Physical Preparation: जिला प्रशासन के इस आदेश का सीधा असर अभ्यर्थियों की तैयारी पर पड़ा है. आदेश के बाद लोकल 18 की टीम ने बिहार पुलिस की तैयारी कर रहे कई अभ्यर्थियों से बातचीत की. अभ्यर्थियों ने बताया कि नौकरी की उम्मीद में वे दिन-रात एक कर कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन..

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पटना: राजधानी के गांधी मैदान में बिहार पुलिस, सेना सहित अलग अलग प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए फिजिकल की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को बड़ा झटका लगा है. प्रमंडलीय आयुक्त और श्रीकृष्ण स्मारक विकास समिति के अध्यक्ष अनिमेष कुमार पराशर ने गांधी मैदान में फिजिकल की ट्रेनिंग करवाने वाले कोचिंग को तत्काल प्रभाव से बंद करने का आदेश दिया. अब ये ट्रेनर बच्चों को गंगा किनारे के मैदानों में ही शारीरिक प्रशिक्षण दे सकेंगे. जिला प्रशासन के इस आदेश का सीधा असर अभ्यर्थियों की तैयारी पर पड़ा है. आदेश के बाद लोकल 18 की टीम ने बिहार पुलिस की तैयारी कर रहे कई अभ्यर्थियों से बातचीत की. कैमरे के सामने उनका दर्द साफ नजर आया. अभ्यर्थियों ने बताया कि नौकरी की उम्मीद में वे दिन-रात एक कर कड़ी मेहनत कर रहे हैं. ऐसे में इस तरह के आदेश से उनका फोकस पूरी तरह बिगड़ रहा है.

हालांकि, व्यक्तिगत रूप से रनिंग या व्यायाम करने पर कोई रोक नहीं लगाई गई है. अभ्यर्थियों का कहना है कि हमें गंगा घाट के किनारे प्रैक्टिस करने की सलाह दी जा रही है, जबकि वहां की जमीन बालू वाली है. बालू पर दौड़ने से पैरों में तेज दर्द होने लगता है. उनकी तैयारी समतल ग्राउंड पर होनी चाहिए. अभ्यर्थियों का कहना है कि मौजूदा हालात में अब ऐसा लगने लगा है कि सब कुछ छोड़कर गांव लौटना ही पड़ेगा.
स्टूडेंट हैं साहब, आसानी से कुछ नहीं मिलता
बिहार पुलिस फिजिकल की तैयारी कर रहीं शिवानी कुमारी बताती हैं कि दो दिन बाद गर्दनीबाग ग्राउंड में उनकी दौड़ है. अंतिम चरण की तैयारी को लेकर मैं गांधी मैदान पहुंची हूं. पहले हाई जंप का अभ्यास भी गांधी मैदान में ही होता था, लेकिन अब प्रशासन द्वारा गद्दे और अन्य जरूरी संसाधन हटा दिए गए हैं. इससे कुछ परेशानियां जरूर बढ़ी हैं. हालांकि शिवानी आगे कहती हैं, ‘मैनेज हो जाएगा, क्योंकि जो संघर्ष करता है वही जीतता है’. उनका कहना है कि राजधानी पटना में गांधी मैदान ही एक ऐसी जगह है, जहां अभ्यास के लिए समतल जमीन उपलब्ध है, जो फाइनल रनिंग ट्रैक जैसी है. इसके बावजूद अभ्यर्थियों को गंगा घाट वाले इलाकों में अभ्यास करने की सलाह दी जा रही है, जहां बालू वाली जमीन होने के कारण दौड़ में काफी दिक्कत होती है. शिवानी का मानना है कि अगर प्रशासन गंगा घाट के इलाकों को सही तरीके से दौड़ने लायक बना दे, तो अभ्यर्थियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होगी. उन्होंने कहा, ‘हम सभी स्टूडेंट हैं और मेहनत करना हमारी आदत है. जगह चाहे जो भी हो, हम अपनी मेहनत नहीं छोड़ेंगे.’
मेला, रैली से दिक्कत नहीं, हमारी प्रैक्टिस से परेशानी
वहीं, बिहार पुलिस की दौड़ की तैयारी कर रहे शुभम कुमार बताते हैं कि दौड़ प्रक्रिया शुरू हो चुकी है. ऐसे में हाई जंप सहित कई तैयारियां अभी अधूरी हैं. इसी बीच प्रशासन ने गांधी मैदान से ट्रेनिंग में उपयोग होने वाले गद्दे और अन्य ट्रेनिंग उपकरणों को हटवा दिया है. अभ्यर्थियों ने ट्रेनरों को फीस भी दे दी है, लेकिन अब स्थिति यह है कि कोई गंगा घाट की ओर बालू वाली जमीन पर ट्रेनिंग कराने ले जा रहा है, तो कोई कहीं और अभ्यास कराने को मजबूर है.
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इस आदेश से तैयारी पर सीधा असर
शुभम का कहना है कि अंतिम दिनों में इससे न सिर्फ फोकस गड़बड़ा रहा है, बल्कि तैयारी पर भी सीधा असर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि गांधी मैदान एक सार्वजनिक स्थान है, जहां मेले, रैलियां और कई तरह के बड़े कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं. जब इतने कार्यक्रमों से किसी तरह की दिक्कत नहीं होती, तो युवाओं के अभ्यास करने से क्या परेशानी हो सकती है. गांधी मैदान आने का हक सभी को है. शुभम ने आगे बताया कि प्रशासन की ओर से घास खराब होने और मैदान में गड्ढे होने का कारण बताया जा रहा है. उन्होंने सवाल उठाया कि जब मेले और रैलियों से घास खराब नहीं होती, तो क्या हमारे दौड़ने से ही घास खराब हो रही है?
आखिरी दिनों में ऐसा आदेश, गड़बड़ा रहा है फोकस
अमित कुमार बताते हैं कि आज के समय में नौकरी मिलना ही अपने आप में बेहद मुश्किल हो गया है. ऐसे में जब किसी नौकरी को पाने के लिए हजारों अभ्यर्थी जी-तोड़ मेहनत कर रहे हैं, तब इस तरह के आदेश उनके ध्यान को भटकाने वाले हैं. उन्हें एंटा घाट की ओर जाकर अभ्यास करने की सलाह दी जा रही है, जहां की जमीन बालू वाली है. ऐसी सतह पर दौड़ लगाने से पैर जम जाते हैं, जबकि दौड़ की तैयारी के लिए समतल और मजबूत जमीन की जरूरत होती है. ऐसे हालात में अभ्यास करना काफी मुश्किल हो जाता है. अगर इस दौरान किसी तरह की चोट लग जाती है, तो हमारी लाइफ और करियर सब बर्बाद हो जाएगा.
बालू वाली जमीन पर कैसे होगी प्रैक्टिस!
जहानाबाद के रहने वाले राजा कुमार पटना में रहकर बिहार पुलिस की तैयारी कर रहे हैं. इन दिनों दौड़ की जमकर मेहनत कर रहे हैं. उनका कहना है कि पटना में गांधी मैदान ही एक ऐसी जगह है, जहां सही तरीके से प्रैक्टिस की जा सकती है. इसी वजह से यहां काफी भीड़ भी रहती है. पटना के कोने-कोने से अभ्यर्थी गांधी मैदान में अभ्यास करने के लिए पहुंचते हैं. उन्होंने आगे बताया कि अब यह सुनने में आ रहा है कि अभ्यर्थियों को गांधी मैदान में दौड़ने और प्रैक्टिस करने नहीं दिया जाएगा. ऐसे में हमें समझ नहीं आ रहा है कि हम कहां जाएं. बीएन कॉलेज के छात्र होने के बावजूद वहां भी गेट बंद कर दिया जाता है. पटना साइंस कॉलेज के ग्राउंड में भी प्रैक्टिस करने की अनुमति नहीं है. मजबूरी में अब हमें एंटा घाट की ओर बालू पर दौड़ने को कहा जा रहा है.
चले जाएंगे गांव, लेकिन नहीं छोड़ेंगे प्रैक्टिस
राजा कुमार बताते हैं कि अगर यही हाल रहा तो दौड़ की तैयारी के लिए वापस गांव जाना पड़ेगा, क्योंकि पटना में कोई जगह नहीं बची है. उनके एक दोस्त ने भी बताया कि अगर इस समस्या का समाधान नहीं निकला, तो मजबूरी में सभी को गांव लौटना पड़ेगा, लेकिन अपनी प्रैक्टिस किसी भी हाल में नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने आगे कहा कि प्रशासन का कहना है कि गंगा घाट के आसपास काफी जगह है और वहीं जाकर दौड़ लगाई जाए. जबकि हम लोगों को फाइनल दौड़ ग्राउंड पर देनी है, जिसकी जमीन पूरी तरह समतल होती है. गंगा घाट की तरफ बालू है. अगर बालू पर प्रैक्टिस करेंगे, तो समतल मैदान पर दौड़ने में दिक्कत आएगी और समय पर भी असर पड़ेगा. इसके अलावा हाई जंप की तैयारी भी पूरी तरह रुकी हुई है. बालू में दौड़ने से पैरों में दर्द हो रहा है और काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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Amita kishor
न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क...और पढ़ें
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