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सप्लाई चेन 2.0: टेक्नोलॉजी से बदलेगा माल ढुलाई का खेल, कंपनियां होंगी और स्मार

2025 में सप्लाई चेन का मेकओवर! लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री अब टेक और डेटा से होगी सुपरफास्ट

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नई दिल्ली में लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सेक्टर 2025 में AI, IoT, ब्लॉकचेन, KPMG, Gartner, WEF जैसी संस्थाओं के साथ डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और रेजिलिएंस पर केंद्रित है.

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सप्लाई चेन 2.0: टेक्नोलॉजी से बदलेगा माल ढुलाई का खेल, कंपनियां होंगी और स्मारZoom
नई दिल्ली. तेजी से बदलती दुनिया में जहां जियोपॉलिटिकल तनाव, क्लाइमेट चेंज और आर्थिक अस्थिरता जैसी चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं, वहीं लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन सेक्टर एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है. पहले जहां यह केवल प्रोडक्शन और डिलीवरी तक सीमित था, अब यह एक जटिल, डिजिटल और इंटरकनेक्टेड नेटवर्क बन चुका है, जो सिर्फ सामान नहीं, बल्कि रणनीति और भरोसे को भी आगे बढ़ा रहा है.

2025 में फोकस सिर्फ सर्वाइव करने पर नहीं, बल्कि “रेजिलिएंस” यानी झटकों के बीच भी टिके रहने और आगे बढ़ने पर है. अब यह जरूरी हो गया है कि कंपनियां ऐसी सप्लाई चेन बनाएं जो किसी भी संकट के समय खुद को संभाल सके और लगातार विकास करती रहे.

पिछले दशक से सीख

कोविड-19 महामारी, सुएज कैनाल ब्लॉकेज और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे संकटों ने दिखा दिया कि “जस्ट-इन-टाइम” मॉडल अब टिकाऊ नहीं है. 2025 में रेजिलिएंस यानी मजबूती ही असली प्रतियोगिता का पैमाना है. केपीएमजी (KPMG) की रिपोर्ट कहती है कि अब कंपनियों को विजिबिलिटी के साथ-साथ रिस्क मैनेजमेंट और कॉस्ट ऑप्टिमाइजेशन पर ध्यान देना होगा. वहीं गार्टनर (Gartner) का कहना है कि एआई, ऑटोमेशन और IoT मिलकर ऐसी सप्लाई चेन बना रहे हैं जो खुद तय कर सके कि कब क्या करना है. अब लक्ष्य सिर्फ सर्वाइव करना नहीं, बल्कि “रेजिलिएंट नेटवर्क” बनाना है – ऐसा नेटवर्क जो आने वाले संकटों को पहले से पहचान सके और डिस्टर्बेंस के बावजूद आगे बढ़ता रहे.

2025 में सप्लाई चेन को आकार देने वाले बड़े ट्रेंड्स

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सप्लाई चेन अब डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के नए दौर में है. कुछ बड़े रुझान (ट्रेंड्स) जो आने वाले समय को परिभाषित करेंगे, वे हैं:
  • एआई और जेनरेटिव एआई (AI & Generative AI): एआई अब डिमांड फोरकास्टिंग और ऑटोमेशन में मदद कर रहा है जिससे स्टॉक आउट 30% तक घटे हैं.
  • नियरशोरिंग (Nearshoring): कंपनियां अब प्रोडक्शन अपने करीब के देशों में ला रही हैं ताकि डिलीवरी टाइम 50% तक घटे.
  • सस्टेनेबिलिटी और कार्बन ट्रैकिंग (Sustainability & Carbon Tracking): कंपनियां अब नेट जीरो और ESG रिपोर्टिंग पर ध्यान दे रही हैं जिससे ऑपरेशन ज्यादा एफिशिएंट हो रहे हैं.
  • आईओटी और डिजिटल ट्विन्स (IoT & Digital Twins): रियल टाइम ट्रैकिंग और डिजिटल ट्विन्स से सप्लाई चेन डिस्टर्बेंस 40% तक घटे हैं.
  • ऑटोमेशन और रोबोटिक्स (Automation & Robotics): वेयरहाउस में रोबोट्स और ड्रोन से एफिशिएंसी 25% तक बढ़ी है.
  • ब्लॉकचेन और डिजिटल इंटीग्रेशन (Blockchain & Digital Integration): ब्लॉकचेन से डेटा शेयरिंग ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी हो गई है.
  • साइबर सिक्योरिटी और रिस्क मैनेजमेंट (Cybersecurity & Risk Management): कंपनियां अब ब्लॉकचेन सिक्योरिटी से डेटा लीकेज और हैकिंग से बच रही हैं.
  • वर्कफोर्स अपस्किलिंग (Workforce Upskilling): नई टेक्नोलॉजी अपनाने के लिए वर्कफोर्स को एआई और डिजिटल ट्रेनिंग दी जा रही है.

रेजिलिएंट सप्लाई चेन बनाने की बुनियादें

रेजिलिएंस किसी संकट के बाद नहीं, बल्कि पहले से तैयार की जाती है. वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (WEF) के मुताबिक, एआई से कंपनियां “ट्रांसपेरेंट नेटवर्क” बना रही हैं जो मौसम, टैरिफ और जियोपॉलिटिकल बदलावों के असर का पहले से अंदाजा लगा सकते हैं.
  • सप्लायर डाइवर्सिफिकेशन और सीनारियो प्लानिंग: मल्टी-टियर सप्लायर्स को ट्रैक करें और डिजिटल ट्विन्स के जरिए भविष्य के जोखिमों का सिमुलेशन करें.
  • टेक्नोलॉजी स्टैक मॉडर्नाइजेशन: पुराने सिस्टम्स को एआई और API से जोड़ें ताकि ऑर्डर प्रोसेसिंग फास्ट हो सके.
  • सस्टेनेबिलिटी: नेट-जीरो और कार्बन ट्रैकिंग से न केवल ब्रांड इमेज बढ़ती है बल्कि नियामकीय जोखिम भी घटता है.
  • कोलैबोरेटिव नेटवर्क: 3PL और पार्टनर्स के साथ डेटा शेयरिंग से विजिबिलिटी बढ़ती है.
  • एथिकल एआई और स्किल डेवलपमेंट: एआई का जिम्मेदार इस्तेमाल और कर्मचारियों की ट्रेनिंग अब रेजिलिएंस का हिस्सा है.

About the Author

Jai Thakur
जय ठाकुर 2018 से खबरों की दुनिया से जुड़े हुए हैं. 2022 से News18Hindi में सीनियर सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं और बिजनेस टीम का हिस्सा हैं. बिजनेस, विशेषकर शेयर बाजार से जुड़ी खबरों में रुचि है. इसके अलावा दे...और पढ़ें
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