Advertisement
होमताजा खबरमनी
चमक खो रहा है डायमंड, सोना-चांदी क्यों बन रहे निवेशकों की पहली पसंद?

चमक खो रहा है डायमंड, सोना-चांदी क्यों बन रहे निवेशकों की पहली पसंद?

Last Updated:

पिछले दो साल में प्राकृतिक हीरों की कीमतें 26% और लैब-ग्रोउन हीरे 74% तक सस्ते हो गए हैं, जिससे डायमंड बाजार दबाव में है. दूसरी ओर, अनिश्चितता के माहौल में निवेशक सोना-चांदी को सुरक्षित विकल्प मानकर उसमें ज्यादा पैसा लगा रहे हैं.

चमक खो रहा है डायमंड, सोना-चांदी क्यों बन रहे निवेशकों की पहली पसंद?Zoom
नई दिल्ली. कभी ‘सदा के लिए’ माने जाने वाले हीरों का बाजार इन दिनों मुश्किल दौर से गुजर रहा है. पिछले दो सालों में असली (प्राकृतिक) हीरों की कीमतें करीब 26% तक गिर गई हैं. वहीं, लैब में तैयार होने वाले हीरे (लैब-ग्रोउन) तो 74% तक सस्ते हो चुके हैं. दूसरी तरफ, सोना और चांदी अपनी चमक बिखेर रहे हैं और निवेशक इनमें जमकर पैसा लगा रहे हैं.

महंगाई के इस दौर में हीरे में इतनी बड़ी गिरावट असामान्य मानी जा रही है. लंदन के मशहूर हीरा बाजार हैटन गार्डन के एक जौहरी के अनुसार, “अभी हीरा खरीदना ठीक समय नहीं है. कुछ समय में यह और सस्ता हो सकता है.”
एक साल में 2 अरब डॉलर का हीरा बेच नहीं सकी डी बीयर्स
दुनिया की बड़ी हीरा कंपनी डी बीयर्स ने बताया कि 2024 की शुरुआत में उसके पास 2 अरब डॉलर का हीरा का स्टॉक था, जो साल के अंत तक भी नहीं बिक सका. कंपनी ने खदानों में प्रोडक्शन 20 फीसदी तक घटा दिया है और उसकी मूल कंपनी एंग्लो अमेरिकन ने उसे बेचने का फैसला किया है.
हीरे क्यों हो रहे हैं सस्ते?
एक्सपर्ट के मुताबिक, कोरोना महामारी के बाद ‘रिवेंज स्पेंडिंग’ के कारण हीरों की मांग अचानक बढ़ी थी, और टली हुई शादियों और लग्जरी खर्च ने बाजार को उछाल दिया था, लेकिन अब वह मांग सामान्य हो चुकी है. चीन में आर्थिक सुस्ती, वैश्विक मंदी का डर और शादियों की संख्या में कमी भी कीमतों में गिरावट की बड़ी वजह है.
Advertisement
कुछ ही घंटों में तैयार हो जाते हैं लैब-ग्रोउन हीरे
सबसे बड़ा बदलाव लैब-ग्रोउन हीरों का तेजी से बढ़ता बाजार है. पहले इन्हें बनाने में कई हफ्ते लगते थे, लेकिन अब कुछ ही घंटों में तैयार हो जाते हैं. इनकी सोर्स साफ होती है, इसलिए युवा ग्राहक इन्हें ज्यादा नैतिक और पर्यावरण के अनुकूल मानते हैं. आज ब्राइडल ज्वेलरी बाजार में करीब 45 प्रतिशत हिस्सेदारी लैब-ग्रोउन हीरों की है.
अमेरिका में एक कैरेट प्राकृतिक हीरे की औसत कीमत मई 2022 में 6,819 डॉलर थी, जो दिसंबर तक गिरकर 4,997 डॉलर रह गई. वहीं समान आकार का लैब-ग्रोउन हीरा 3,410 डॉलर से गिरकर सिर्फ 892 डॉलर तक पहुंच गया. सस्ते होने के कारण ग्राहक अब बड़े आकार के हीरे खरीद पा रहे हैं. हालांकि, कुछ पारंपरिक जौहरी अब भी प्राकृतिक हीरों को बेहतर मानते हैं. उनका कहना है कि लैब-ग्रोउन हीरे ‘बनाए’ जाते हैं, उनमें इतिहास या दुर्लभता नहीं होती.
पहले भी झटके झेल चुका है हीरा उद्योग
इतिहास बताता है कि हीरा उद्योग पहले भी झटके झेल चुका है. 18वीं सदी में ब्राजील में नए भंडार मिलने से कीमतें दो-तिहाई तक गिर गई थीं. बाद में दक्षिण अफ्रीका में खोज से भी बाजार हिला था, लेकिन मार्केटिंग और नए ग्राहकों ने उद्योग को संभाल लिया.
लगातार बढ़ रही है सोने-चांदी की मांग
वहीं, सोने और चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है और एक्सपर्ट इनमें निवेश की सलाह दे रहे हैं, तो वहीं हीरों की चमक फीकी पड़ने की वजह से लोग इसमें निवेश से कतरा रहे हैं, क्योंकि हीरों का बाजार एक ‘भावनात्मक और कृत्रिम’ मूल्य पर टिका है. अगर लोगों का भरोसा और चाहत कम होती है, तो इसकी चमक और फीकी पड़ सकती है.

About the Author

विनय कुमार झा
प्रिंट मीडिया से करियर की शुरुआत करने के बाद पिछले 8 सालों से News18Hindi में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर कार्यरत हैं. लगभग 4 सालों से बिजनेस न्यूज टीम का हिस्सा हैं. मीडिया में करीब डेढ़ दशक का अनुभव रखते हैं. बिजन...और पढ़ें
Click here to add News18 as your preferred news source on Google.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
और पढ़ें